भाकृअनुप-आईआईएसडब्ल्यूसी, देहरादून ने उत्तराखंड के पुरोला स्थित कमल गंगा नदी के पुनर्जीवन नियोजन हेतु स्प्रिंग एवं रिवर रीजुवेनेशन अथॉरिटी के साथ समझौता ज्ञापन पर किया हस्ताक्षर

भाकृअनुप-आईआईएसडब्ल्यूसी, देहरादून ने उत्तराखंड के पुरोला स्थित कमल गंगा नदी के पुनर्जीवन नियोजन हेतु स्प्रिंग एवं रिवर रीजुवेनेशन अथॉरिटी के साथ समझौता ज्ञापन पर किया हस्ताक्षर

3 जून, 2026, देहरादून, उत्तराखंड

भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (भाकृअनुप-आईआईएसडब्लूसी), देहरादून, तथा उत्तराखंड सरकार के जलागम प्रबंधन निदेशालय के अंतर्गत आज स्प्रिंग एंड रिवर रीजुवेनेशन अथॉरिटी (एसएआरआरए) के बीच “सारा की ‘वन डिस्ट्रिक्ट–वन रिवर’ पहल के अंतर्गत चयनित नदियों (कमल गंगा नदी, पुरोला) के प्राथमिकता निर्धारण एवं पुनर्जीवन नियोजन” शीर्षक वाली परामर्श परियोजना को क्रियान्वित करने हेतु एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया गया। इस परियोजना का उद्देश्य उत्तरकाशी जिले के पुरोला ब्लॉक में स्थित कमल गंगा नदी के पुनर्जीवन के लिए एक व्यापक वैज्ञानिक रूपरेखा विकसित करना है।

अध्ययन के अंतर्गत प्रमुख क्षरणग्रस्त क्षेत्रों की पहचान, जलागम विशेषताओं का आकलन, जलवैज्ञानिक एवं पारिस्थितिक परिस्थितियों का मूल्यांकन तथा नदी के स्वास्थ्य, जल उपलब्धता और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं में सुधार हेतु एक विस्तृत नदी पुनर्जीवन योजना तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस परामर्श परियोजना के तहत भाकृअनुप-आईआईएसडब्ल्यूसी नदी पुनर्स्थापन और सतत जल संसाधन प्रबंधन के लिए प्राथमिकता वाले हस्तक्षेपों की पहचान करने हेतु विस्तृत क्षेत्रीय जांच एवं जलागम मूल्यांकन करेगा।

ICAR-IISWC, Dehradun Inks MoU with Spring River Rejuvenation Authority for River Rejuvenation Planning of Kamal Ganga River, Purola, Uttarakhand

सारा (एसएआरआरए) के अधिकारियों ने बताया कि ‘वन डिस्ट्रिक्ट–वन रिवर’ पहल का उद्देश्य वैज्ञानिक नियोजन, सामुदायिक सहभागिता तथा एकीकृत जलागम प्रबंधन के माध्यम से उत्तराखंड की महत्वपूर्ण नदियों का संरक्षण और पुनर्जीवन करना है। कमल गंगा नदी का पुनर्जीवन राज्य में सतत नदी पुनर्स्थापन प्रयासों के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य करने की अपेक्षा है।

भाकृअनुप-आईआईएसडब्ल्यूसी के प्रतिनिधियों ने परियोजना के सफल क्रियान्वयन हेतु तकनीकी विशेषज्ञता तथा साक्ष्य-आधारित अनुशंसाएं प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। यह सहयोग क्षेत्र में जल संसाधनों के संरक्षण, पारिस्थितिक पुनर्स्थापन तथा सतत आजीविका को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान देने की अपेक्षा रखता है।

यह समझौता ज्ञापन नदी संरक्षण के लिए संस्थागत सहयोग को सुदृढ़ करने तथा उत्तराखंड में जलागम प्रबंधन एवं पर्यावरणीय स्थिरता के व्यापक उद्देश्यों की प्राप्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून)

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