25 मार्च, 2026, देहरादून
भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून, में आज एक दिवसीय हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया।
यह कार्यशाला दो सत्रों में आयोजित की गई, जिसमें 35 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञों ने मुख्य प्रशिक्षक के रूप में सत्रों का संचालन किया।
पहले सत्र में हिंदी भाषा पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया गया, जिसमें संस्कृत तथा पाली के प्रभाव से हिंदी के विकास, त्रैमासिक रिपोर्ट तैयार करने तथा ई-ऑफिस में “कंठस्थ” के उपयोग पर चर्चा की गई।
दूसरे सत्र में पावरपॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से कंप्यूटर में हिंदी के उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसमें अनुवाद उपकरणों तथा हिंदी में कार्यालयी कार्य को सरलता से करने के व्यावहारिक तरीकों की जानकारी दी गई।
इस अवसर पर प्रतिभागियों का स्वागत किया गया और उन्हें राजभाषा हिंदी के उपयोग से संबंधित प्रावधानों का पालन करने तथा कार्यालयी कार्यों में हिंदी का अधिकतम उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया।
डॉ. एम. मधु, निदेशक, भाकृअनुप–भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान ने अपने संबोधन में वक्ताओं द्वारा दिए गए ज्ञानवर्धक व्याख्यानों और व्यावहारिक मार्गदर्शन की सराहना की। उन्होंने कार्यशाला में भाग लेने वाले सभी वैज्ञानिकों, अधिकारियों और कर्मचारियों का स्वागत किया तथा ऐसे हिंदी कार्यशालाओं को राजभाषा के प्रगतिशील उपयोग के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।
अपने संबोधन में डॉ. मद्हु ने हिंदी को वैश्विक भाषा बनाने की दिशा में सभी के सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की। उन्होंने सभी से राजभाषा नियमों का पालन करने और अधिकतम कार्य हिंदी में करने का आह्वान किया।
(स्रोत: भाकृअनुप–भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून)







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