17–18 मार्च, 2026, बेंगलुरु
भाकृअनुप–भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-आईआईएचआर), बेंगलुरु, ने 17–18 मार्च, 2026 को राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड परियोजना के अंतर्गत, कृषि विज्ञान केन्द्र, हेरेहल्लि के सहयोग से परागण कर्ता संरक्षण पर जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों की एक श्रृंखला आयोजित की।
17 मार्च, 2026 को भाकृअनुप-आईआईएचआर परिसर, बेंगलुरु, में आयोजित कार्यक्रम में तमिलनाडु के किसानों, बेंगलुरु स्थित जीपीएस इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल मैनेजमेंट (जीपीएसआईओएएम) के छात्रों तथा तुमकुर की शिवा गंगा बीकीपिंग एफपीओ की महिला किसानों ने भाग लिया।

18 मार्च, 2026 को दो आउटरीच कार्यक्रम होन्नेनहल्ली गांव, सिरा तालुक, तुमकुर जिला तथा टीवीएस स्कूल, तुमकुर में आयोजित किए गए। होन्नेनहल्ली में आयोजित किसान-केन्द्रित कार्यक्रम में मधुमक्खी पालन से जुड़े वक्कलु एफपीओ के सदस्यों ने भाग लिया, जबकि स्कूल कार्यक्रम में विद्यार्थियों के बीच परागण कर्ताओं के महत्व के बारे में जागरूकता पर विशेष ध्यान दिया गया।
कार्यक्रमों में कृषि उत्पादकता बढ़ाने और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में परागण कर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला गया। साथ ही, परागण कविताओं की संख्या बनाए रखने में फूलों वाली फसलों के महत्व पर भी जोर दिया गया। व्यावहारिक उपायों के रूप में फूलदार वार्षिक पट्टियों की खेती को परागण कर्ता संरक्षण के लिए प्रभावी रणनीति के रूप में बताया गया।

मधुमक्खी पालन के महत्व को भी रेखांकित किया गया, विशेष रूप से किसानों की आय बढ़ाने और फसल उत्पादन में सुधार करने में इसके योगदान को बताया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागियों को परागणकर्ता अनुकूल प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए फूलों वाले वार्षिक बीजों की छह किस्में और पुष्प कैलेंडर पर आधारित पुस्तिकाएं वितरित की गईं।
कुल मिलाकर, इन कार्यक्रमों से लगभग 174 प्रतिभागियों, जिनमें किसान, एफपीओ सदस्य, छात्र और शिक्षक शामिल थे, को लाभ मिला।
(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरु)







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