9 अक्टूबर, 2026, रामगढ़
डॉ. एम.एल. जाट, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप, ने आज भाकृअनुप–पूर्वी क्षेत्र के लिए अनुसंधान परिसर, केवीके रामगढ़ का दौरा किया। उनके साथ भाकृअनुप के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डी.के. यादव भी थे। इस अवसर पर केवीके रामगढ़ ने किसानों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने और किसानों की आजीविका को बेहतर बनाने के लिए क्षेत्र भ्रमण, कृषि प्रौद्योगिकियों की प्रदर्शनी और महत्वपूर्ण कृषि आदानों का वितरण किया गया।
दौरे के दौरान डॉ. जाट ने केवीके रामगढ़ की गतिविधियों की समीक्षा की और आवश्यकता-आधारित प्रशिक्षण, सरकारी योजनाओं की जानकारी, एकीकृत कृषि प्रणालियों (आईएफएस) को बढ़ावा देने तथा धान की परती भूमि के वैज्ञानिक उपयोग के माध्यम से किसान-केंद्रित प्रसार दृष्टिकोण को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर जोर दिया। किसान–वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम के दौरान किसानों से बातचीत करते हुए उन्होंने नवोन्मेषी और प्रगतिशील किसानों की सक्रिय भागीदारी को संसाधन व्यक्तियों के रूप में प्रोत्साहित किया, ताकि वे साथी किसानों के साथ सफल कृषि पद्धतियों और खेत स्तर के अनुभवों को साझा कर सकें। उन्होंने विभिन्न सरकारी सहायता कार्यक्रमों तक पहुंच को सुगम बनाने के लिए सरकारी योजनाओं पर एक सरल और किसान-अनुकूल पुस्तिका विकसित करने पर भी जोर दिया, जिसमें पात्रता मानदंड, लाभ और आवेदन प्रक्रिया शामिल हो।

धान की परती भूमि की महत्वपूर्ण क्षमता पर प्रकाश डालते हुए डॉ. जाट ने किसानों को स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों और मिट्टी में उपलब्ध अवशिष्ट नमी के अनुसार उपयुक्त रबी फसलों, विशेष रूप से दलहन और तिलहन की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि इन परती भूमियों को उत्पादक खेती के अंतर्गत लाने से फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिल सकता है, संसाधन-उपयोग दक्षता में सुधार हो सकता है और अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है। उन्होंने कृषि उत्पादकता बढ़ाने, आय के स्रोतों में विविधता लाने और छोटे एवं सीमांत किसानों की आर्थिक अनुकूलता को सुदृढ़ करने में एकीकृत कृषि प्रणालियों के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने किसानों को स्थानीय संसाधनों के अनुरूप और जहां संभव हो, फसलों, पशुधन, मुर्गीपालन, मत्स्यपालन और बागवानी को मशरूम उत्पादन और सिलाई जैसी पूरक आजीविका गतिविधियों के साथ एकीकृत करने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि वर्षभर आय के अवसर सृजित किए जा सकें।

रामगढ़ जिले के प्रगतिशील किसानों ने महानिदेशक के साथ अपने अनुभव साझा किए और केवीके रामगढ़ द्वारा प्रदान किए गए सहयोग एवं तकनीकी मार्गदर्शन की सराहना की। दौरे के एक हिस्से के रूप में डॉ. जाट ने केवीके परिसर में एक फलदार पौधा लगाया, जो पर्यावरण संरक्षण और बागवानी विकास के महत्व को दर्शाता है।
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राओं ने गीत और नृत्य के माध्यम से गणमान्य अतिथियों का पारंपरिक स्वागत किया। डॉ. जाट ने छात्राओं से बातचीत की, उनकी करियर संबंधी आकांक्षाओं के बारे में जानकारी ली और उन्हें आत्मविश्वास एवं समर्पण के साथ अपने शैक्षिक लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।
इस दौरे ने किसान-केन्द्रित कृषि अनुसंधान एवं प्रसार, टिकाऊ कृषि प्रणालियों, उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के प्रभावी उपयोग और छोटे किसानों के लिए बेहतर आजीविका के अवसरों के प्रति भाकृअनुप की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।
(स्रोत: भाकृअनुप–पूर्वी क्षेत्र के लिए अनुसंधान परिसर, पटना)







फेसबुक पर लाइक करें
यूट्यूब पर सदस्यता लें
X पर फॉलो करना X
इंस्टाग्राम पर लाइक करें