21 अगस्त, 2026, देहरादून
भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून ने 16 से 22 अगस्त, 2026 तक पार्थेनियम जागरूकता सप्ताह आयोजित किया। इस सप्ताह भर चलने वाले कार्यक्रम के तहत आज संस्थान परिसर में पार्थेनियम जागरूकता दिवस मनाया गया, जिसमें संस्थान के कर्मचारियों सहित कुल 50 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं और उनका प्रदर्शन किया गया, जैसे पार्थेनियम पौधों की पहचान, पार्थेनियम पौधों के उन्मूलन के लिए सुरक्षा उपाय, जैसे मास्क, हाथ के दस्ताने, सैनिटाइजर आदि, जैविक नियंत्रण उपाय, जैसे मैक्सिकन बीटल (Zygogramma bicolorata) की पहचान, पार्थेनियम कम्पोस्ट तैयार करना आदि।

कार्यक्रम की शुरुआत पार्थेनियम जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के महत्व तथा कृषि भूमि, मानव स्वास्थ्य, पशुधन और समग्र पारिस्थितिकी तंत्र पर पार्थेनियम खरपतवार के प्रतिकूल प्रभावों के बारे में जानकारी देने के साथ हुई। प्रतिभागियों को खरपतवार के नियंत्रण के लिए प्रभावी भौतिक, जैविक और रासायनिक प्रबंधन रणनीतियों के साथ-साथ मनुष्यों और पशुओं पर इसके हानिकारक प्रभावों को कम करने के लिए निवारक उपायों के बारे में अवगत कराया गया।
सत्र में पार्थेनियम के जैवभार, विशेष रूप से फूल आने से पहले, का पोषक तत्वों से भरपूर कम्पोस्ट तैयार करने में उपयोग किए जाने की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला गया। खरपतवार के पारिस्थितिक प्रबंधन के लिए इसके प्राकृतिक प्रतिस्पर्धियों और जैविक शत्रुओं की पहचान एवं उन्हें बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
प्रतिभागियों को मृदा एवं जल संरक्षण अनुसंधान में पार्थेनियम जैवभार के सुरक्षित एवं लाभकारी उपयोग के साथ-साथ जैविक और प्राकृतिक कृषि प्रणालियों में हरी खाद, जीवित मल्च और कम्पोस्ट के रूप में इसके संभावित उपयोग के बारे में भी जागरूक किया गया।

इसके बाद एक संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने विचार साझा किए और विशेषज्ञों के समक्ष प्रश्न रखे। कार्यक्रम का समापन आभार ज्ञापन के साथ हुआ, जिसके बाद सुरक्षा संबंधी सभी आवश्यक सावधानियों के साथ विद्यालय के आसपास उग रहे पार्थेनियम पौधों का भौतिक रूप से उन्मूलन किया गया।
संस्थान के तकनीकी, वैज्ञानिक और परियोजना कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी एवं सहयोग से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। संपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन मृदा विज्ञान एवं कृषि विज्ञान प्रभाग के प्रमुख तथा संस्थान के कार्यवाहक निदेशक के मार्गदर्शन में किया गया।
(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून)







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