16 जुलाई, 2026, गोवा
भाकृअनुप-केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-सीसीएआरआई), गोवा, ने आज ओल्ड गोवा में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) का 98वां स्थापना दिवस का आयोजन किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए गोवा सरकार के लोक निर्माण विभाग (PWD), विधिक माप विज्ञान तथा कैप्टन ऑफ पोर्ट्स मंत्री श्री दिगंबर कामत ने भारतीय कृषि में पिछले 97 वर्षों के दौरान भाकृअनुप के उत्कृष्ट योगदान के लिए बधाई दी। उन्होंने युवाओं से कृषि को व्यवसाय के रूप में अपनाने और खेती की विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भाकृअनुप के अनुसंधान और तकनीकी नवाचारों का केन्द्र बिंदु छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका में सुधार होना चाहिए। विकसित भारत @2047 की परिकल्पना तथा वर्ष 2037 तक विकसित गोवा के लिए गोवा सरकार की प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों को केवल एक मजबूत, प्रगतिशील और सतत कृषि क्षेत्र के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है।
गोवा के कुंबारजुआ निर्वाचन क्षेत्र के विधायक एवं विशिष्ट अतिथि श्री राजेश फलदेसाई ने कृषि अनुसंधान और शिक्षा के माध्यम से गोवा के कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने तथा राज्य की राष्ट्रीय पहचान को बढ़ाने में भाकृअनुप की भूमिका की सराहना की।
उन्होंने कहा कि गोवा में कृषि एवं पशुपालन महाविद्यालय की स्थापना से युवाओं को कृषि और कृषि उद्यमिता अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने किसानों और युवाओं से खेती को अपनाने तथा सतत भविष्य के लिए गोवा और देश को अधिक हरित बनाने की अपील भी की।
गोवा उच्च शिक्षा निगम के अध्यक्ष एवं विशिष्ट अतिथि श्री गोविंद परवटकर ने खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए स्थानीय सब्जी उत्पादन बढ़ाने और गोवा की खाजन भूमि की उत्पादकता में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया।
भूमि परिवर्तन के कारण कृषि भूमि में लगातार हो रही कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कृषि भूमि की सुरक्षा तथा जैविक खेती को बढ़ावा देने के महत्व को रेखांकित किया, ताकि किसानों को प्रीमियम मूल्य प्राप्त हो सके और साथ ही सतत कृषि विकास सुनिश्चित किया जा सके।
भाकृअनुप-सीसीएआरआई, गोवा के निदेशक, डॉ. परवीन कुमार ने विज्ञान-आधारित कृषि नवाचारों के माध्यम से भारत को खाद्यान्न की कमी वाले देश से खाद्यान्न अधिशेष राष्ट्र में परिवर्तित करने में आईसीएआर की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पिछले 75 वर्षों में भारत की जनसंख्या 4.1 गुना बढ़ी है, जबकि खाद्यान्न उत्पादन में 7.4 गुना वृद्धि हुई है। इसका श्रेय उन्नत फसल किस्मों, आधुनिक प्रौद्योगिकियों, यंत्रीकरण तथा प्रभावी अनुसंधान-विस्तार प्रणालियों को जाता है, जिन्होंने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और सतत कृषि विकास सुनिश्चित किया है।

वरिष्ठ अधिकारियों ने संस्थान की गौरवशाली यात्रा प्रस्तुत करते हुए तटीय कृषि अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास में उसके अग्रणी योगदानों को रेखांकित किया। उन्होंने जलवायु-सहिष्णु प्रौद्योगिकियों, तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के सतत प्रबंधन तथा किसान-केन्द्रित नवाचारों के विकास में संस्थान की उपलब्धियों को प्रदर्शित किया, जिन्होंने तटीय क्षेत्र में कृषि और ग्रामीण आजीविका को उल्लेखनीय रूप से सशक्त बनाया है।
संस्थान की अभिनव प्रौद्योगिकियों और उत्पादों को प्रदर्शित करने वाली एक प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया, जिसने गणमान्य व्यक्तियों, किसानों, युवाओं तथा अन्य प्रतिभागियों को संस्थान के अनुसंधान-आधारित नवाचारों को निकट से देखने और उनसे संवाद करने का एक विशेष अवसर प्रदान किया।
इस समारोह में 200 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें 100 से अधिक किसान और महिला किसान शामिल थीं।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोवा)







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