खेत बचाओ अभियान 2026 के तहत भाकृअनुप–सीआईएआरआई, श्री विजयपुरम ने टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर जागरूकता कार्यक्रम का किया आयोजन

खेत बचाओ अभियान 2026 के तहत भाकृअनुप–सीआईएआरआई, श्री विजयपुरम ने टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर जागरूकता कार्यक्रम का किया आयोजन

24 जून, 2026, श्री विजयपुरम

द्वीपीय पारिस्थितिकी तंत्र में टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने तथा मृदा स्वास्थ्य के संरक्षण के उद्देश्य से आज फेरारगंज प्रखंड के वृंदावन गांव में खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के दौरान वर्षों से रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक एवं अंधाधुंध उपयोग के कारण कृषि भूमि की उत्पादकता में आई गिरावट पर प्रकाश डाला गया। लगातार अकार्बनिक उर्वरकों के उपयोग से मृदा स्वास्थ्य, सूक्ष्मजीवी गतिविधियों तथा दीर्घकालिक फसल उत्पादकता पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई।

ढैंचा (सेसबेनिया प्रजाति) की हरित खाद फसल के रूप में खेती एवं उसे मिट्टी में मिलाने, एनपीके उर्वरकों के विवेकपूर्ण एवं संतुलित उपयोग तथा द्वीपीय परिस्थितियों के अनुकूल जैविक एवं प्राकृतिक खेती पद्धतियों को अपनाने जैसे टिकाऊ विकल्पों पर भी विशेष बल दिया गया। किसानों को फसल की उपयुक्तता तथा स्थानीय संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर धीरे-धीरे पर्यावरण-अनुकूल कृषि प्रणालियों की ओर अग्रसर होने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

धान की खेती में एजोला के उपयोग पर एक तकनीकी सत्र आयोजित किया गया। इस दौरान जैव उर्वरक के रूप में एजोला की भूमिका तथा नाइट्रोजन स्थिरीकरण, मृदा उर्वरता में वृद्धि और रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम करने में उसके योगदान की जानकारी दी गई।

ICAR–CIARI, Sri Vijaya Puram Organizes Awareness Programme on Sustainable Farming Practices under Khet Bachao Abhiyan 2026

स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जलीय खरपतवारों को मूल्यवान कम्पोस्ट में परिवर्तित करने की संभावनाओं का भी प्रदर्शन किया गया, जिससे अपशिष्ट पुनर्चक्रण तथा टिकाऊ पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा मिल सके। इसके अतिरिक्त, मछली अपशिष्ट आधारित तरल उर्वरक को एक वैकल्पिक जैविक तरल उर्वरक के रूप में तैयार करने की विधि पर भी चर्चा की गई।

किसानों को सब्जी फसलों में मृदा उर्वरता बढ़ाने तथा कीट एवं रोग प्रबंधन के लिए प्राकृतिक आदानों के रूप में ब्रह्मास्त्र एवं जीवामृत की तैयारी एवं उपयोग के बारे में भी जागरूक किया गया। उद्यानिकी फसलों में रासायनिक कीटनाशकों के पर्यावरण-अनुकूल जैविक विकल्प के रूप में ट्राइकोडर्मा तथा बैसिलस थुरिन्जिएन्सिस (बीटी) के उपयोग के महत्व पर प्रकाश डाला गया।

इसके अतिरिक्त, नारियल बागानों में मिलीबग (Mealybug) के प्रभावी प्रबंधन के लिए नीम तेल के उपयोग का प्रदर्शन किया गया तथा समेकित एवं टिकाऊ कीट प्रबंधन पद्धतियों के महत्व पर विशेष बल दिया गया।

कार्यक्रम में गांव के कुल 18 किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान, श्री विजयपुरम, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह)

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