प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मननर्भर और रसायन मुक्त कृषि इकोसिस्टम के विजन को साकार करने की दिशा में डॉ. राजेंद्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय (आरपीसीएयू), पूसा, ने देश में एक नई मिशाल कायम की है। आरपीसीएयू ने बी.एस.सी, एजी. ऑनर्स नेचुरल फार्मिंग का नया और अनोखा पाठ्यक्रम शुरू करने तथा राष्ट्रीय स्तर का नया सिलेबस बारीकी से तैयार करके यह सुनिश्तित किया है कि यहां से निकलने वाले युवा ग्रेजुएट भारत में सतत खेती की क्राति का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार होगा।

गौरतलब है कि इस विशेष डिग्री प्रोग्राम को सेन्ट्रल एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी इंफाल, आरएलबीसीएयू झांसी और आरएलबीसीएयू, पूसा ने संयुक्त रूप से शुरू किया है। शुरुआत में योजनाकारों के मन में छात्रों को लेकर संशय था कि क्या इस डिग्री से उन्हें रोजगार मिल सकेगा या नहीं। लेकिन इस क्षेत्र में रोजगार सृजन के बढ़ते अवसर प्राप्त होने का सबसे ज्यादा श्रेय हमारे यशश्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को जाता है, जिन्होंने बदलती वैश्विक परिस्थितियों को भााँपते हुए देश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का बार - बार आवाह्नन किया, जिसके परिणामस्वरुप इस क्षेत्र में कार्य करने के लिए बड़ी - बड़ी कंपनियां रूचि दिखा रही है और इस क्षेत्र के विशेषज्ञ छात्रों को रोजगार का अवसर मिल रहा है। काउंसिल द्वारा सिलेबस को वैज्ञानिक और उद्योग की जरूरतों के अनुसार तैयार करने, विश्वविद्यालय द्वारा बेहतरीन एकेडमिक शेड्यूल लागू करने तथा छात्रों को फील्ड में प्रैक्टिकल अनुभव देने के कारण आरपीसीएयू भारत का पहला ऐसा संस्थान बन गया है जिसने नेचुरल फार्मिंग प्रोफेशनल्स का एक पूर्णतः काबिल बैच तैयार किया है।

16 जून को “खेत बचाओ अभियान” के दौरान आयोजित कार्यक्रम में, 2023 से 2027 बैच के नामांकित सभी 15 छात्रों को 15 हजार रुपये प्रति माह तक की पेड इंटर्नशिप और प्लेसमेंट के ऑफर लेटर, माननीय केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर जी द्वारा सौंपा गया। यह ऑफर कृषि, ग्रीन एनजी और ग्रामीण विकास जुड़ी विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा दिया गया। प्लेसमेंट देने वाली कॉर्पोरेट संस्था के अधिकारी ने कहा कि वे छात्रों की स्किल्स देखकर बहुत प्रभावित हैं। नेचुरल फार्मिंग, ग्रीन एनर्जी, ऑगेनिक खेती और इससे जुड़े क्षेत्रों में उद्योगों की भविष्य कि जरूरतों के हिसाब से इन छात्रों की तैयारी एकदम सटीक है।
चयनित छात्र गोवर्धन पहल, वेस्ट टू एनर्जी सिस्टम, प्राकृतिक खेती के मॉडल और ग्रामीण टिकाऊ विकास कार्यक्रमों से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करेंगे। इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य किसानों के बीच रसायन मुक्त खेती, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सतत कृषि मॉडलों के प्रति जागरूकता बढाना है। साथ ही छात्रों को उत्पादों के मार्केटिंग तथा कमर्शियलाईजेशन में महारत हासिल करने का अवसर भी मिलेगा। इससे प्राकृतिक उत्पाद देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचेंगे और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार तथा उद्यमिता को बढावा मिलेगा।

अपनी पेड इंटर्नशिप और एकेडेमिक आवश्यकताओं को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद इन छात्रों को संबन्धित संस्थाओं में स्थायी नौकरी के अवसर भी होंगे। नेचुरल फार्मिंग की विशेषज्ञता की भारी मांग को देखते हुए कॉर्पोरेट जगत में इस कोर्स को लेकर काफी उत्साह है। ग्रीन एनजी कंपनियों सहित कई बड़ी फर्मों ने पूरे बैच को इंटर्नशिप के साथ ग्रेजुएशन के बाद पक्की नौकरी का प्रस्ताव दिया है। प्रधानमंत्री मोदी जी के आह्वान से प्रेरित होकर ये युवा भारत के कृषि क्षेत्र में जमीनी स्तर पर बदलाव लाने के लिए करियर को समर्पित करने का विकल्प चुन रहे हैं। मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने कहा इस सोच से गांवों में कृषि आधारित उद्यम बढ़ेंगे और आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार होगा।
कार्यक्रम में बडी संख्या में वैज्ञानिक, किसान, छात्र और उद्योग प्रतिनिधि उपस्थित रहे। केवीके बिरौली द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि सही सिलेबस फील्ड आधारित प्रशिक्षण और उद्योग जगत के सहयोग से कृषि शिक्षा को रोजगार परक बनाया जा सकता है। पूसा की इस पहल को अब देश के अन्य कृषि विश्वविद्यालय हेतु एक मॉडल (प्रतिमान) के रूप में माना जा रहा है।







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