16 मई, 2026, मेघालय
मेघालय के उपमुख्यमंत्री श्री स्नियावभालंग धर ने आज वाहियाजेर स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके), जैंतिया हिल्स परिसर में केवीके के प्रशासनिक भवन तथा निक्रा-टीडीसी हितधारक कार्यशाला का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम क्षेत्र में कृषि विकास, प्रौद्योगिकी प्रसार तथा किसानों के सशक्तिकरण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
प्रशासनिक भवन का उद्घाटन करते हुए उपमुख्यमंत्री ने केवीके, जैंतिया हिल्स को कृषि नवाचार, सूचना तथा ज्ञान प्रसार का केन्द्र बनाने की परिकल्पना व्यक्त की। उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास तथा किसानों के बीच आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रसार पर बल दिया।
अपने उद्घाटन संबोधन में श्री स्नियावभालंग धर ने वैज्ञानिक खेती, तकनीकी मार्गदर्शन, क्षमता निर्माण तथा क्षेत्र विशेष की नवाचारी तकनीकों के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने में केवीके, जैंतिया हिल्स की परिवर्तनकारी भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने किसानों की आजीविका सुधारने के उद्देश्य से राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं जैसे सीएम एलिवेट कार्यक्रम, बीज फार्म योजनाएं तथा कृषि यंत्रीकरण सब्सिडी का उल्लेख किया, जिनके तहत किसानों को वित्तीय सहायता, रियायती उपकरण और प्रशिक्षण सुविधाएं प्रदान की जा रही है।

उपमुख्यमंत्री ने निरंतर सीखने और कौशल विकास के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि केवीके द्वारा संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रम कृषि उत्पादकता बढ़ाने और सतत आजीविका सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने खेती को एक पेशे के रूप में अपनाने का आह्वान किया तथा किसानों को बेहतर जैविक खेती पद्धतियाँ अपनाने के लिए केवीके के साथ मिलकर कार्य करने के लिए प्रेरित किया, ताकि सतत कृषि, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को बढ़ावा मिल सके।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र की शुरुआत कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, मेघालय सरकार की कृषि (आर एंड टी) निदेशक स्मति एम. डखार के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों, वैज्ञानिकों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों तथा किसानों का स्वागत किया तथा कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने में केवीके की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की।
इसके बाद कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, मेघालय सरकार के कृषि निदेशक श्री एस. रानी ने उद्घाटन संबोधन दिया। उन्होंने कृषि विस्तार सेवाओं को मजबूत करने तथा किसानों की आजीविका सुधारने और राज्य में सतत कृषि विकास सुनिश्चित करने हेतु वैज्ञानिक एवं जलवायु-सहिष्णु खेती पद्धतियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद की प्रधान वैज्ञानिक एवं निक्रा की प्रधान अन्वेषक डॉ. जी. प्रतिभा ने जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने में जलवायु-सहिष्णु तकनीकों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका बनाए रखने के लिए ऐसी तकनीकी नवाचार अत्यंत आवश्यक हैं, विशेषकर जलवायु-संवेदनशील क्षेत्रों में।
भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारे), ज़ोन VII, डॉ. ए.के. मोहंती, निदेशक, उमियाम, ने कहा कि केवीके, अनुसंधान संस्थानों और किसानों के बीच सेतु का कार्य करते हैं। उन्होंने स्थान-विशिष्ट, बाज़ार-उन्मुख तथा मांग-आधारित तकनीकी हस्तांतरण, क्षमता निर्माण तथा जमीनी स्तर पर हस्तक्षेप की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने किसानों की आजीविका सुधारने के उद्देश्य से निक्रा, पीएमडीडीकेवाई तथा अन्य विकासात्मक कार्यक्रमों के समन्वय की आवश्यकता बताई।
डॉ. मोहंती ने यह भी जानकारी दी कि कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन, उद्यमिता विकास और विपणन को बढ़ावा देने के लिए केवीके, जैंतिया हिल्स में ग्रामीण कृषि व्यवसाय इनक्यूबेशन केन्द्र स्थापित किया गया है।

कार्यक्रम के दौरान आधिकारिक प्रकाशनों का विमोचन, उद्घाटन पट्टिका का अनावरण, किसानों को कृषि आदानों का वितरण, प्रदर्शनी स्टॉलों का उद्घाटन तथा कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) का शुभारंभ भी किया गया।
इस अवसर पर स्मति ब्लॉसम नोंगरूम को नवाचारी खेती पद्धतियों और जलवायु-सहिष्णु कृषि में उत्कृष्ट योगदान के लिए “सर्वश्रेष्ठ निक्रा किसान” सम्मान से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में “जलवायु-स्मार्ट कृषि पद्धतियों के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों की खाद्य सुरक्षा एवं आजीविका सुदृढ़ीकरण” विषय पर एक तकनीकी सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें उत्पादकता, खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने हेतु सतत एवं जलवायु-अनुकूल कृषि उपायों पर चर्चा की गई।
केवीके, जैंतिया हिल्स द्वारा संचालित निक्रा गतिविधियों की प्रस्तुति केवीके की विषय विशेषज्ञ (बागवानी) स्मति बी. खारबामोन ने दी। इसके बाद किसान–वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें किसानों ने अपनी समस्याएं साझा कीं और वैज्ञानिकों से उन्नत एवं टिकाऊ खेती संबंधी तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त किया।
कार्यक्रम के अंत में जिले के निक्रा-अनुमोदित गाँवों का भ्रमण किया गया, जहां जमीनी स्तर पर जलवायु-सहिष्णु कृषि हस्तक्षेपों के कार्यान्वयन की समीक्षा की गई।
(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, ज़ोन VII, उमियाम, मेघालय)







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