कृषि उत्पादकता तथा सतत आजीविका को मजबूत करने हेतु एकीकृत संसाधन प्रबंधन पर मानव संसाधन विकास कार्यक्रम का आयोजन

कृषि उत्पादकता तथा सतत आजीविका को मजबूत करने हेतु एकीकृत संसाधन प्रबंधन पर मानव संसाधन विकास कार्यक्रम का आयोजन

30 सितंबर–1 अक्टूबर, 2026, कल्याणी

दक्षिण बंगाल के कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) के प्रमुखों, विषय वस्तु विशेषज्ञों (एसएमएस) तथा कृषि प्रबंधकों के लिए “कृषि उत्पादकता, लाभप्रदता एवं सतत आजीविका बढ़ाने के लिए एकीकृत संसाधन प्रबंधन” विषय पर दो दिवसीय मानव संसाधन विकास (एचआरडी) कार्यक्रम का आयोजन बिधान चंद्र कृषि विश्वविद्यालय (बीसीकेवी), मोहनपुर के प्रसार शिक्षा निदेशालय (डीईई) द्वारा भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता के सहयोग से किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य नवीन तकनीकी ज्ञान, कौशल विकास और बेहतर कार्यकुशलता के माध्यम से केवीके कर्मियों की व्यावसायिक दक्षताओं को बढ़ाना था, ताकि कृषि क्षेत्र की उभरती चुनौतियों, विशेष रूप से बढ़ते जलवायु संबंधी खतरों से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान किया जा सके।

डॉ. अशोक कुमार पात्रा, कुलपति, बीसीकेवी, ने एचआरडी कार्यक्रम के आयोजन के लिए आयोजकों की सराहना की और ग्रामीण विकास को मजबूत करने में इसके महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कृषि उत्पादकता, लाभप्रदता और कृषि प्रणालियों की स्थिरता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक ज्ञान, प्राकृतिक संसाधनों के कुशल उपयोग तथा स्थान-विशिष्ट कृषि प्रौद्योगिकियों को मिलाकर कृषि संसाधन प्रबंधन के लिए एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-अटारी, कोलकाता, ने सतत, जलवायु-अनुकूल तथा लाभकारी कृषि के आधार के रूप में मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने उत्पादकता, संसाधन उपयोग दक्षता और किसानों की आय में सुधार के लिए संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक सिफारिशों, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन तथा जैविक एवं जैविक स्रोतों से प्राप्त आदानों के विवेकपूर्ण उपयोग के महत्व को रेखांकित किया।

HRD Programme on Integrated Resource Management Organised to Strengthen Farm Productivity and Sustainable Livelihoods

डॉ. डे ने कृषि नवाचार, प्रौद्योगिकी प्रसार और समन्वय के जिला स्तरीय केन्द्रों के रूप में केवीके की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने विषय वस्तु विशेषज्ञों और तकनीकी कर्मियों से डिजिटल कृषि, जलवायु-अनुकूल प्रौद्योगिकियों, उद्यमिता तथा किसान-केन्द्रित क्षमता निर्माण को बढ़ावा देकर प्रौद्योगिकी के अग्रदूत एवं परिवर्तन के उत्प्रेरक बनने का आह्वान किया। उन्होंने विज्ञान–प्रौद्योगिकी–किसान के बीच संपर्क को मजबूत करने, ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को सशक्त बनाने तथा आत्मनिर्भर कृषि और विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में संसाधन-कुशल एवं आत्मनिर्भर कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।

डॉ. बी.सी. पात्रा, कुलसचिव, बीसीकेवी, ने कृषि क्षेत्र की उभरती चुनौतियों के संदर्भ में समग्र फसल प्रबंधन रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया, जबकि डॉ. एम. रॉय, निदेशक, प्रसार शिक्षा निदेशालय, बीसीकेवी, ने केवीके कर्मियों के तकनीकी ज्ञान और क्षेत्र स्तर पर उनकी प्रभावशीलता को मजबूत करने में एचआरडी कार्यक्रमों के महत्व को रेखांकित किया।

समापन सत्र के दौरान, भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर), कोलकाता के प्रो. पी. सान्याल ने मृदा गुणवत्ता पर सारगर्भित संबोधन दिया। उन्होंने मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने, कृषि उत्पादकता को कायम रखने और दीर्घकालिक पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने में इसके महत्व पर जोर दिया।

तकनीकी सत्रों में एकीकृत संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में केवीके कर्मियों के ज्ञान और कौशल को मजबूत करने पर ध्यान केन्द्रित किया गया, जिसमें मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और सतत कृषि उत्पादन पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम ने दक्षिण बंगाल में स्थान-विशिष्ट कृषि चुनौतियों के समाधान के लिए व्यावसायिक संवाद, ज्ञान के आदान-प्रदान और व्यावहारिक उपायों को साझा करने का मंच भी प्रदान किया।

HRD Programme on Integrated Resource Management Organised to Strengthen Farm Productivity and Sustainable Livelihoods

दक्षिण बंगाल के 10 केवीके के कुल 24 प्रमुखों, विषय वस्तु विशेषज्ञों और तकनीकी कर्मियों ने कार्यक्रम में भाग लिया। इनमें बीसीकेवी के अधीन संचालित पांच केवीके भी शामिल थे। प्रतिभागियों ने तकनीकी विचार-विमर्श और संवादात्मक सत्रों में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने कृषि उत्पादन प्रणालियों की गुणवत्ता, सुदृढ़ता और लाभप्रदता बढ़ाने के लिए सर्वोत्तम प्रबंधन पद्धतियों पर व्यावहारिक एवं क्षेत्र-केंद्रित मार्गदर्शन प्रदान किया।

केवीके कर्मियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने किसानों को तकनीकी सहायता बढ़ाने, कृषि संसाधनों के कुशल एवं विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने, कृषि आय में सुधार करने और पूरे क्षेत्र में सतत आजीविका को प्रोत्साहित करने के माध्यम से कृषि विस्तार प्रणाली को मजबूत करने के लिए समन्वित प्रयास को प्रतिबिंबित किया।

(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता)

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