महानिदेशक, भाकृअनुप ने हैदराबाद स्थित भाकृअनुप–आईआईएमआर के दौरे के दौरान श्री अन्न प्रौद्योगिकियों एवं मूल्य श्रृंखलाओं के विस्तार का आह्वान किया; श्री अन्न के वैश्विक उत्कृष्टता केन्द्र की प्रगति की कि समीक्षा

महानिदेशक, भाकृअनुप ने हैदराबाद स्थित भाकृअनुप–आईआईएमआर के दौरे के दौरान श्री अन्न प्रौद्योगिकियों एवं मूल्य श्रृंखलाओं के विस्तार का आह्वान किया; श्री अन्न के वैश्विक उत्कृष्टता केन्द्र की प्रगति की कि समीक्षा

8 मार्च, 2026, हैदराबाद

देश में श्री अन्न को जलवायु-अनुकूल एवं पोषण-समृद्ध फसलों के रूप में बढ़ावा देने की राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए डॉ. एम.एल. जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक (भाकृअनुप), ने आज भाकृअनुप–भारतीय श्री अन्न अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद, का दौरा किया।

दौरे के दौरान डॉ. जाट ने संस्थान के निदेशक, वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों के साथ संवाद किया और उन्हें संस्थान के प्रमुख अनुसंधान कार्यक्रमों की जानकारी दी गई। ये पहलें श्री अन्न फसलों के सुधार, जलवायु-सहिष्णु उत्पादन प्रौद्योगिकियों के विकास, बीज प्रणालियों को सुदृढ़ करने, फसल कटाई उपरांत प्रबंधन, मूल्य संवर्धन तथा श्री अन्न श्री अन्न-आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं। चर्चाओं में “श्री अन्न” के रूप में श्री अन्न को बढ़ावा देने में भाकृअनुप–आईआईएमआर के प्रयासों को रेखांकित किया गया, जो पोषण सुरक्षा, सतत कृषि और किसानों की आय के अवसरों को बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं।

DG, ICAR Calls for Expanding Millet Technologies and Value Chains during Visit to ICAR–IIMR, Hyderabad; Reviews Progress of Global Centre of Excellence on Millets

डॉ. जाट ने भाकृअनुप–आईआईएमआर में स्थापित श्री अन्न के लिए वैश्विक उत्कृष्टता केन्द्र (श्री अन्न) (जीसीओसी) का भी दौरा किया, जहां उन्होंने उन्नत सुविधाओं एवं पहलों की प्रगति की समीक्षा की। ये पहले वैश्विक सहयोग, क्षमता निर्माण तथा श्री अन्न प्रौद्योगिकियों के प्रसार को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से संचालित की जा रही हैं। इस केंद्र का उद्घाटन भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किए जाने की संभावना है।

वैज्ञानिक समुदाय के साथ बातचीत में डॉ. जाट ने श्री अन्न अनुसंधान को आगे बढ़ाने तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर श्री अन्न-आधारित नवाचारों को प्रोत्साहित करने में संस्थान के योगदान की सराहना की। उन्होंने जलवायु-सहिष्णु श्री अन्न किस्मों, उन्नत कृषि पद्धतियों तथा आधुनिक प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों पर अनुसंधान को और अधिक सशक्त करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि श्री अन्न-आधारित उत्पादों के मूल्य एवं बाजार संभावनाओं को बढ़ाया जा सके।

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उन्होंने आगे राज्य सरकारों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) तथा अन्य हितधारकों के साथ घनिष्ठ सहयोग के माध्यम से श्री अन्न प्रौद्योगिकियों के प्रसार और विस्तार को मजबूत करने की सलाह दी। साथ ही, श्री अन्न मूल्य श्रृंखलाओं के विस्तार, श्री अन्न-आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि करने पर भी जोर दिया।

(स्रोत: भाकृअनुप–भारतीय श्री अन्न अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)

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