8 मार्च, 2026, मेडक, तेलंगाना
तेलंगाना के तुनिकी स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके), मेडक–2 में आज किसान छात्रावास तथा मूल्य संवर्धन एवं खाद्य प्रसंस्करण प्रयोगशाला का उद्घाटन किया गया।
इन सुविधाओं का उद्घाटन श्री बांदी संजय कुमार, केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री तथा डॉ. एम.एल. जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक (भाकृअनुप), द्वारा किया गया। कार्यक्रम में श्री एम. रघुनन्दन राव, सांसद, मेडक, श्री भाग्य, अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य, आरएसएस, सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति, अधिकारी एवं किसान उपस्थित रहे।
दौरे के दौरान अतिथियों ने बायोकंट्रोल प्रयोगशाला का निरीक्षण किया तथा नवनिर्मित खाद्य प्रसंस्करण प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। उन्होंने केवीके परिसर में जैविक खेती के प्रदर्शन प्लॉट एवं जैविक कृषि उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया और परिसर में पौधारोपण भी किया।

अपने संबोधन में श्री बांदी संजय कुमार ने विश्व महिला दिवस के अवसर पर शुभकामनाएं देते हुए एकलव्य ग्रामीण विकास संस्था (ईजीवीएफ) के जैविक खेती को बढ़ावा देने एवं प्रगतिशील किसानों को प्रोत्साहित करने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र वैज्ञानिक कृषि तकनीकों के प्रसार एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि किसान छात्रावास से आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों को सुविधा मिलेगी, जबकि खाद्य प्रसंस्करण प्रयोगशाला क्षेत्र में मूल्य संवर्धन, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि-उद्यमिता को बढ़ावा देगी।
इस अवसर पर डॉ. एम.एल. जाट ने कहा कि किसानों का विकास ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना का केंद्र है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक एवं उन्नत कृषि तकनीक प्रभावी रूप से किसानों तक पहुंचाई जाए, और ‘भारत विस्तार’ कार्यक्रम का उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि प्रसार और विकास को सशक्त बनाना है।
डॉ. शैक एन. मीरी, निदेशक, भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, ने केवीके की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया, जिसमें गुणवत्तापूर्ण बीज सामग्री उपलब्ध कराना, उन्नत कृषि तकनीकों का प्रदर्शन करना तथा सतत प्रबंधन पद्धतियों के माध्यम से फसल उत्पादकता बढ़ाना शामिल है।
श्री एम. रघुनंदन राव ने केवीके तुनिकी द्वारा जैविक खेती को बढ़ावा देने एवं किसानों को सतत कृषि पद्धतियां अपनाने में सहायता करने की सराहना की तथा प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।

श्री भागय्या ने ग्राम विकास के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया तथा बेहतर स्वास्थ्य के लिए जैविक खेती के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने ‘भूमि सुपोषण’ कार्यक्रम को उगादी से प्रारंभ करने का प्रस्ताव रखा, जिससे गोबर और गोमूत्र के उपयोग द्वारा मृदा उर्वरता में सुधार किया जा सके।
कार्यक्रम के दौरान बायोकंट्रोल प्रयोगशाला पर एक पुस्तक का विमोचन किया गया तथा अतिथियों का सम्मान भी किया गया।
(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोन X, हैदराबाद)







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