वैज्ञानिक सब्जी उत्पादन के माध्यम से द्वीप कृषि को सुदृढ़ बनाना: भाकृअनुप-केवीके (एनडीआर), नादिया में 7 दिवसीय कौशल प्रशिक्षण संपन्न

वैज्ञानिक सब्जी उत्पादन के माध्यम से द्वीप कृषि को सुदृढ़ बनाना: भाकृअनुप-केवीके (एनडीआर), नादिया में 7 दिवसीय कौशल प्रशिक्षण संपन्न

14 सितंबर, 2026, कल्याणी

अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के किसानों और अधिकारियों के लिए “सब्जी की खेती एवं उत्पादन प्रौद्योगिकियों पर पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज” विषय पर सात दिवसीय कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम आज भाकृअनुप-केवीके (एनडीआर), नादिया में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में द्वीप क्षेत्र में सब्जी उत्पादकता, लाभप्रदता और पोषण सुरक्षा बढ़ाने के लिए प्रतिभागियों को व्यावहारिक, स्थान-विशिष्ट प्रौद्योगिकियों से लैस करने पर ध्यान केन्द्रित किया गया। प्रशिक्षण को वैज्ञानिक ज्ञान और खेत-स्तरीय अनुप्रयोग के बीच की खाई को पाटने के लिए तैयार किया गया था, जिसमें वैज्ञानिक सब्जी उत्पादन, नर्सरी प्रबंधन, संरक्षित खेती, प्राकृतिक खेती, सूक्ष्म सिंचाई, एकीकृत कृषि प्रणालियां, पादप संरक्षण, कटाई उपरांत प्रबंधन और मूल्य संवर्धन सहित प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया।

अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह की विशिष्ट कृषि-जलवायु और संसाधन परिस्थितियों के अनुकूल प्रौद्योगिकियों और पद्धतियों पर विशेष जोर दिया गया।

समापन समारोह में डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भृकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी), कोलकाता, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि डॉ. शांतनु बनिक, प्रमुख, ईआरएस, भृकृअनुप-एनडीआकआई, कल्याणी, विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुआ।

अपने अनुभव साझा करते हुए, प्रतिभागी किसानों और अधिकारियों ने कार्यक्रम के दौरान प्रदान किए गए व्यावहारिक प्रदर्शनों, विशेषज्ञों के साथ संवाद, क्षेत्र भ्रमण और व्यावहारिक अनुभव की सराहना की। प्रतिभागियों ने विशेष रूप से द्वीपों में उत्पादन संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिए संरक्षित खेती, कुशल सिंचाई, प्राकृतिक खेती और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन पद्धतियों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

अपने समापन संबोधन में डॉ. डे ने जोर दिया कि सुदृढ़ और टिकाऊ द्वीप कृषि, विकसित भारत @2047 के विजन का अभिन्न अंग है, क्योंकि अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में किसानों को सशक्त बनाने से भौगोलिक रूप से दूरस्थ क्षेत्रों में खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, आजीविका और आत्मनिर्भरता को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने प्रतिभागियों से “प्रौद्योगिकी दूत” बनने का आह्वान किया, ताकि नवाचार, अभिसरण और किसान-केंद्रित प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से वैज्ञानिक ज्ञान को जलवायु-सहिष्णु, संसाधन-कुशल और लाभकारी कृषि में परिवर्तित किया जा सके। डॉ. डे ने “पहुंच से वंचित लोगों तक पहुंचना, समावेशी और सशक्त ग्रामीण कृषि को आगे बढ़ाना” तथा 2047 तक एक मजबूत, समावेशी और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए पंच प्राण—विकास, स्थिरता, एकता, जिम्मेदार नागरिकता और भारत की विरासत पर गर्व—की भावना पर प्रकाश डाला।

समापन समारोह का एक प्रमुख आकर्षण “सब्जी उत्पादन की वैज्ञानिक पद्धतियां: अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के लिए एक सलाह” शीर्षक वाली प्रशिक्षण पुस्तिका का विमोचन रहा, जो प्रतिभागियों को द्वीप पारिस्थितिकी तंत्र में उन्नत उत्पादन प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए एक व्यावहारिक संदर्भ प्रदान करती है।

कार्यक्रम का समापन कौशल विकास, प्रौद्योगिकी प्रसार और किसान-उन्मुख विस्तार सेवाओं को मजबूत करने की नई प्रतिबद्धता के साथ हुआ, जिससे द्वीप क्षेत्र में टिकाऊ सब्जी उत्पादन, बेहतर कृषि आय और उन्नत पोषण सुरक्षा में योगदान दिया जा सके।

यह प्रशिक्षण विज्ञान-आधारित क्षमता निर्माण और प्रभावी प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से “पहुंच से वंचित लोगों तक पहुंचना, समावेशी और सशक्त ग्रामीण कृषि को आगे बढ़ाना” की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है।

(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता)

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