फार्मर फर्स्ट के तहत कार्यशाला-सह-मुख्य प्रशिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

फार्मर फर्स्ट के तहत कार्यशाला-सह-मुख्य प्रशिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

18-20 फरवरी, 2026, महानपुर

पशु तथा मत्स्य विज्ञान का पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय,  कोलकाता, ने भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता, के साथ मिलकर, फार्मर फर्स्ट प्रोजेक्ट के तहत तीन दिन का वर्कशॉप-कम-मुख्य प्रशिक्षक प्रशिक्षण (एमटीटी) कार्यक्रम पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय, मोहनपुर, नादिया, में सफलतापूर्वक आयोजित किया।

यह प्रोग्राम “वैज्ञानिक तरीके से पशु पालन तथा इससे जुड़े हस्तक्षेप पाठ ईकाई के जरिए आजीविका सशक्तिकरण” विषय पर आधारित था और इसका मकसद मुख्य प्रशिक्षक, क्षेत्र-स्तरीय विस्तार स्टाफ और हितधारकों की क्षमता को मज़बूत करना था ताकि गांवों में आजीविका को बेहतर बनाने के लिए पशु-आधारित उद्यमिता विकास और एकीकृत कृषि के तरीकों को बढ़ावा दिया जा सके।

Workshop-cum-Master Trainer Training under Farmer FIRST Organised

अपने अध्यक्षीय संबोधन में, डॉ. टी.के. दत्ता, कुलपति, डब्ल्यूबीयूएएफएस, ने पशुपालन एवं मत्स्य पालन में वैज्ञानिक क्षमता निर्माण के साथ लक्षित आदान सहायता के ज़रिए छोटे किसानों की इनकम बढ़ाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, ताकि टिकाऊ आजीविका में सुधार और समावेशी गांव का विकास हो सके।

डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-अटारी, कोलकाता, ने इस बात पर ज़ोर दिया कि फार्मर फर्स्ट प्रोग्राम (एफएफपी) वैज्ञानिक तथा किसानों के बीच एक प्रभावी पुल का कार्य करता है। यह समुदाय आधारित रास्तों को बढ़ावा देता है जो प्रमाणित तकनीकी को क्षेत्र में हकीकत में बदलते हैं, साथ ही एकीकृत पशुपालन प्रदर्शन, ढ़ाचा आधारित मुख्य प्रशिक्षक प्रशिक्षण क्षमता निर्माण तथा अभिसरण-आधारित प्रसार को आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि एफएफपी के जरिए यह फीडबैक-आधारित, बाजार से जुड़े पहल न केवल महिलाओं एवं ग्रामीण युवाओं को परिवर्तनकारी तत्व के तौर पर मजबूत बनाता है, बल्कि मजबूत उत्पादन व्यवस्था, टिकाऊ विकास तथा समावेशी ग्रामीण आजीविका को भी मजबूत करता है।

विशेषज्ञ ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ऐसी पहल जमीनी स्तर की क्षमता को मजबूत करने और टिकाऊ एवं समावेशी ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए बहुत ज़रूरी हैं। उन्होंने कहा कि ये प्रोग्राम किसानों के ज्ञान, कौशल और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

अच्छी गुणवत्ता की पशु चिकित्सा शिक्षा, क्षेत्र आधारित प्रशिक्षण तथा किसान-केन्द्रित पशुपालन विकास के महत्व पर भी ज़ोर दिया गया। इसके अलावा, उत्पादकता, संसाधन के उपयोग गुणवत्ता तथा आजीविका सुरक्षा को बेहतर बनाने में वैज्ञानिक दुग्ध व्यवसाय प्रबंधन एवं तकनकी आधारित सलाह व्यवस्था की भूमिका पर ज़ोर दिया गया।

Workshop-cum-Master Trainer Training under Farmer FIRST Organised

इस प्रोग्राम में नादिया ज़िले के हरिंघटा ब्लॉक के तहत गोद लिए गए तीन गांवों आयशपुर, बक्सा और दक्षिण दत्तापारा से 30 पार्टिसिपेंट्स शामिल हुए, जिन्हें मास्टर ट्रेनर के तौर पर ट्रेनिंग दी गई। इस मौके पर, हितधारक के बीच ज़्यादा जानकारी के लिए दस विस्तार बुलेटिन और एक तकनकी बुकलेट आधिकारिक रूप से रिलीज़ की गईं। फार्मर फर्स्ट प्रोग्राम के तहत गोद लिए गए तीन गांवों की चुनी हुई महिला कृत्रिम मेधा (AI) कार्यकर्ता को बकरियों के लिए LN₂ कंटेनर तथा कृत्रिम इनसेमिनेशन किट भी बांटे गए, जिससे अंतिम छोर तक ब्रीडिंग सेवा मजबूत हुई और साथ ही जमीनी स्तर पर महिलाओं के नेतृत्व में पशुधन बढ़ाने को बढ़ावा मिला।

प्रशिक्षण में मुख्य वैज्ञानिक तथा उद्यम से संबंधित प्रमुख विषय जैसे नवाचार आधारित मत्स्य पालन, मल्टी-स्टोरी बागवानी आधारित आईएफआस, कम लागत वाला वर्मीकम्पोस्ट और मशरूम उत्पादन, बंगाल बकरी सुधार के लिए कृत्रिम इनसेमिनेशन, चारा और चारे का प्रबंधन, महिलाओं के लिए दुग्ध उत्पादन में मुल्य संवर्धन, तथा पशुपालन की आर्थिक संरचना शामिल थीं। बागवानी और दुग्ध उत्पादन प्रसंस्करण में व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए मंदौरी बागवानी फार्म (बासीकेवी) और विभागीय दुग्ध उत्पादन इकाई के भ्रमण के जरिए व्यावहारिक जानकारी को और मजबूत किया गया।

(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता)

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