15 अक्टूबर, 2026. अल्मोड़ा
भाकृअनुप-विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा द्वारा विकसित रागी (मंडुआ) की उन्नत किस्म ‘वीएल मंडुआ 400’ कर्नाटक के किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। कम वर्षा और सूखे जैसी परिस्थितियों में उत्साहजनक प्रदर्शन के कारण यह किस्म खरीफ 2026 के चुनौतीपूर्ण मौसम में विशेष चर्चा का विषय बनी हुई है।

इस किस्म को किसानों तक पहुंचाने और इसके बीजों के व्यापक प्रसार में राष्ट्रीय बीज निगम, दावणगेरे, कर्नाटक तथा विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राष्ट्रीय बीज निगम, दावणगेरे से प्राप्त जानकारी के अनुसार, खरीफ 2026 के दौरान लगभग 70 हैक्टर क्षेत्र में वीएल मंडुआ 400 का बीज उत्पादन किया गया, जिसमें किसान उत्पादक संगठनों से जुड़े 92 लघु एवं सीमांत किसान सम्मिलित रहे। इस मौसम में वर्षा की भारी कमी के कारण सूखे जैसी परिस्थितियों के बावजूद बीज उत्पादन में लगे किसानों ने इस किस्म के प्रदर्शन, विशेषकर इसकी शीघ्र परिपक्वता और अच्छी उपज क्षमता, पर संतोष व्यक्त किया।
वीएल मंडुआ 400 की प्रमुख विशेषता यह है कि यह किसानों के खेतों में 100 दिन से भी कम समय में पक जाती है। इसकी बालियां सघन होती हैं, जबकि क्षेत्र में प्रचलित कई स्थानीय किस्में अपेक्षाकृत देर से पकती हैं और उनकी बालियां कम सघन होती हैं। कम अवधि में पकने की क्षमता वर्षा आधारित खेती में विशेष रूप से उपयोगी है, क्योंकि इससे फसल को मौसम के अंतिम चरण में पड़ने वाले सूखे और अनिश्चित वर्षा के जोखिम से बचाने में मदद मिल सकती है। पोषण की दृष्टि से भी यह किस्म महत्वपूर्ण है। इसके 100 ग्राम दाने में 399.5 मिलीग्राम कैल्शियम पाया जाता है। अखिल भारतीय समन्वित लघु धान्य अनुसंधान परियोजना के अंतर्गत 40 स्थानों पर किए गए बहु-स्थानीय मूल्यांकन में इस किस्म की औसत दाना उपज 34.77 कुंतल प्रति हैक्टर दर्ज की गई, जो मानक किस्म वीएल मंडुआ 376 की 31.11 कुंतल प्रति हैक्टर उपज की तुलना में 11.5 प्रतिशत अधिक है।

खरीफ 2026 में वर्षा की कमी और एल नीनो से जुड़ी बताई गई जलवायु संबंधी चुनौतियों के बीच इस किस्म के उत्साहजनक प्रदर्शन दर्शाया।
राष्ट्रीय बीज निगम,, दावणगेरे से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वी एल मंडुआ 400 के लगभग 500 कुंतल बीज की बिक्री सामान्य बिक्री के माध्यम से तथा अतिरिक्त 150 कुंतल बीज डीलरों के माध्यम से की गई। लगभग 70 हेक्टेयर में बीज उत्पादन और 92 किसानों की भागीदारी के साथ ये आंकड़े इस किस्म की बढ़ती मांग तथा गुणवत्तापूर्ण बीजों के उत्पादन, वितरण और किसानों तक पहुंच सुनिश्चित करने के महत्व को दर्शाते हैं।
इस किस्म की उपयोगिता के प्रति किसानों में जागरूकता बढ़ाने और सूखे जैसी परिस्थितियों में इसके प्रदर्शन को प्रत्यक्ष रूप से दिखाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय बीज निगम, दावणगेरे ने कर्नाटक के विजयनगर जिले के उज्जैनी गांव स्थित बीज उत्पादन खेतों में वीएल मंडुआ 400 पर एक किसान क्षेत्र दिवस आयोजित करने का प्रस्ताव रखा है। इस कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को खेतों में फसल का प्रदर्शन देखने, वैज्ञानिकों से संवाद करने और अपने व्यावहारिक अनुभव साझा करने का अवसर मिलेगा, जिससे वे इस किस्म को अपनाने के संबंध में बेहतर निर्णय ले सकेंगे।
डॉ. लक्ष्मी कान्त, निदेशक, वीपीकेएएस, के अनुसार उच्च कैल्शियम, अच्छी उत्पादकता और शीघ्र परिपक्वता का यह संयोजन किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पोषण सुरक्षा को मजबूत करने की संभावनाएं प्रदान करता है और वीएल मंडुआ 400 की बढ़ती लोकप्रियता दर्शाती है कि सार्वजनिक क्षेत्र के कृषि अनुसंधान संस्थानों द्वारा विकसित उन्नत किस्में, प्रभावी बीज प्रसार और संस्थागत सहयोग के माध्यम से किसानों के खेतों तक पहुंचकर वास्तविक प्रभाव उत्पन्न कर सकती हैं।
(स्रोतः भाकृअनुप-विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा)








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