30 अक्टूबर, 2026, मखदूम, मथुरा
भाकृअनुप-केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (सी.आई.आर.जी.), मखदूम, फरह, मथुरा के परिसर में शुक्रवार को पीएम-किसान उत्सव दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पीएम-किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त जारी किए जाने के समारोह का सीधा प्रसारण किया गया।

इस अवसर पर श्री जयंत चौधरी जी, केन्द्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय तथा राज्य मंत्री, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में श्री योगेश नौहवार, विधायक, श्री सुभाष गर्ग, विधायक तथा श्री प्रदीप चौधरी (गुड्डू), विधायक एवं जिलाध्यक्ष व पूर्व प्रमुख श्री प्रीतम चौधरी सहित लगभग 800 किसान एवं अन्य आगंतुक शामिल हुए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री चौधरी ने किसानों के हित में केन्द्र सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने, कृषि को लाभकारी बनाने तथा आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। मंत्री ने किसानों से वैज्ञानिक कृषि एवं पशुपालन पद्धतियों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने तथा उपलब्ध सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया। बकरी पालन से जुड़े किसानों को एफ.पी.ओ एवं सेल्फ हेल्प ग्रुप बना कर स्वयं मार्केटिंग करने के लिए उत्साहित किया।
डॉ. मनीष कुमार चेटली, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईआरजी, ने अपने संबोधन में किसानों का स्वागत करते हुए कहा कि भाकृअनुप-सीआईआरजी बकरी पालन एवं पशुधन आधारित आजीविका को सुदृढ़ बनाने के लिए अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि एवं पशुपालन एक-दूसरे के पूरक हैं तथा मृदा एवं प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण टिकाऊ कृषि व्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक है। निदेशक ने किसानों से वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने तथा संस्थान द्वारा उपलब्ध कराई जा रही तकनीकी जानकारियों का लाभ उठाने की अपील की।

कार्यक्रम के दौरान संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, मृदा की उर्वरता बनाए रखने तथा सतत कृषि पद्धतियों को अपनाने के संबंध में वैज्ञानिक जानकारी प्रदान की गई। इस क्रम में ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत भूमि एवं मृदा संसाधनों के संरक्षण, कृषि उत्पादन की स्थिरता तथा पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। किसानों को प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग तथा कृषि एवं पशुपालन के समन्वित मॉडल अपनाने के लिए भी प्रेरित किया गया।
संस्थान का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान एवं नवीन तकनीकों को किसानों तक पहुंचाकर कृषि एवं पशुपालन आधारित आजीविका को सुदृढ़ करना तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
(स्रोतः भाकृअनुप-केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मखदूम)








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