25 सितंबर, 2026, लखनऊ
हिंदी पखवाड़ा एवं सुधार उत्सव 2026 के अंतर्गत “जलीय जीवों, पर्यावरण एवं समाज पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव” विषय पर राष्ट्रीय वैज्ञानिक हिंदी कार्यशाला का आयोजन भाकृअनुप–राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, लखनऊ एवं जलीय जैवविविधता संरक्षण सोसायटी, के संयुक्त तत्वावधान में हाइब्रिड मोड में किया गया, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों से वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, तथा अन्य हितधारकों सहित 120 से अधिक प्रतिभागियों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. सत्य नंद सुशील, निदेशक, भाकृअनुप–भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान ने अपने संबोधन में जलवायु परिवर्तन की बहुआयामी प्रकृति तथा कृषि, जल एवं जलीय संसाधनों के बीच अंतर्संबंधों पर प्रकाश डालते हुए वैज्ञानिक संस्थानों के बीच सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान और टिकाऊ संसाधन प्रबंधन की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान स्वच्छता ही सेवा-2026 के अंतर्गत वृक्षारोपण अभियान का भी आयोजन किया गया।

डॉ. काजल चक्रवर्ती, निदेशक, भाकृअनुप–राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, ने अपने संबोधन में कहा कि जलवायु परिवर्तन जलीय पारिस्थितिक तंत्रों, मत्स्य संसाधनों और उनसे जुड़े समुदायों के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में उभर रहा है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान, संरक्षण प्रयासों, अनुकूलन रणनीतियों तथा सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वैज्ञानिक जानकारी को सरल एवं प्रभावी हिंदी में उपलब्ध कराना वैज्ञानिक ज्ञान के व्यापक प्रसार और जनभागीदारी के लिए महत्वपूर्ण है।

प्रतिभागियों एवं संस्थान के कार्मिकों ने वृक्षारोपण में भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण तथा हरित एवं स्वच्छ परिसर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यशाला में वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों के बीच संवाद, ज्ञान-विनिमय और विचार-विमर्श के माध्यम से जलवायु परिवर्तन तथा जलीय जैवविविधता संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।
कार्यक्रम ने वैज्ञानिक ज्ञान, हिंदी भाषा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सहभागिता को एक साझा मंच पर लाने का अवसर प्रदान किया।
(स्रोतः भाकृअनुप–राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, लखनऊ)








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