हिन्दी पखवाड़ा का समापन एवं राजभाषा समिति की त्रैमासिक समीक्षा बैठक का आयोजन

हिन्दी पखवाड़ा का समापन एवं राजभाषा समिति की त्रैमासिक समीक्षा बैठक का आयोजन

30 सितम्बर, 2026, जोधपुर

भाकृअनुप-कृषि प्रौद्यौगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, क्षेत्र-द्वितीय, जोधपुर में 15 सितम्बर से 30 सितम्बर तक आयोजित हिन्दी पखवाड़ा का आज समापन समारोह तथा राजभाषा समिति की त्रैमासिक समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आचार्य महिपाल सिंह राठौड़, विभागाध्यक्ष, हिन्दी विभाग, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान में हिन्दी राजभाषा है तथा इसे राष्ट्रभाषा बनाने के लिये एक साथ बैठकर विचार किया जा सकता है। आचार्य राठौर ने कहा कि हिन्दी एक सरल, सरस और मीठी भाषा है, किसी भी राष्ट्र की उन्नति उसकी अपनी भाषा में ही हो सकती है जो कि भारत के लिए हिन्दी उपयुक्त माध्यम हो सकती है।

   

वर्तमान में तकनीकी के युग में हिन्दी को अद्यतन करने की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने बताया की वर्तमान में हिन्दी में प्रशासनिक कार्य करना सरल तो हो गया है परन्तु इसकी लिपि (देवनागरी) को नुकसान की आशंका बनी हुई है। आचार्य राठौर ने हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के विभिन्न प्रयासों की भी सराहना की और कहा कि इस संस्थान में भी किसानों तक कृषि की नवीनतम तकनीकों की जानकारी को पहुंचाने के लिए अधिक से अधिक हिन्दी भाषा का प्रयोग होना चाहिए।

इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. प्रेम पाल रोहिल्ला, प्रभारी निदेशक एवं राजभाषा समिति के अध्यक्ष, भाकृअनुप-अटारी जोन – II, जोधपुर ने कहा कि सितम्बर माह में राजभाषा हिन्दी विभाग, नई दिल्ली द्वारा हमारा संस्थान अधिसूचित किया गया है, इसलिए भी हमें कार्यालय और दैनिक जीवन में हिन्दी के प्रयोग को और अधिक बढ़ाना चाहिये। हिन्दी में पत्राचार और फाइल पर टिप्पणी को यदि नियमित रूप से करेंगे तो निश्चित रूप से हम हिन्दी की बेहतर सेवा कर पांएगे।

 

डॉ. रोहिल्ला ने हिन्दी पखवाड़ा में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं का विवरण एवं राजभाषा समिति की त्रैमासिक समीक्षा बैठक की प्रगति प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि पिछले तीन महीनों में संस्थान के वैज्ञानिकों ने विभिन्न विषयों पर कुल 12 लोकप्रिय आलेख एवं शोध पत्र तथा एक पुस्तक हिन्दी में प्रकाशित की हैं। कुल 32 पत्राचार हिन्दी में प्राप्त हुए तथा 35 पत्राचार हिन्दी में विभिन्न संस्थानों को प्रेषित किए गए। कार्यालय के दैनिक कार्य में विभिन्न फाइलों पर कुल 45 टिप्पणीयां हिन्दी में अंकित की गई।

मुख्य अतिथि और कार्यक्रम अध्यक्ष ने विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान किए एवं हिन्दी पुस्तक ‘वैज्ञानिक बकरी पालन‘ का विमोचन भी किया।

संस्थान सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने कार्यक्रम में उत्साह से भाग लिया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. बाबूलाल जांगिड़, प्रधान वैज्ञानिक (कृषि प्रसार) ने किया और अंत में धन्यवाद प्रस्ताव श्री राजेंद्र बैंदा, राजभाषा समिति के सचिव एवं सहायक प्रशासनिक अधिकारी, ने किया।

(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्यौगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, क्षेत्र- II, जोधपुर)

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