1 सितंबर, 2026, कोच्चि
मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री, श्री राजीव रंजन सिंह ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मत्स्य अवसंरचना परियोजनाओं के शुभारंभ तथा ब्लू इकोनॉमी के तहत सहकारी संस्था-आधारित समुद्री शैवाल खेती के लिए बहुआयामी क्षमता निर्माण सम्मेलन के सिलसिले में पुडुचेरी में भाकृअनुप-केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान के प्रदर्शनी स्टॉल का दौरा किया।

कार्यक्रम का आयोजन आज भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग और पुडुचेरी सरकार के मत्स्य पालन एवं मछुआरा कल्याण विभाग द्वारा संयुक्त रूप से पुडुचेरी के कामराजार मणि मंडपम में किया गया। प्रदर्शनी में भाकृअनुप-सीएमएफआरआई ने मत्स्य प्रबंधन, समुद्री फिनफिश के प्रजनन एवं बीज उत्पादन, समुद्री शैवाल खेती और समुद्री केज खेती के क्षेत्र में अपनी गतिविधियों और तकनीकी हस्तक्षेपों का प्रदर्शन किया।

इस स्टॉल का दौरा कई विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों ने किया, जिनमें प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज राज्य मंत्री; श्री के. कैलाशनाथन, उपराज्यपाल, पुडुचेरी; थिरु एन. रंगासामी, मुख्यमंत्री, पुडुचेरी; थिरु ए. अनबलगन, अध्यक्ष, विधान सभा, पुडुचेरी; श्री मल्लाडी कृष्ण राव, मत्स्य पालन मंत्री; श्री जी.एन.एस. राजसेकरन, कृषि मंत्री; श्री ए. नमस्सिवायम, गृह मंत्री; श्री ए. जॉन कुमारदास, सलाहकार, मुख्यमंत्री; श्री वी.पी. शिवकोलुंधु, नागरिक आपूर्ति मंत्री; श्री एस. सेल्वगणपति, सांसद, राज्य सभा; डॉ. अभिलक्ष लिखी, सचिव, मत्स्य पालन विभाग, भारत सरकार; डॉ. शरत चौहान, मुख्य सचिव, पुडुचेरी सरकार; डॉ. सुरभि राय, IFS, संयुक्त सचिव (समुद्री मात्स्यिकी); और डॉ. बिजय कुमार बेहेरा, मुख्य कार्यकारी, एनएफडीबी शामिल थे।

कार्यक्रम के दौरान उद्घाटन की गई मत्स्य अवसंरचना परियोजनाओं में पुडुचेरी के कराईकल में समुद्री शैवाल खेती एवं उपयोग के लिए उन्नत नवाचार और क्षमता विकास केंद्र (एसीआईसीडी) भी शामिल था। इस केन्द्र को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत पुडुचेरी सरकार के मत्स्य पालन एवं मछुआरा कल्याण विभाग और भाकृअनुप-सीएमएफआरआई द्वारा संयुक्त रूप से कार्यान्वित किया जा रहा है, जिसकी परियोजना लागत ₹1.92 करोड़ है।
डॉ. बी. जॉनसन ने ब्लू इकोनॉमी के तहत सहकारी संस्था-आधारित समुद्री शैवाल खेती के लिए बहुआयामी क्षमता निर्माण सम्मेलन के दौरान पुडुचेरी में समुद्री शैवाल खेती और उपयोग की संभावनाओं पर एक तकनीकी प्रस्तुति भी दी। प्रस्तुति में सतत आजीविका के अवसर पैदा करने, तटीय ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करने और समुद्री शैवाल संसाधनों के उपयोग के माध्यम से मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने में समुद्री शैवाल खेती की संभावनाओं पर प्रकाश डाला गया।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, कोच्चि)







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