भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी प्रशिक्षुओं ने भाकृअनुप–अटारी, कोलकाता में कृषि विस्तार एवं ग्रामीण परिवर्तन की समझ प्राप्त की

भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी प्रशिक्षुओं ने भाकृअनुप–अटारी, कोलकाता में कृषि विस्तार एवं ग्रामीण परिवर्तन की समझ प्राप्त की

10 मार्च, 2026, कोलकाता

भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप–अटारी), कोलकाता, में आज लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के 2025 बैच के 10 भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी प्रशिक्षुओं ने अपने शीतकालीन अध्ययन दौरे के अंतर्गत भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने कृषि अनुसंधान, प्रौद्योगिकी प्रसार तथा विस्तार प्रणाली की ग्रामीण परिवर्तन और राष्ट्रीय विकास को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका को प्रत्यक्ष रूप से समझा।

संवादात्मक उन्मुखीकरण कार्यक्रम की शुरुआत ‘वंदे मातरम्’ के साथ हुई, जिसके बाद एक परिचयात्मक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपना परिचय दिया और वैज्ञानिक समुदाय के साथ अनौपचारिक संवाद किया। इसके पश्चात प्रशिक्षुओं को एक लघु फिल्म “भाकृअनुप–अटारी, कोलकाता के अंदर: संस्थागत यात्रा और क्षेत्रीय प्रभाव” के माध्यम से संस्थान के कार्यों और क्षेत्रीय योगदानों से अवगत कराया गया, जिसमें कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) के समन्वय और किसानों तक तकनीकों के प्रसार में उनकी भूमिका को दर्शाया गया।

IAS Officer Trainees Gain Insights into Agricultural Extension and Rural Transformation at ICAR–ATARI, Kolkata

दृष्टिकोण व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप–अटारी, कोलकाता ने “विकसित भारत @2047 के लिए केवीके पारिस्थितिकी तंत्र के माध्यम से कृषि विस्तार का रूपांतरण” विषय पर अपने विचार साझा किया। उन्होंने बताया कि देशभर में फैले कृषि विज्ञान केन्द्र कृषि अनुसंधान संस्थानों तथा किसानों के बीच एक सशक्त सेतु के रूप में कार्य करते हैं, जो जलवायु अनुकूल तकनीकों के प्रसार, किसानों की क्षमता निर्माण तथा विविध आजीविका अवसरों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डॉ. डे ने सभी केवीके को परिवर्तन के उत्प्रेरक तथा समन्वय केन्द्र के रूप में विकसित करने के प्रयासों पर जोर दिया, जो 3एफ ढांचे—खेत, कृषक और कृषि —को एकीकृत करते हुए जिला स्तर पर कृषि-प्रौद्योगिकी के प्रमुख केन्द्र के रूप में उभर रहे हैं, जहाँ प्रकृति-अनुकूल, लैंगिक समावेशी और टिकाऊ तकनीकों का प्रसार किया जाता है।

इसके बाद एक खुला संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें वैज्ञानिकों और संकाय सदस्यों ने आईएएस प्रशिक्षुओं के साथ चर्चा करते हुए चल रहे अनुसंधान, विस्तार नवाचारों तथा सतत कृषि की उभरती प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया। प्रशिक्षुओं ने क्षेत्र से जुड़ी प्रेरणादायक सफलता की कहानियां भी सुनी, जिनसे यह स्पष्ट हुआ कि केवीके द्वारा संचालित पहलों ने किसानों की आजीविका को सुदृढ़ किया है, उत्पादकता बढ़ाई है और संसाधनों के सतत प्रबंधन को बढ़ावा दिया है।

 

IAS Officer Trainees Gain Insights into Agricultural Extension and Rural Transformation at ICAR–ATARI, Kolkata

सत्र का समापन डिब्रीफिंग एवं अनुभव साझा करने के साथ हुआ, जिसमें प्रशिक्षुओं ने सार्वजनिक नीति और विकास कार्यक्रमों के निर्माण में वैज्ञानिक साक्ष्यों के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जो भावी प्रशासकों और कृषि अनुसंधान एवं विस्तार समुदाय के बीच एक सार्थक संवाद का प्रतीक रहा।

यह भ्रमण एक समृद्ध अनुभव सिद्ध हुआ, जिसने विज्ञान-आधारित शासन और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के महत्व को पुनः रेखांकित किया, जो कृषि परिवर्तन को आगे बढ़ाने और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक है।

(स्रोत: भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता)

×