भाकृअनुप-आईआईएमआर, हैदराबाद द्वारा प्रोत्साहित तेलंगाना के टेकमाल एफपीओ को बाजार पहुंच बढ़ाने के लिए ज्वार क्रय केन्द्र प्राप्त हुआ

भाकृअनुप-आईआईएमआर, हैदराबाद द्वारा प्रोत्साहित तेलंगाना के टेकमाल एफपीओ को बाजार पहुंच बढ़ाने के लिए ज्वार क्रय केन्द्र प्राप्त हुआ

10 जून, 2026, हैदराबाद

दशकों से मोटे अनाज (मिलेट) उत्पादक किसानों को एक निरंतर चुनौती का सामना करना पड़ता रहा है। उत्पादन तकनीकों में सुधार होने के बावजूद सुनिश्चित बाजार और लाभकारी मूल्य तक उनकी पहुंच सीमित रही है। इस महत्वपूर्ण अंतर को पाटने और मिलेट उत्पादकों के लिए स्थायी बाजार अवसर सृजित करने के उद्देश्य से, भाकृअनुप–भारतीय मिलेट अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-आईआईएमआर), हैदराबाद, ने आज तेलंगाना के मेडक जिले के टेकमाल मंडल के पलवंचा गांव में एमएसपी सहकारी विभाग, टीएस मार्कफेड, मेडक के अंतर्गत एक ज्वार क्रय केंद्र की स्थापना के लिए तकनीकी सहयोग प्रदान किया। यह तेलंगाना का पहला एफपीओ है जिसे ज्वार के लिए यह क्रय केंद्र प्राप्त हुआ है। यह पहल सामूहिक खरीद, बेहतर मूल्य प्राप्ति और मजबूत बाजार संपर्कों के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

यह क्रय केंद्र जलवायु-अनुकूल होने के साथ-साथ आर्थिक रूप से लाभकारी मिलेट आधारित कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देने के प्रति भाकृअनुप-आईआईएमआर की निरंतर प्रतिबद्धता का परिणाम है। उन्नत तकनीकों और उन्नत किस्मों के माध्यम से मिलेट की उत्पादकता बढ़ाने में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, लेकिन उत्पादकों के लिए विश्वसनीय बाजार पहुंच सुनिश्चित करना अब भी एक बड़ी चिंता बनी हुई है। इस चुनौती को पहचानते हुए, भाकृअनुप-आईआईएमआर ने स्थानीय किसान संगठनों और प्रमुख हितधारकों के साथ मिलकर एक किसान-केंद्रित खरीद व्यवस्था विकसित की, जो उत्पादकों को सीधे संगठित बाजारों से जोड़ती है और इस प्रकार उत्पादन से लेकर विपणन तक मिलेट मूल्य श्रृंखला को मजबूत बनाती है।

Tekmal FPO in Telangana Promoted by ICAR-IIMR, Hyderabad receives Jowar Procurement Centre to boost market access

इस अवसर पर बोलते हुए मंडल कृषि अधिकारी ने पिछले एक दशक में टेकमाल मंडल में ज्वार की खेती में हुई उल्लेखनीय वृद्धि पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में जहां ज्वार की खेती का क्षेत्रफल केवल लगभग 80 एकड़ था, वहीं वर्ष 2025–26 के दौरान यह बढ़कर लगभग 808 एकड़ हो गया है, जो ज्वार की खेती के प्रति किसानों के बढ़ते विश्वास और उन्नत उत्पादन तकनीकों को अपनाने को दर्शाता है। मंडल के किसान वर्तमान में प्रति हेक्टेयर औसतन 25–30 क्विंटल अनाज उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं, जिससे ज्वार इस क्षेत्र के लिए एक अधिक लाभकारी और जलवायु-अनुकूल फसल बनती जा रही है।

उन्होंने कहा कि उत्पादन में लगातार वृद्धि के बावजूद स्थानीय खरीद सुविधा के अभाव में किसानों को लंबे समय से अपनी उपज के विपणन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। किसानों को अक्सर अन्य क्षेत्रों के खरीद केंद्रों तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे अतिरिक्त परिवहन लागत और व्यवस्थागत चुनौतियां उत्पन्न होती थीं। इन बाधाओं का विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था, जिससे उनकी कुल आय में कमी आती थी।

कृषि अधिकारी ने क्षेत्र में मिलेट पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में निरंतर सहयोग के लिए भाकृअनुप-आईआईएमआर, हैदराबाद के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ज्वार क्रय केंद्र की स्थापना टेकमाल मंडल किसान उत्पादक सहकारी समिति के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, क्योंकि पहली बार इस एफपीओ को ज्वार के लिए क्रय केंद्र की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने इस विकास को मंडल में किसानों के आत्मविश्वास और सामूहिक विपणन प्रयासों को बड़ी मजबूती प्रदान करने वाला कदम बताया।

उन्होंने किसानों को आगे जानकारी दी कि सरकार 3,699 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर ज्वार की खरीद कर रही है, जिससे किसानों को उचित और लाभकारी मूल्य सुनिश्चित हो रहा है। उन्होंने सभी ज्वार उत्पादकों से इस सुविधा का पूर्ण उपयोग करने का आग्रह करते हुए उन्हें अपनी उपज क्रय केन्द्र पर लाने और पारदर्शी खरीद प्रक्रिया का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह केंद्र किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा और जिले में मिलेट मूल्य श्रृंखला को मजबूत बनाएगा। नवस्थापित क्रय केंद्र के साथ उन्नत बीजों के वितरण को जोड़ने से किसानों को बढ़ी हुई उत्पादकता, एमएसपी ढांचे के अंतर्गत सुनिश्चित बाजार पहुंच, बिचौलियों पर निर्भरता में कमी तथा कृषि आय में सुधार का लाभ मिलेगा।

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क्रय कार्य से आगे बढ़कर, इस केंद्र को संपूर्ण मिलेट मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ करने के उत्प्रेरक के रूप में देखा जा रहा है। यह उपज के एकत्रीकरण को समर्थन देगा, किसान उत्पादक सहकारी समिति के माध्यम से सामूहिक विपणन में सुधार करेगा और छोटे तथा सीमांत किसानों की सौदेबाजी क्षमता को बढ़ाएगा। यह पहल अधिक किसानों को उन्नत मिलेट किस्मों की खेती के लिए प्रेरित करने की भी अपेक्षा रखती है, जिससे क्षेत्र में उत्पादन वृद्धि, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा तथा जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा मिलेगा।

भाकृअनुप-आईआईएमआर के वैज्ञानिकों ने इस बात पर जोर दिया कि मिलेट क्षेत्र का दीर्घकालिक विकास उत्पादन, खरीद, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन के एकीकरण पर निर्भर करता है। ज्वार क्रय केंद्र की स्थापना आईसीएआर-आईआईएमआर के उन सतत प्रयासों को प्रदर्शित करती है, जिनका उद्देश्य किसान-केंद्रित प्रणालियों का निर्माण करना है, जो न केवल उत्पादकता बढ़ाएं बल्कि मिलेट उत्पादक समुदायों के लिए बेहतर बाजार पहुंच और उन्नत आय भी सुनिश्चित करें।

(स्रोत: भाकृअनुप–भारतीय मिलेट अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)

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