10-12 जनवरी, 2026, लक्षद्वीप
लक्षद्वीप के कवरत्ती द्वीप पर 10-12 जनवरी, 2026 तक चले तीन दिवसीय मत्स्य मेले में मत्स्य पालन, संस्कृति और सामुदायिक जीवन का शानदार उत्सव देखने को मिला। इस कार्यक्रम में द्वीप वासी, मछुआरे, उद्यमी, वैज्ञानिक, नीति निर्माता तथा आगंतुक एक साथ आए, जिससे एक ऐसा गतिशील मंच बना जिसने लक्षद्वीप की समृद्ध समुद्री विरासत को आधुनिक मत्स्य विज्ञान, नवाचार और उद्यमिता के साथ सहजता से जोड़ा।
भाकृअनुप-केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान के कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके), लक्षद्वीप, ने मत्स्य विभाग, लक्षद्वीप प्रशासन और भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान के सहयोग से इस बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया।
इस कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. एस.बी. दीपक कुमार, भारतीय प्रशासनिक सेवा, सलाहकार, प्रशासक, लक्षद्वीप, ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. बी.के. बेहरा, मुख्य कार्यकारी, राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड, ने की। डॉ. गिरी शंकर, भारतीय प्रशासनिक सेवा, जिला कलेक्टर; राज तिलक, आईएफएस, मत्स्य सचिव, लक्षद्वीप; श्री के बुजर जमहर, डीएएनआईसीएस, मत्स्य निदेशक; डॉ. ग्रिंसन जॉर्ज, निदेशक, भाकृअनुप-सीएमएफआरआई; डॉ. वी वेंकट सुब्रमण्यम, निदेशक, भाकृअनुप-अटारी; डॉ. जॉर्ज निनन, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईएफटी के साथ-साथ केवीके, लक्षद्वीप, के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उद्घाटन के दौरान उपस्थित थे।

इस कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. एस.बी. दीपक कुमार, भारतीय प्रशासनिक सेवा, सलाहकार, प्रशासक, लक्षद्वीप, ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. बी.के. बेहरा, मुख्य कार्यकारी, राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड, ने की। डॉ. गिरी शंकर, भारतीय प्रशासनिक सेवा, जिला कलेक्टर; राज तिलक, आईएफएस, मत्स्य सचिव, लक्षद्वीप; श्री के बुजर जमहर, डीएएनआईसीएस, मत्स्य निदेशक; डॉ. ग्रिंसन जॉर्ज, निदेशक, भाकृअनुप-सीएमएफआरआई; डॉ. वी वेंकट सुब्रमण्यम, निदेशक, भाकृअनुप-अटारी; डॉ. जॉर्ज निनन, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईएफटी के साथ-साथ केवीके, लक्षद्वीप, के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उद्घाटन के दौरान उपस्थित थे।
मत्स्य मेले में एक आकर्षक प्रदर्शनी और लाइव डेमो दिखाए गए, जिसमें टूना से बने कई तरह के वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स, जैसे खाने के लिए तैयार स्वादिष्ट व्यंजन, पारंपरिक मस्मीन, मछली का गुड़, ऑक्टोपस फ्राई और नए सीफूड प्रोडक्ट्स शामिल थे। समुद्री शैवाल पर आधारित प्रोडक्ट्स तथा तकनीकी भी मुख्य आकर्षण के रूप में उभरे, जो द्वीप समुदायों के लिए नई आजीविका एवं बाजार के अवसरों को रेखांकित करते हैं। इन प्रदर्शनियों में स्वदेशी ज्ञान की ताकत को उभरते वैज्ञानिक और तकनीकी हस्तक्षेपों के साथ दिखाया गया।
किसान-वैज्ञानिक इंटरफेस सत्रों की एक श्रृंखला ने मेले की तकनीकी रीढ़ बनाई, जिसमें फसल कटाई के बाद की टेक्नोलॉजी, वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग, क्रेडिट तथा मत्स्य पालन योजनाएं, समुद्री खेती एवं समुद्री शैवाल की खेती, सजावटी मत्स्य पालन, स्थायी समुद्री मत्स्य पालन, पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को शामिल किया गया। भाकृअनुप-सीएमएफआरआई, भाकृअनुप-सीआईएफटी, विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीय एजेंसियों और उद्योग के विशेषज्ञों ने मछुआरों और उद्यमियों के साथ मिलकर बातचीत की, जिससे ज्ञान का आदान-प्रदान हुआ और द्वीप की स्थितियों के अनुसार व्यावहारिक समाधान मिले।

मेले में एंटरप्रेन्योरशिप पर एक हीतधारक बैठक, महिलाओं तथा युवाओं को मछली पालन की ओर आकर्षित करने पर पैनल चर्चा, और कोऑपरेटिव, स्टार्टअप, कोल्ड चेन सॉल्यूशन, रिन्यूएबल एनर्जी के इस्तेमाल तथा मछली पालन के विकास के लिए पॉलिसी तरीकों पर फोकस करने वाले इंटरैक्टिव सेशन भी हुए। क्विज़ कॉम्पिटिशन, रस्साकशी, खाने की रेसिपी कॉम्पिटिशन और अच्छी भीड़ वाली सांस्कृतिक शामों के ज़रिए कम्युनिटी जुड़ाव को और मजबूत किया गया, जिसमें लक्षद्वीप की जीवंत परंपराओं और कलात्मक विरासत का जश्न मनाया गया।
इस इवेंट में मछली पकड़ने तथा फसल कटाई के बाद के सेक्टरों का प्रतिनिधित्व करने वाले कुल 72 प्रदर्शक शामिल थे।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, कोच्चि)







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