20 अगस्त, 2026, भोपाल
भाकृअनुप–भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल ने कोर कार्बनएक्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और जीआईजेड इंडिया के सहयोग से आज विदिशा जिले के किसानों के लिए ‘कार्बन पाठशाला: कार्बन बाजार और पुनर्योजी कृषि’ विषय पर एक दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम विदिशा जिले के लिए कृषि रोडमैप परियोजना के तहत किसानों को कार्बन बाजार, कृषि कार्बन क्रेडिट और पुनर्योजी कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।
मृदा जैविक कार्बन मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कार्यक्रम में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि उन्नत कृषि पद्धतियों को निरंतर अपनाने से मृदा कार्बन और जलवायु संबंधी लाभों में वृद्धि हो सकती है तथा उभरते कार्बन बाजारों के माध्यम से किसानों के लिए नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

प्रतिभागियों को फसल अवशेष जलाने से बचने, न्यूनतम जुताई, फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाने, हरी खाद और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन जैसी पद्धतियों के बारे में जागरूक किया गया। ये पद्धतियां मृदा स्वास्थ्य में सुधार और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने में योगदान दे सकती हैं। चर्चाओं में स्वैच्छिक कार्बन बाजार की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया, जो टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहन प्रदान करता है।
कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. एम. मोहंती, निदेशक, भाकृअनुप–आईआईएसएस ने मध्य भारत में अपनाई जा रही पुनर्योजी कृषि पद्धतियों और उनसे कार्बन क्रेडिट उत्पन्न करने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
डॉ. संगीता लेंका, पाठ्यक्रम निदेशक ने कार्बन पाठशाला के उद्देश्यों की जानकारी दी और स्वैच्छिक कार्बन बाजार, कृषि कार्बन क्रेडिट तथा कार्बन परियोजना चक्र की अवधारणाओं को समझाया। उन्होंने वैज्ञानिक रूप से आकलन की गई और टिकाऊ पद्धतियों के माध्यम से किसानों के खेतों से सत्यापित जलवायु लाभ उत्पन्न करने की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।

विशेषज्ञों ने भारत में संचालित की जा रही कार्बन पायलट परियोजनाओं के अनुभव साझा किए और बताया कि वैज्ञानिक रूप से मापे गए तथा स्वतंत्र रूप से सत्यापित मृदा कार्बन में सुधार के साथ-साथ ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी से किसानों के लिए अतिरिक्त आय के संभावित अवसर पैदा हो सकते हैं।
व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से संरक्षण कृषि और फसल अवशेष प्रबंधन पद्धतियों, वर्मी कम्पोस्टिंग, जैविक एवं प्राकृतिक कृषि तकनीकों तथा उन्नत कृषि मशीनरी का प्रदर्शन करने के लिए एक क्षेत्रीय भ्रमण आयोजित किया गया। क्षेत्रीय भ्रमण से किसानों को ‘देखो और विश्वास करो’ के सिद्धांत पर आधारित टिकाऊ कृषि पद्धतियों की व्यावहारिक समझ प्राप्त हुई।
विदिशा के लगभग 70 किसानों ने कार्यक्रम में भाग लिया और पुनर्योजी कृषि, मृदा कार्बन प्रबंधन तथा उभरते कृषि कार्बन बाजारों में उपलब्ध अवसरों के बारे में जानकारी प्राप्त की।
(स्रोत: भाकृअनुप–भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल)







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