2 मई, 2026, निमपीठ
संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान के अंतर्गत सब्जी फसलों में एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन पर एक डिजिटल कृषि परामर्श कार्यक्रम का सफल आयोजन रामकृष्ण आश्रम कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किया गया। यह कार्यक्रम सार्वजनिक–निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत रिलायंस फाउंडेशन तथा भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, ज़ोन-V, कोलकाता के सहयोग से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग माध्यम से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य सतत फसल उत्पादकता और दीर्घकालिक मृदा स्वास्थ्य के लिए जैविक, अकार्बनिक एवं जैव-इनपुट्स के समन्वित उपयोग को बढ़ावा देना था।
इस कार्यक्रम में प्रमुख किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और किसान उत्पादक कंपनियों (FPCs) के बोर्ड सदस्यों के साथ प्रगतिशील सब्जी उत्पादकों ने भाग लिया। इनमें जेबिका एफपीसी (पाथर प्रतिमा), आलोडिसा एफपीओ (काकद्वीप), कल्पतोरू एफपीओ (नामखाना) तथा सुंदरबन कृषि बिप्लब एफपीओ (कैनिंग) शामिल थे। इस पहल ने सामूहिक शिक्षण को प्रोत्साहित किया तथा संगठित किसान संस्थाओं के माध्यम से आईएनएम पद्धतियों के प्रसार को मजबूत किया।
डॉ प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता, ने कहा कि गहन सब्जी उत्पादन प्रणालियों में उत्पादकता बनाए रखने और दीर्घकालिक मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के लिए उन्नत आईएनएम अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि केवल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर रहना टिकाऊ नहीं है और इसे गोबर की खाद, कम्पोस्ट, फसल अवशेष, हरी खाद तथा जैव उर्वरकों जैसे जैविक इनपुट्स के साथ पूरक बनाना आवश्यक है। उन्होंने मृदा परीक्षण आधारित, स्थान-विशिष्ट पोषक तत्व प्रबंधन को आईएनएम के साथ एकीकृत करने के महत्व पर भी बल दिया, जिससे पोषक तत्व उपयोग दक्षता बढ़े और मृदा गुणवत्ता में सुधार हो सके। साथ ही उन्होंने संतुलित पोषक तत्व उपयोग और इसके व्यापक अपनाने को बढ़ावा देने हेतु नीतिगत समर्थन की आवश्यकता पर जोर दिया।

डॉ. सी.के. मोंडल, प्रमुख, रामकृष्ण आश्रम कृषि विज्ञान केन्द्र, निमपीठ, ने सब्जी फसलों के लिए स्थान-विशिष्ट परामर्शों के माध्यम से INM को बढ़ावा देने में कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) की सक्रिय भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने सटीक पोषक तत्व अनुसूची, जैविक संसाधनों के एकीकरण तथा कृषि अवशेषों के प्रभावी पुनर्चक्रण को मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने की प्रमुख रणनीतियाँ बताया।
विशेषज्ञों ने एज़ोटोबैक्टर और फॉस्फेट घुलनशील जीवाणु, जैसे- जैव उर्वरकों को रासायनिक उर्वरकों के साथ एकीकृत करने के खेत-स्तरीय उपायों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि इस प्रकार का एकीकरण पोषक तत्वों की उपलब्धता और अवशोषण को बढ़ाता है तथा लाभकारी सूक्ष्मजीव गतिविधियों को प्रोत्साहित करता है, जिससे पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलती है।
कार्यक्रम में सार्वजनिक–निजी सहयोग की महत्ता को भी रेखांकित किया गया। अमित सेन और अनिंद्य मंडल ने किसानों-केंद्रित हस्तक्षेपों तथा सब्जी उत्पादन प्रणालियों में सतत पोषक तत्व प्रबंधन पद्धतियों के विस्तार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के प्रमुख एफपीओ/एफपीसी के कुल 88 बोर्ड सदस्यों एवं प्रगतिशील किसानों ने सक्रिय भागीदारी की।
यह पहल ज्ञान आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण तथा व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए एक प्रभावी मंच सिद्ध हुई। यह एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन को मुख्यधारा में लाने, मृदा स्वास्थ्य सुधारने, उत्पादकता बढ़ाने तथा अधिक सुदृढ़ एवं सतत कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।
(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान)







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