भाकृअनुप–आईएआरआई, नई दिल्ली में ‘समर्थ 2026’ के आयोजन के साथ इनक्यूबेटर्स को सशक्त बनाने पर जोर

भाकृअनुप–आईएआरआई, नई दिल्ली में ‘समर्थ 2026’ के आयोजन के साथ इनक्यूबेटर्स को सशक्त बनाने पर जोर

19–20 मार्च, 2026, नई दिल्ली

पूसा कृषि, भाकृअनुप–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप–आईएआरआई) ने 19–20 मार्च, 2026 के दौरान नास्क कॉम्प्लेक्स, नई दिल्ली में “समर्थ 2026 – इनक्यूबेटर्स को सशक्त बनाना” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस कार्यशाला में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की आरकेवीवाई–रफ्तार पहल के अंतर्गत देशभर से 31 इनक्यूबेटर्स ने भाग लिया। यह कार्यक्रम सहयोग, ज्ञान आदान-प्रदान तथा कृषि स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए एक प्रभावी मंच साबित हुआ।

स्वागत संबोधन में डॉ. चेरुकमल्ली श्रीनिवास राव, निदेशक, भाकृअनुप–आईएआरआई, ने कहा कि इनक्यूबेटर्स वैज्ञानिक अनुसंधान तथा जमीनी स्तर पर उसके क्रियान्वयन के बीच की दूरी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन तथा बदलती बाजार आवश्यकताओं के परिप्रेक्ष्य में, इनक्यूबेटर्स नवाचारों को किसानों के अनुकूल एवं विस्तार योग्य समाधानों में बदलने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

ICAR-IARI, New Hosts SAMARTH 2026 to Empower the Incubators

. राव ने आगे कहा कि एक मजबूत इनक्यूबेशन प्रणाली प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण को गति देगी, कृषि स्टार्टअप्स को बढ़ावा देगी और सतत कृषि विकास में योगदान करते हुए किसानों तथा ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाएगी।

उद्घाटन सत्र में श्री नबीन कुमार रॉय, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की परिवर्तनकारी भूमिका को रेखांकित किया, जो सतत कृषि-उद्यम के रूप में ग्रामीण विकास को गति दे रहे हैं। उन्होंने क्षमता निर्माण, ऋण सुविधा, बाजार संपर्क और मूल्य श्रृंखला विकास के माध्यम से नाबार्ड के समर्थन का उल्लेख किया तथा नब-वेनचर्स तथा एग्रीस्योर फंड जैसी पहलों के महत्व को भी बताया।

कार्यशाला में तकनीकी सत्र, विशेषज्ञ व्याख्यान और नॉलेज पार्टनर्स (केपी) तथा आरकेवीवाई–रफ्तार एग्रीबिजनेस इनक्यूबेटर्स (आरएबीआई) के अनुभव साझा करने के सत्र आयोजित किया गए। इनमें स्टार्टअप इक्विटी और मूल्यांकन, नवाचार समर्थन तंत्र, इनक्यूबेशन रणनीतियां तथा पायलट परियोजनाओं की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।

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सत्रों में नवाचार के मानवीय पहलुओं पर भी ध्यान केन्द्रित किया गया, जिसमें नेतृत्व, टीम निर्माण तथा संगठनात्मक संस्कृति की भूमिका को रेखांकित किया गया। साथ ही, स्टार्टअप्स के लिए संरचित मार्गदर्शन (मेंटॉरशिप), पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ाव और रणनीतिक समर्थन के महत्व पर भी जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने इनक्यूबेशन से जुड़ी सर्वोत्तम प्रथाओं, चुनौतियों और सफलता की कहानियों पर सक्रिय चर्चा की, जिससे आपसी सीख और संस्थागत सहयोग को बढ़ावा मिला। इस कार्यशाला ने देश में कृषि स्टार्टअप समर्थन प्रणाली को मजबूत करने और इनक्यूबेशन कार्यक्रमों की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव प्रदान किए।

“इनक्यूबेटर्स को सशक्त बनाना” की परिकल्पना को साकार करते हुए समर्थ 2026 का सफल समापन हुआ। इस कार्यशाला ने संस्थागत नेटवर्क को मजबूत किया और प्रतिभागियों को एक सशक्त, गतिशील और लचीले कृषि स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए आवश्यक ज्ञान, उपकरण और दृष्टिकोण प्रदान किए।

(स्रोत: भाकृअनुप–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली)

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