प्रधान सचिव, कृषि विभाग ने कहा जल-स्मार्ट और पुनर्योजी खेती समय की मांग

प्रधान सचिव, कृषि विभाग ने कहा जल-स्मार्ट और पुनर्योजी खेती समय की मांग

9 अक्टूबर, 2026, पटना

भाकृअनुप–पूर्वी क्षेत्र के लिए अनुसंधान परिसर, पटना ने आज अपने सबजपुरा अनुसंधान फार्म में “जल-स्मार्ट तथा पुनर्योजी खेती” पर एक फील्ड डे का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य जल-उपयोग दक्षता में सुधार, मृदा स्वास्थ्य को बढ़ाना, खेती की लागत कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और जलवायु अनुकूलता को सुदृढ़ करने के लिए नवीन कृषि प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन करना था।

श्री नर्मदेश्वर लाल, प्रधान सचिव, कृषि विभाग, बिहार सरकार, ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। श्री संतोष कुमार उत्तम, अपर निदेशक एवं निदेशक, एवं पादप संरक्षण तथा पादप संगरोध निगरानी (पीपीएम), भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

दौरे के दौरान श्री लाल ने संस्थान द्वारा विकसित विभिन्न प्रौद्योगिकी प्रदर्शनों और कृषि मॉडलों का अवलोकन किया, जिनमें जल-स्मार्ट खेती, संरक्षण-उन्मुख उठी हुई एवं नीची क्यारी प्रणालियां, एकीकृत फसल–जलीय कृषि प्रणालियां, सूक्ष्म सिंचाई, सीधी बुवाई वाला धान, जलवायु-अनुकूल धान की किस्में, धान परती भूमि प्रबंधन, एकीकृत कृषि प्रणाली मॉडल, फल एवं सब्जी की खेती के माध्यम से फसल विविधीकरण, कृषि वानिकी और संसाधन संरक्षण प्रौद्योगिकियां शामिल थीं।

Water-Smart and Regenerative Farming is the Need of the Hour: Principal Secretary, Agriculture, Bihar

इन पहलों ने जल उत्पादकता बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य में सुधार और टिकाऊ कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने की महत्वपूर्ण क्षमता का प्रदर्शन किया। प्रौद्योगिकियों की सराहना करते हुए श्री लाल ने किसानों के बीच इनके व्यापक प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया और आश्वासन दिया कि राज्य कृषि विभाग इनके अंगीकरण को सुगम बनाने के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करेगा। उन्होंने अनुसंधान फार्म की अवसंरचनात्मक सुविधाओं का भी दौरा किया, जिसमें बीज प्रसंस्करण इकाई शामिल थी, जहां उन्होंने बीज ग्रेडिंग, छंटाई और गुणवत्ता आश्वासन प्रक्रियाओं का अवलोकन किया।

प्रधान सचिव के साथ बातचीत के दौरान भाग लेने वाले किसानों ने संस्थान से उन्नत प्रौद्योगिकियों, गुणवत्तापूर्ण बीज, रोपण सामग्री, कृषि आदानों और क्षमता निर्माण संबंधी सहायता प्राप्त करने के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कुशल जल प्रबंधन, बेहतर मृदा स्वास्थ्य, कृषि उत्पादकता में वृद्धि और कृषि आय बढ़ाने के लिए उन्नत पद्धतियों को अपनाने में वैज्ञानिक मार्गदर्शन और प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला।

डॉ. अनूप दास, निदेशक, भाकृअनुप-आरसीईआर, पटना, ने जलवायु परिवर्तन, जल की अनिश्चित उपलब्धता, मृदा क्षरण और खेती की बढ़ती लागत सहित उभरती चुनौतियों से निपटने में जल-स्मार्ट और पुनर्योजी खेती के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने जोर दिया कि कुशल सिंचाई, जलवायु-अनुकूल फसल किस्में, विविधीकृत कृषि प्रणालियां और संसाधन संरक्षण वाली पद्धतियां प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव को कम करने के साथ-साथ कृषि की लाभप्रदता में सुधार, कृषि उत्पादन को बनाए रखने और किसानों की आजीविका को सुदृढ़ करने में मदद कर सकती हैं।

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फील्ड डे में 100 से अधिक किसानों और अन्य हितधारकों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने विभिन्न अनुसंधान इकाइयों का दौरा किया और उन्नत कृषि प्रौद्योगिकियों के व्यावहारिक अनुप्रयोग को प्रदर्शित करने वाले क्षेत्रीय प्रदर्शनों का अवलोकन किया। किसान–वैज्ञानिक संवाद के दौरान हुई चर्चाओं में जल उत्पादकता में सुधार, मृदा एवं जल संसाधनों का संरक्षण, मृदा उर्वरता बढ़ाना, आदान लागत कम करना तथा जलवायु-अनुकूल और पुनर्योजी कृषि पद्धतियों को बड़े स्तर पर अपनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

भाग लेने वाले किसानों को फलदार पौधे और गुणवत्तापूर्ण सब्जियों के बीज भी वितरित किए गए। श्री लाल ने किसान-केंद्रित प्रौद्योगिकियों के विकास और प्रसार में संस्थान के प्रयासों की सराहना की तथा इसके बुनियादी ढांचे और प्रसार पहलों को सुदृढ़ करने के लिए समर्थन व्यक्त किया। इस अवसर को चिह्नित करने के लिए मुख्य अतिथि ने फार्म परिसर में एक फलदार पौधा भी लगाया।

कार्यक्रम ने बिहार में अधिक उत्पादक, संसाधन-कुशल और जलवायु-अनुकूल कृषि प्रणाली की दिशा में जल-स्मार्ट और पुनर्योजी कृषि पद्धतियों को अपनाने में तेजी लाने के लिए मजबूत किसान–वैज्ञानिक–सरकार साझेदारी के महत्व की पुनः पुष्टि की।

(स्रोत: भाकृअनुप–पूर्वी क्षेत्र के लिए अनुसंधान परिसर, पटना)

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