20 मार्च, 2026, हैदराबाद
भाकृअनुप–भारतीय श्री अन्न अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद, में ‘एनईएच के केवीके वैज्ञानिकों के लिए श्री अन्न मूल्य श्रृंखला विकास प्रशिक्षण’ विषय पर चार दिवसीय उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रम आज सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। इस कार्यक्रम में उत्तर-पूर्वी पहाड़ी (एनईएच) राज्यों के कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) से 10 कृषि वैज्ञानिकों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य श्री अन्न प्रसंस्करण, उत्पाद नवाचार एवं उद्यम विकास में उनकी तकनीकी दक्षताओं को सुदृढ़ करना था।
डॉ. सी. तारा सत्यवती, निदेशक, भाकृअनुप–भारतीय श्री अन्न अनुसंधान संस्थान ने एनईएच राज्यों द्वारा श्री अन्न पुनर्जीवन में की गई उल्लेखनीय प्रगति और देश में पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देने में उनकी बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्री अन्न के मूल्य संवर्धन, उद्यमिता और वैल्यू चेन विकास को आगे बढ़ाने के लिए केवीके वैज्ञानिकों के कौशल को सुदृढ़ करना अत्यंत आवश्यक है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम ने श्री अन्न पारिस्थितिकी तंत्र के सभी पहलुओं को कवर करते हुए व्यापक और व्यावहारिक सीखने का अनुभव प्रदान किया। प्रतिभागियों को एनईएच क्षेत्रों के लिए उपयुक्त उन्नत उत्पादन तकनीकों से अवगत कराया गया। इसके बाद श्री अन्न प्रोसेसिंग एवं प्रशिक्षण इकाई में प्राथमिक और द्वितीयक प्रसंस्करण पर व्यावहारिक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें सफाई, ग्रेडिंग, डीहस्किंग, मिलिंग और वैज्ञानिक पैकेजिंग तकनीकों को शामिल किया गया।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण विभिन्न श्री अन्न-आधारित मूल्य संवर्धित उत्पादों के विकास पर अनुभवात्मक प्रशिक्षण रहा। प्रतिभागियों ने इंस्टेंट मिक्स, पास्ता, सेवई, बेकरी उत्पाद (बिस्कुट और कुकीज़), रागी बीटरूट स्टिक्स, ज्वार डोनट्स और फ्लेवर्ड मिलेट माल्ट जैसे पारंपरिक एवं नवाचार उत्पाद तैयार किए, जो बाजार में अच्छी संभावनाएं दर्शाते हैं। न्यूट्री-हब में आयोजित प्रदर्शन और एक्सपोजर विजिट के माध्यम से प्रतिभागियों ने ज्वार लैमिंगटन केक, बाजरा एंज़ैक कुकीज़, फॉक्सटेल सॉल्टीन क्रैकर्स, मिलेट चुरोस, कोदो मिलेट वाजिक, प्रोसो मिलेट चिकन पिज़्ज़ा आदि अंतरराष्ट्रीय व्यंजनों की जानकारी प्राप्त की। इसके अलावा जीएमआरके फूड्स जैसे स्टार्टअप द्वारा श्री अन्न चिकी और न्यूट्रीबार बनाने का प्रशिक्षण भी दिया गया, साथ ही व्यावसायिक प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और बाजार संपर्क पर जानकारी साझा की गई।.

इसके अतिरिक्त, कार्यक्रम में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की भूमिका, पौध किस्मों और किसानों के अधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत स्वदेशी श्री अन्न किस्मों की सुरक्षा, तथा श्री अन्न पैकेजिंग और शेल्फ-लाइफ बढ़ाने की उन्नत तकनीकों पर भी सत्र आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों की सकारात्मक प्रतिक्रिया के साथ हुआ। उन्होंने अपने-अपने एनईएच क्षेत्रों में मिलेट-आधारित हस्तक्षेपों को मजबूत करने, किसानों को सहयोग देने और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए प्राप्त ज्ञान का उपयोग करने का विश्वास व्यक्त किया।
(स्रोत: भाकृअनुप–भारतीय श्री अन्न अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)







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