भाकृअनुप–आईएआरआई, नई दिल्ली में एफपीओ पर हितधारक परामर्श कार्यशाला का किया आयोजन

भाकृअनुप–आईएआरआई, नई दिल्ली में एफपीओ पर हितधारक परामर्श कार्यशाला का किया आयोजन

11 मार्च, 2026, नई दिल्ली

“किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की प्रभावशीलता के आकलन हेतु कार्यप्रणाली ढांचा” विषय पर एक हितधारक परामर्श कार्यशाला आज भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में नेमा (एनईएमए) परियोजना के अंतर्गत आयोजित की गई।

कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत संबोधन से हुई, जिसे डॉ. आर.एन. पडारिया, संयुक्त निदेशक (प्रसार), भाकृअनुप-आईएआरआई, नई दिल्ली ने दिया। उन्होंने एफपीओ को सुदृढ़ बनाने तथा किसानों के सामूहिक उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए साक्ष्य-आधारित मूल्यांकन के महत्व पर प्रकाश डाला। एफपीओ मूल्यांकन के लिए अवधारणात्मक ढांचे, साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, अनुसंधान डिजाइन तथा कार्यप्रणाली पर विस्तृत प्रस्तुति डॉ. राजीव के. सिंह, सहायक महानिदेशक (प्रसार), भाकृअनुप द्वारा दी गई।

Stakeholders’ Consultation Workshop of FPOs Organized at ICAR-IARI, New Delhi

कार्यशाला में डॉ. चेरुकमल्ली श्रीनिवास राव, निदेशक, भाकृअनुप-आईएआरआई, नई दिल्ली, ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने में एफपीओ की महत्वपूर्ण भूमिका के साथ-साथ छोटे एवं सीमांत किसानों की बात कि जो विपणन संबंधी अनेक चुनौतियों का सामना करते हैं। उन्होंने बाजार संपर्कों को मजबूत करने और सतत कृषि विकास को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही, स्टार्ट-अप्स के निर्माण और एफपीओ को सशक्त बनाने के महत्व को भी रेखांकित किया।

कार्यशाला में दो सत्र आयोजित किए गए। पहला सत्र एफपीओ के प्रदर्शन, प्रभावशीलता और प्रभाव के आकलन के लिए संकेतकों की पहचान पर केंद्रित था। इस सत्र में राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी (नार्म), राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक, लघु किसान कृषि व्यवसाय संघ, अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान तथा भारतीय कृषि सांख्यिकी अनुसंधान संस्थान सहित प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। देशभर के विभिन्न एफपीओ के सीईओ और प्रतिनिधियों के साथ-साथ प्रगतिशील किसानों और एफपीओ नेताओं ने भी अपने अनुभव और व्यावहारिक दृष्टिकोण साझा किए।

दूसरा सत्र एफपीओ के परिणामों के आकलन हेतु मूल्यांकन ढांचे के निर्माण पर केंद्रित था, जिसमें सैंपलिंग तकनीकों तथा गुणात्मक और मात्रात्मक उपायों पर विचार-विमर्श किया गया। अनुसंधान संस्थानों, नीति संगठनों और सांख्यिकीय इकाइयों के विशेषज्ञों ने बड़े पैमाने पर एफपीओ मूल्यांकन के लिए कार्यप्रणाली को सुदृढ़ करने हेतु अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

Stakeholders’ Consultation Workshop of FPOs Organized at ICAR-IARI, New Delhi

इस परामर्श में वैज्ञानिकों, भाकृअनुप-अटारी के निदेशकों, नीति-निर्माताओं, एफपीओ प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं और अन्य हितधारकों की सक्रिय भागीदारी रही। इन चर्चाओं से एक समग्र मूल्यांकन ढांचा विकसित होने की अपेक्षा है, जो भविष्य की नीतिगत निर्णयों को दिशा प्रदान करेगा और भारत में एफपीओ पारितंत्र को सशक्त बनाएगा।

कार्यशाला का समापन सभी हितधारकों की इस सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ हुआ कि वे प्रस्तावित ढांचे को परिष्कृत करने और उसे व्यवस्थित रूप से लागू करने के लिए सहयोग करेंगे।

(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली)

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