पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना में एसएसकेवीके द्वारा सतत मृदा स्वास्थ्य हेतु संतुलित उर्वरक उपयोग पर गहन अभियान का आयोजन

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना में एसएसकेवीके द्वारा सतत मृदा स्वास्थ्य हेतु संतुलित उर्वरक उपयोग पर गहन अभियान का आयोजन

7 अप्रैल, 2026, नरेंद्रपुर

सस्य श्यामला केवीके (आरकेएमवीईआरआई), नरेन्द्रपुर द्वारा सस्य श्यामला केवीके (आरकेएमवीईआरआई), कोलकाता, के अंतर्गत आज संतुलित उर्वरक उपयोग पर एक गहन अभियान सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम भूमि सुपोषण एवं संरक्षण जन अभियान के उद्देश्यों के अनुरूप आयोजित किया गया, जिसमें मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन के महत्व और उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग के माध्यम से सतत कृषि पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया गया।

Intensive Campaign on Balanced Use of Fertilizers for Sustainable Soil Health Organised at SSKVK, South 24 Parganas, West Bengal

डॉ. प्रदीप डे. निदेशक, भाकृअनुप-अटारी, कोलकाता, ने पोषक तत्व प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक एवं समन्वित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया, जो मृदा परीक्षण आधारित सिफारिशों और मृदा स्वास्थ्य कार्ड के उपयोग पर आधारित हो। उन्होंने हरी खाद उत्पादन जैसी प्रथाओं के माध्यम से मृदा में जैविक पदार्थ बढ़ाने के महत्व को रेखांकित किया तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम) के अंतर्गत जैविक इनपुट्स तथा जैव-उर्वरकों के समावेशन की वकालत की।

उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, जिसमें एनपीके कॉम्प्लेक्स, सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों का उचित प्रयोग शामिल है, जबकि मृदा की दीर्घकालिक उर्वरता और स्थिरता बनाए रखने के लिए यूरिया तथा डीएपी के अंधाधुंध उपयोग को हतोत्साहित करने की आवश्यकता बताई।

Intensive Campaign on Balanced Use of Fertilizers for Sustainable Soil Health Organised at SSKVK, South 24 Parganas, West Bengal

अभियान के दौरान असंतुलित और अत्यधिक रासायनिक उर्वरक उपयोग से उत्पन्न हो रही समस्याओं पर भी प्रकाश डाला गया। विशेषज्ञों ने स्वीकार किया कि उर्वरकों ने फसल उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन उनके अवैज्ञानिक उपयोग से मृदा स्वास्थ्य में गिरावट, पोषक तत्व उपयोग दक्षता में कमी और पर्यावरणीय जोखिम बढ़ रहे हैं। यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो इससे कृषि की दीर्घकालिक स्थिरता और किसानों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

यह अभियान जागरूकता एवं क्षमता निर्माण का एक प्रभावी मंच साबित हुआ, जिसमें किसानों, विस्तार कर्मियों तथा अन्य हितधारकों को आवश्यकतानुसार और संतुलित उर्वरक उपयोग के माध्यम से मृदा उर्वरता पुनर्स्थापित करने के लिए प्रेरित किया गया। इसमें यह संदेश भी दिया गया कि सतत मृदा प्रबंधन, लचीली कृषि प्रणाली विकसित करने और दीर्घकालिक खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम में दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर ब्लॉक से 25 महिला किसानों की सक्रिय भागीदारी रही।

(स्रोत: भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता)

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