9 सितंबर, 2026, उमियम, मेघालय
भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोन-VII, उमियम, मेघालय, को आज डॉ. ए.के. सिंह, कुलपति, रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय (आरएलबीसीएयू), झांसी और डॉ. डॉ. पी.एस. पांडे, कुलपति, राजेंद्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय (आरपीसीएयू), पूसा, बिहार, के संस्थान में अपने प्रथम दौरे पर स्वागत करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
डॉ. पी.एस. पांडे ने प्रकाश डाला कि विस्तार कोई समयबद्ध गतिविधि नहीं, बल्कि एक सतत प्रक्रिया है, जिसके लिए कृषक समुदायों के साथ निरंतर जुड़ाव आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि इसलिए केवीके को प्रौद्योगिकी प्रसार, क्षमता निर्माण और आजीविका संवर्धन के लिए दीर्घकालिक संस्थानों के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि केवल अल्पकालिक परियोजना-उन्मुख एजेंसियों के रूप में। उन्होंने आगे जोर दिया कि एक वास्तविक समावेशी और विकसित भारत की परिकल्पना केवीके को मजबूत एवं समर्थित किए बिना तथा कृषक समुदायों के साथ उनके निरंतर जुड़ाव को सुनिश्चित किए बिना साकार नहीं की जा सकती।

क्षेत्र की जटिल, जोखिम-प्रवण और व्यापक जैव विविधता को ध्यान में रखते हुए डॉ. ए.के. सिंह ने उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में केवीके के प्रदर्शन का आकलन मैदानी क्षेत्रों के केवीके की तुलना में अलग-अलग मानकों के साथ करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में छोटी और खंडित जोतें, चुनौतीपूर्ण पहाड़ी भूभाग, सीमित बुनियादी ढांचा और विशिष्ट सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियां हैं, जिसके कारण कृषि प्रौद्योगिकियों के मूल्यांकन और किसानों की उभरती तथा क्षेत्र-विशिष्ट आवश्यकताओं के समाधान के लिए संदर्भ-विशिष्ट दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
डॉ. ए.के. मोहंती, निदेशक, भाकृअनुप-अटारी, उमियम, ने संस्थान की नई पहलों जैसे राजस्व सृजन, ग्रामीण कृषि उद्यमिता, आईएसओ प्रमाणन, पूर्वोत्तर क्षेत्र में विभिन्न भाकृअनुप अनुसंधान संस्थानों के साथ कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीकॉ) के माध्यम से सहयोगात्मक अनुसंधान का अवलोकन प्रस्तुत किया।

गणमान्य व्यक्तियों ने भाकृअनुप-अटारी, उमियम के अधिकारियों और वैज्ञानिकों के साथ बातचीत की तथा विकसित भारत @2026 के सपने को साकार करने के लिए विभिन्न एजेंसियों के साथ अभिसरण मोड में अनुसंधान सहयोग, प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग और विस्तार गतिविधियों को मजबूत करने पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
चर्चाओं में उत्तर-पूर्वी कृषि की विशिष्ट चुनौतियों का सामना करने की रणनीतियों और किसानों को समर्थन देने तथा कृषि विस्तार प्रणाली को मजबूत करने में केवीके की महत्वपूर्ण भूमिका पर ध्यान केन्द्रित किया गया।
दोनों प्रख्यात कुलपतियों के दौरे और उनके समृद्ध अनुभवों के आदान-प्रदान ने उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में केवीके के प्रभाव को बढ़ाने के लिए कृषि विस्तार में संदर्भ-विशिष्ट दृष्टिकोण, निरंतर संस्थागत सहयोग और हितधारकों के बीच मजबूत समन्वय की आवश्यकता पर उनके मूल्यवान सुझावों के माध्यम से वैज्ञानिकों को महत्वपूर्ण प्रोत्साहन प्रदान किया।

अपने दौरे की स्थायी स्मृति के रूप में डॉ. ए.के. सिंह और डॉ. पी.एस. पांडे ने भाकृअनुप-अटारी परिसर में पौधे लगाए, जो संस्थान के साथ उनके स्थायी जुड़ाव और कृषि तथा कृषक समुदाय के सतत विकास के प्रति उनकी साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है। भाकृअनुप-अटारी, जोन-VII ने दोनों कुलपतियों के सौहार्दपूर्ण दौरे और मूल्यवान संवाद के लिए उनके प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।
(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोन-VII, उमियम, मेघालय)







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