भाकृअनुप–आईएआरआई, नई दिल्ली में कृषि महत्त्व के कीटों की वर्गिकी एवं आणविक पहचान पर कार्यशाला का आयोजन

भाकृअनुप–आईएआरआई, नई दिल्ली में कृषि महत्त्व के कीटों की वर्गिकी एवं आणविक पहचान पर कार्यशाला का आयोजन

9 मार्च, 2026, नई दिल्ली

भाकृअनुप–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-आएआरआई), नई दिल्ली, के कीट विज्ञान प्रभाग द्वारा 9–11 मार्च, 2026 के दौरान “कृषि महत्व के कीटों की वर्गिकी एवं आणविक पहचान” विषय पर एएनआरएफ प्रायोजित तीन दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन भाकृअनुप–राष्ट्रीय पादप जैव प्रौद्योगिकी संस्थान, पूसा परिसर, नई दिल्ली, के सभागार में किया गया।

कार्यशाला का उद्घाटन रवीन्द्र नाथ पड़ारिया, संयुक्त निदेशक (प्रसार), भाकृअनुप–आईएआरआई, ने किया। उन्होंने कृषि कीट प्रबंधन, जैव सुरक्षा और जैव विविधता संरक्षण में कीटों की सटीक पहचान की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने भारतीय कृषि को प्रभावित करने वाले कीटों की सटीक और समयबद्ध पहचान सुनिश्चित करने के लिए पारंपरिक वर्गिकी को आधुनिक आणविक तकनीकों के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में एंटोमोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष वी. वी. राममूर्ति उपस्थित रहे। उन्होंने भारत में वर्गिकी विशेषज्ञता को सुदृढ़ करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। भाकृअनुप–आईएआरआई के कीट विज्ञान प्रभाग के अध्यक्ष एम. के. ढिल्लों ने कीट विज्ञान में मूलभूत और अनुप्रयुक्त अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए प्रभाग की प्रतिबद्धता दोहराई तथा कीट वर्गिकी और निदान में आणविक, डिजिटल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों के समावेशन पर विशेष जोर दिया।

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उद्घाटन सत्र के दौरान गणमान्य अतिथियों ने कार्यशाला से संबंधित एक प्रकाशन का विमोचन किया तथा “Tortricidae of India” नामक वेबसाइट का शुभारंभ भी किया।

इससे पूर्व, कार्यशाला के शशांक पी. आर., पाठ्यक्रम निदेशक, ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और पादप संरक्षण विशेषज्ञों के लिए कीट वर्गिकी और आणविक निदान में क्षमता निर्माण के महत्व पर बल दिया।

इस कार्यशाला में देशभर के 17 राज्यों से 32 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें विभिन्न विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और कृषि संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं। कार्यक्रम में विशेषज्ञ व्याख्यान, प्रायोगिक प्रशिक्षण सत्र तथा कीट वर्गिकी, आकारिक पहचान, डीएनए बारकोडिंग और अन्य आणविक निदान तकनीकों पर प्रदर्शन शामिल हैं।

यह पहल कीटों की पहचान में राष्ट्रीय क्षमता को सुदृढ़ करने तथा प्रभावी और सतत कृषि कीट प्रबंधन के लिए पारंपरिक वर्गिकी को उन्नत आणविक विधियों के साथ एकीकृत करने को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई है।

(स्रोत: भाकृअनुप–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली)

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