18 अप्रैल, 2026, कटक
भाकृअनुप-केन्द्रीय चावल अनुसंधान संस्थान में 61वीं वार्षिक राइस ग्रुप मीटिंग्स के उद्घाटन सत्र का आयोजन किया गया। सत्र की अध्यक्षता डॉ. डी. के. यादव ने की, जबकि उद्घाटन संबोधन डॉ. एम.एल. जाट द्वारा दिया गया।
अपने उद्घाटन संबोधन में डॉ. जाट ने वर्षा आधारित तथा सिंचित दोनों कृषि प्रणालियों में धान की आनुवंशिक प्रगति बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विशिष्ट गुणों पर केन्द्रित लक्षित प्री-ब्रीडिंग रणनीतियों को अपनाने के महत्व को रेखांकित किया तथा विभिन्न धान उत्पादक क्षेत्रों में आनुवंशिक सुधार को तेज करने हेतु जीनोम एडिटिंग तकनीकों की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि अनुसंधान की कमियों को अलग-अलग प्रयासों से नहीं, बल्कि संस्थानों के बीच सहयोगात्मक प्रयासों से दूर किया जाना चाहिए। उन्होंने धान अनुसंधान समुदाय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए भविष्य की चुनौतियों और देश की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए निरंतर समर्पित रहने का आह्वान किया।

भाकृअनुप के महानिदेशक ने भारत में हाइब्रिड धान की खेती के विस्तार की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इसके लिए राज्य सरकारों की एजेंसियों, राइस मिलर्स तथा अन्य हितधारकों के साथ संस्थागत सहयोग को मजबूत करने की बात कही। उन्होंने उच्च हेड राइस रिकवरी (एचआरआर) वाले हाइब्रिड विकसित करने तथा पोषक तत्व एवं जल उपयोग दक्षता को दोगुना करने की दिशा में केन्द्रित प्रयासों का आह्वान किया।
मुख्य चुनौतियों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि धान परती क्षेत्र अभी भी एक बड़ी चिंता है और इन क्षेत्रों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए नवाचार पूर्ण समाधान आवश्यक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चावल देश की बड़ी आबादी का मुख्य भोजन है, इसलिए वैज्ञानिक हस्तक्षेपों के माध्यम से इसकी पोषण गुणवत्ता में सुधार करना अत्यंत आवश्यक है।
इस अवसर पर पद्मश्री पुरस्कार विजेता डॉ. वी.पी. सिंह और डॉ. ए.के. सिंह सहित डॉ. एस.के. प्रधान, डॉ. आर.एम. सुंदरम तथा डॉ. जी. ए.के. कुमार उपस्थित रहे।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय चावल अनुसंधान संस्थान, कटक)







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