14 अक्टूबर 2026, मोतिहारी, बिहार
भाकृअनुप–महात्मा गांधी एकीकृत कृषि अनुसंधान संस्थान, मोतिहारी, बिहार ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय (आरपीसीएयू) के अंतर्गत तिरहुत कृषि महाविद्यालय (टीसीए), ढोली के चौथे वर्ष के छात्रों के लिए एक शैक्षणिक एक्सपोजर विजिट का आयोजन किया। इस दौरे का उद्देश्य मृदा परीक्षण, प्रयोगशाला विश्लेषणात्मक तकनीकों, मत्स्य प्रबंधन और एकीकृत कृषि प्रणालियों (आईएफएस) के बारे में छात्रों के व्यावहारिक ज्ञान को बढ़ाना था, जिसमें पूर्वी भारत के जलभराव और निचले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त सतत कृषि पद्धतियों पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम ने छात्रों को प्रयोगशाला प्रदर्शनों, वैज्ञानिक संवाद और क्षेत्र भ्रमण के माध्यम से सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक अनुप्रयोग के बीच की खाई को पाटने का अवसर प्रदान किया। इस एक्सपोजर में मृदा स्वास्थ्य में सुधार, संसाधन-उपयोग दक्षता बढ़ाने और सतत कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने में वैज्ञानिक अनुसंधान और एकीकृत संसाधन प्रबंधन की भूमिका पर प्रकाश डाला गया।

मृदा परीक्षण प्रयोगशाला के दौरे के दौरान छात्रों को विभिन्न प्रयोगशाला उपकरणों, उनके संचालन सिद्धांतों और मृदा उर्वरता आकलन में उनके अनुप्रयोगों से परिचित कराया गया। उन्होंने संतुलित उर्वरीकरण, कुशल पोषक तत्व प्रबंधन और सतत फसल उत्पादन को बढ़ावा देने में वैज्ञानिक मृदा परीक्षण के महत्व पर जोर दिया। फ्लेम फोटोमीटर का उपयोग करके पोटैशियम आकलन के व्यावहारिक प्रदर्शन ने छात्रों को विश्लेषणात्मक प्रक्रिया और मृदा पोषक तत्व की स्थिति का आकलन करने में इसकी प्रासंगिकता को समझने में सक्षम बनाया। सत्र में स्थान-विशिष्ट पोषक तत्व सिफारिशें विकसित करने और सुविचारित कृषि निर्णय लेने में सहायता के लिए सटीक मृदा विश्लेषण के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।
इसके बाद छात्रों ने मत्स्य प्रयोगशाला का दौरा किया, जहां उन्हें प्रयोगशाला सुविधाओं से परिचित कराया गया और मत्स्य स्वास्थ्य प्रबंधन, जल-गुणवत्ता निगरानी तथा वैज्ञानिक जलीय कृषि पद्धतियों के प्रमुख पहलुओं के बारे में बताया गया। संवाद के दौरान मत्स्य उत्पादन के लिए अनुकूलतम जलीय परिस्थितियां बनाए रखने के महत्व को रेखांकित किया गया और एकीकृत कृषि प्रणालियों में मत्स्य पालन को एक पूरक उद्यम के रूप में रेखांकित किया गया। चर्चा में कृषि उत्पादकता बढ़ाने, आजीविका के अवसरों को मजबूत करने और जल-प्रचुर कृषि परिदृश्यों के उपयोग में सुधार के लिए मत्स्य पालन आधारित विविधीकरण की संभावनाओं पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।
इस दौरे का एक प्रमुख आकर्षण भाकृअनुप-एमजीआईएफआरआई में जलभराव और निचले क्षेत्रों के लिए विकसित एकीकृत कृषि प्रणाली मॉडलों का क्षेत्रीय अवलोकन था। छात्रों ने धान–मछली–बत्तख एकीकृत कृषि प्रणाली और भूमि आकार निर्धारण आधारित आईएफएस मॉडलों का अवलोकन किया तथा कुशल भूमि और जल प्रबंधन के साथ फसल उत्पादन, मत्स्य पालन और पशुधन के एकीकरण के बारे में व्यावहारिक जानकारी प्राप्त की।

क्षेत्र प्रदर्शनों ने यह दर्शाया कि उपयुक्त भूमि आकार निर्धारण, उद्यम विविधीकरण एवं कृषि संसाधनों के पुनर्चक्रण से जलभराव वाली भूमि के उत्पादक उपयोग में किस प्रकार सुधार किया जा सकता है। छात्रों ने स्थानीय जलविज्ञानीय परिस्थितियों, संसाधनों की उपलब्धता और कृषि-विशिष्ट आवश्यकताओं के आधार पर पूरक कृषि उद्यमों के चयन के बारे में भी सीखा। इन मॉडलों ने संसाधन-उपयोग दक्षता बढ़ाने, कृषि उत्पादकता में सुधार करने तथा चुनौतीपूर्ण कृषि-पारिस्थितिक परिस्थितियों में सहनशीलता को मजबूत करने के लिए एकीकृत कृषि दृष्टिकोणों की क्षमता को प्रदर्शित किया।
पूरे कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने संस्थान के वैज्ञानिकों के साथ सक्रिय रूप से संवाद किया, प्रयोगशाला प्रक्रियाओं पर चर्चा की और कृषि अनुसंधान के व्यावहारिक अनुप्रयोगों की संभावनाओं का पता लगाया। इस दौरे ने मृदा उर्वरता प्रबंधन, जलीय संसाधन उपयोग और विविधीकृत कृषि प्रणालियों के बीच अंतर्संबंधों के बारे में उनकी समझ को मजबूत किया तथा समकालीन कृषि चुनौतियों के समाधान में अंतःविषय दृष्टिकोण के महत्व पर जोर दिया।
शैक्षणिक एक्सपोजर विजिट ने कृषि शिक्षा में अनुभवात्मक शिक्षण, वैज्ञानिक कौशल विकास और मजबूत अनुसंधान–शिक्षा संबंधों के महत्व की पुनः पुष्टि की। ऐसी पहलों के माध्यम से भाकृअनुप-एमजीआईएफआरआई कृषि छात्रों के बीच क्षमता निर्माण में योगदान देना और बिहार तथा पूर्वी भारत की कृषि-पारिस्थितिक परिस्थितियों के अनुकूल सतत, संसाधन-कुशल और जलवायु-सहिष्णु कृषि प्रौद्योगिकियों को अपनाने को बढ़ावा देना जारी रखता है।
(स्रोत: भाकृअनुप–महात्मा गांधी एकीकृत कृषि अनुसंधान संस्थान, मोतिहारी, बिहार)








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