उत्तराखण्ड के विकास खण्ड-रूद्रपुर, जनपद-उधम सिंह नगर की निवासी श्रीमती बबली कोरंगा, एक साधारण ग्रामीण महिला, आज अपनी मेहनत, नवाचार और निरंतर सीखने की लगन के बल पर आत्मनिर्भर महिला उद्यमी की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं। जीवन में हमेषा कुछ नया सीखने और अपने पैरों पर खड़े होने का दृढ़ संकल्प ही उनकी सफलता की सबसे बड़ी शक्ति रहा।
वर्ष 2020 में बबली शिव शक्ति स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। 11 महिलाओं के इस समूह की प्रत्येक सदस्य प्रतिमाह ₹ 100 की बचत करती थी। छोटी-सी बचत से आरम्भ हुई यह यात्रा बबली के जीवन में एक बड़ा बदलाव लायी। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें ISD Tata Motars द्वारा गोबर से धूपबत्ती एवं अगरबत्ती निर्माण का प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। प्रशिक्षण से मिली प्रेरणा के साथ उन्होंने स्वयं सीखने का प्रयास जारी रखा तथा यूट्यूब के माध्यम से गोबर से निर्मित मूर्तियाँ एवं दीये बनाना भी सीखा। उन्होंने इन उत्पादों का व्यावसायिक उत्पादन प्रारम्भ किया। मात्र ₹ 2,000 के प्रारम्भिक निवेश से शुरू किए गए इस उद्यम से उन्हें पहले ही प्रयास में लगभग ₹ 10,000 की आय प्राप्त हुई, जिससे उनके आत्मविश्वास को नई उड़ान मिली।
समेटी द्वारा योगदानः- उद्यमिता को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से बबली ने वर्ष 2021 में समेटी, पंतनगर से उन्नत मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के उपरांत उन्होंने मशरूम उत्पादन की एक लघु इकाई स्थापित की। उत्पादन के उत्साहजनक परिणामों ने उनके आत्मविश्वास को और अधिक मजबूत किया तथा उन्हें यह विश्वास दिलाया कि उचित प्रशिक्षण, कठिन परिश्रम और समर्पण के माध्यम से सीमित संसाधनों के बावजूद उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की जा सकती है।
बबली यहीं नहीं रुकीं। उन्होंने समेती, पंतनगर द्वारा आयोजित जैविक कृषि, खाद्य प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन, उद्यमिता विकास तथा कृषि आधारित व्यवसाय जैसे विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता कर अपनी तकनीकी एवं व्यावसायिक दक्षता को निरंतर विकसित किया।
गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर के प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित किये जाने वाले ’रबी’ एवं ’खरीफ’ किसान मेलों में बबली को अपने उत्पादों के प्रदर्शन एवं विपणन हेतु निःशुल्क स्टॉल उपलब्ध कराया जाता है। इन मेलों ने बबली के उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाने के साथ-साथ बाजार विस्तार एवं ग्राहकों का विश्वास अर्जित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों का निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन उनके उद्यम की सफलता का एक महत्वपूर्ण आधार रहा है।
परिणामः- आज बबली ’बबली एंटरप्राइजेज’ की संस्थापक के रूप में उत्तराखण्ड की सफल महिला उद्यमियों में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुकी हैं। उनका उद्यम न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रहा है, बल्कि अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए भी स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता की प्रेरणा बन रहा है।
उनके उल्लेखनीय कार्यों को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं। उनके कार्यों का सीधा प्रसारण 20 अप्रैल, 2025 को ’’डीडी किसान’’ पर किया गया, जिससे उनकी उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। नई दिल्ली स्थित ’’विश्व युवक केन्द्र’’ द्वारा उन्हें 4 जुलाई, 2025 को National Gramin Heroes Winner- ₹ 100000 के सम्मान से भी सम्मानित किया गया। इसके पश्चात 5 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित AWESuM Conference के तहत उन्हें ‘^AWESuM Award^ से सम्मानित किया गया। उत्तरांचल विश्वविद्यालय द्वारा 26 फरवरी, 2026 को आयोजित ’’उत्तराखण्ड शक्ति कम्युनिटी समिट 2026’’ में उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें ’’प्रशस्ति प्रमाण-पत्र’’ भी प्रदान किया गया। उत्तराखण्ड के माननीय मुख्यमंत्री द्वारा आपको ‘लखपति दीदी’’ सम्मान से सम्मानित किया गया है।
प्रभावः- वर्तमान में बबली 5 एकड़ भूमि लीज पर लेकर जैविक खेती कर रही है। आज आपका वार्शिक टर्नओवर 10 से 12 लाख रूपये तक पहुंच चुका है। आज बबली अपने उद्यम के माध्यम से स्वयं आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ अन्य महिलाओं को भी प्रषिक्षण व रोजगार प्रदान करने का कार्य कर रही हैं। बबली का लक्ष्य उत्तराखण्ड के स्थानीय, पारम्परिक व प्राकृतिक उत्पादों को विष्व में एक पहचान दिलाना व अधिक से अधिक महिलाओं को आर्थिक रूप से सषक्त बनाना है।
बबली कोरंगा की सफलता यह सिद्ध करती है कि यदि महिलाओं को उचित प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, संस्थागत सहयोग तथा स्वयं आगे बढ़ने का अवसर मिले, तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना सकती हैं, बल्कि ग्रामीण समाज में आत्मनिर्भरता, नवाचार और महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल भी स्थापित कर सकती हैं। उनकी प्रेरणादायक यात्रा अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए यह संदेश देती है कि सीखने की निरंतर इच्छा, दृढ़ संकल्प और परिश्रम के माध्यम से सीमित संसाधनों में भी असाधारण उपलब्धियाँ प्राप्त की जा सकती हैं।
(स्रोतः राज्य कृशि प्रबन्धन एवं प्रसार प्रषिक्षण संस्थान. -उत्तराखण्ड, प्रसार षिक्षा निदेषालय पंतनगर विश्वविद्यालय)







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