आईएआरआई एलुमनाई एसोसिएशन और भाकृअनुप-आईएआरआई, नई दिल्ली ने विशिष्ट व्याख्यान का किया आयोजन

आईएआरआई एलुमनाई एसोसिएशन और भाकृअनुप-आईएआरआई, नई दिल्ली ने विशिष्ट व्याख्यान का किया आयोजन

3 जून, 2026, नई दिल्ली

आईएआरआई एलुमनाई एसोसिएशन (आईएए) ने भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के सहयोग से आज नई दिल्ली में “बेहतर पोषण के लिए मूल्य श्रृंखला-आधारित कृषि एवं खाद्य विज्ञान” विषय पर एक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया।

विशिष्ट व्याख्यान डॉ. विश्वेश्वरैया प्रकाश, पूर्व निदेशक, सीएफटीआरआई तथा विशिष्ट वैज्ञानिक, सीएसआईआर-इंडिया द्वारा दिया गया। अपने संबोधन में डॉ. प्रकाश ने इस बात पर बल दिया कि पोषण, स्वास्थ्य और कल्याण को संपूर्ण खाद्य मूल्य श्रृंखला को समाहित करने वाले समग्र दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। उन्होंने “पंचतत्व” (पांच मूलभूत तत्वों) की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, पोषण, स्वास्थ्य और स्थिरता के बीच परस्पर संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने बेहतर पोषण परिणाम सुनिश्चित करने के लिए खाद्य संसाधनों के स्मार्ट उत्पादन और स्मार्ट उपयोग की वकालत की।

IARI Alumni Association and ICAR-IARI, New Delhi Organizes Distinguished Lecture

प्रसिद्ध सिद्धांत “Food is thy medicine” का उल्लेख करते हुए डॉ. प्रकाश ने भोजन और मानव स्वास्थ्य के बीच गहरे संबंध को रेखांकित किया तथा कहा कि खाद्य विकल्प सीधे तौर पर समग्र स्वास्थ्य और कल्याण को प्रभावित करते हैं। उन्होंने यह भी बल दिया कि खाद्य पदार्थों की संरचनात्मक और बनावटी विशेषताएं उपभोक्ता स्वीकृति और पोषण संबंधी परिणामों को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करती हैं। उन्होंने पोषक तत्वों की जैव-उपलब्धता और जैव-सुलभता के बीच अंतर को स्पष्ट किया तथा इस बात पर जोर दिया कि प्रभावी खाद्य-आधारित समाधान विकसित करने के लिए पोषण के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण आवश्यक है। पोषण और पारिवारिक स्वास्थ्य में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने से अनेक पीढ़ियों के पोषण संबंधी कल्याण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है तथा घरेलू खाद्य सुरक्षा को मजबूत किया जा सकता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. आर.एस. परोदा, अध्यक्ष, आईएआरआई एलुमनाई एसोसिएशन, ने की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यद्यपि भारत ने खाद्य उत्पादन में उल्लेखनीय प्रगति की है, फिर भी पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। उन्होंने विशेष रूप से पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में कुपोषण पर चिंता व्यक्त की तथा पोषण संबंधी परिणामों में सुधार के लिए लक्षित हस्तक्षेपों की आवश्यकता पर जोर दिया। सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) और ‘जीरो हंगर’ के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए डॉ. परोदा ने कृषि को पोषण और स्वास्थ्य से जोड़ने के महत्व को रेखांकित किया।

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अपने उद्घाटन संबोधन में डॉ. चेरुकमल्ली श्रीनिवास राव, निदेशक, भाकृअनुप-आईएआरआई एवं मुख्य संरक्षक, आईएए, ने नवाचार-आधारित कृषि के महत्व पर प्रकाश डाला तथा कहा कि संस्थान पूसा कृषि के माध्यम से कृषि स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने में बढ़ता योगदान दे रहा है, जिसने 450 से अधिक कृषि स्टार्टअप्स को पोषित किया है। डॉ. राव ने खाद्य अपव्यय के गंभीर मुद्दे की ओर भी ध्यान आकर्षित किया और कहा कि उत्पादित खाद्य का लगभग 22-23 प्रतिशत मूल्य श्रृंखला के विभिन्न चरणों में नष्ट हो जाता है, जिससे कुशल उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण और वितरण प्रणालियों की आवश्यकता रेखांकित होती है।

संवादात्मक सत्र का संचालन डॉ. अनुपमा सिंह, अधिष्ठाता एवं संयुक्त निदेशक (शिक्षा), भाकृअनुप-आईएआरआई तथा आईएआरआई एलुमनाई एसोसिएशन की संरक्षक ने किया। इस सत्र ने कृषि, खाद्य विज्ञान, पोषण और सतत खाद्य प्रणालियों पर सार्थक चर्चाओं के लिए एक मंच प्रदान किया। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों, पूर्व छात्रों तथा कृषि क्षेत्र से जुड़े हितधारकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।

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इस कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों, पूर्व छात्रों तथा कृषि एवं खाद्य विज्ञान क्षेत्रों से जुड़े हितधारकों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की, जो सतत विकास के लिए कृषि, खाद्य विज्ञान और पोषण के एकीकरण के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाता है।

(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली)

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