5 मई, 2026, बेंगलुरु
डॉ. एम. एल. जाट, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने आज येलहंका परिसर स्थित भाकृअनुप-राष्ट्रीय कृषि कीट संसाधन ब्यूरो का दौरा किया। इस अवसर पर उनके साथ डॉ. डी.के. यादव, उप-महानिदेशक (फसल विज्ञान), भाकृअनुप, भी उपस्थित थे।
अपने संबोधन में डॉ. जाट ने संस्थान के महत्वपूर्ण वैज्ञानिक योगदानों की सराहना की तथा जोधपुर में आयोजित मंत्रालय की क्षेत्रीय बैठक (पश्चिम क्षेत्र) के दौरान एक किसान द्वारा साझा किए गए अनुभव का उल्लेख किया, जिसमें किसानों के समर्थन में भाकृअनुप-राष्ट्रीय कृषि कीट संसाधन ब्यूरो की भूमिका की विशेष प्रशंसा की गई थी। उन्होंने ‘एग्रीकल्चर फॉर हेल्थ’ कार्यक्रम—जो भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद तथा भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के बीच एक सहयोगात्मक पहल है—जैसी आगामी राष्ट्रीय पहलों में संस्थान की संभावित भूमिका तथा विकसित भारत के दृष्टिकोण के साथ इसके सामंजस्य को रेखांकित किया। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों से निरंतर प्राप्त फीडबैक, भाकृअनुप में मांग-आधारित अनुसंधान को दिशा देने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
दौरे के दौरान डॉ. जाट को संस्थान की प्रमुख गतिविधियों एवं सुविधाओं की जानकारी दी गई, जिनमें बटरफ्लाई गार्डन भी शामिल था। इस अवसर पर उन्होंने स्मृति स्वरूप एक पौधा भी लगाया। उन्होंने संस्थान के प्रयोगशाला परिसर के ऊर्ध्वाधर विस्तार का उद्घाटन भी किया, जो अनुसंधान अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम में संस्थान–उद्योग–किसान संवाद बैठक तथा भाकृअनुप-राष्ट्रीय कृषि कीट संसाधन ब्यूरो की प्रौद्योगिकियों पर आधारित प्रदर्शनी भी आयोजित की गई।
डॉ. डी.के. यादव ने अपने संबोधन में फसल सुरक्षा अनुसंधान को और अधिक मजबूत करने तथा प्रयोगशाला आधारित नवाचारों को खेत-स्तर पर लागू करने के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने उन्नत प्रयोगशाला सुविधाओं की स्थापना के लिए संस्थान को बधाई देते हुए कहा कि इससे संस्थान की वैज्ञानिक क्षमता और पहुँच में और अधिक वृद्धि होगी।
इससे पूर्व डॉ. एस.एन. सुशील, निदेशक, भाकृअनुप-राष्ट्रीय कृषि कीट संसाधन ब्यूरो ने संस्थान की गतिविधियों, उपलब्धियों तथा भविष्य की कार्ययोजना का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में विभिन्न भाकृअनुप संस्थानों के निदेशक एवं केन्द्र प्रभारी भी उपस्थित रहे। इनमें भाकृअनुप-भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, भाकृअनुप-राष्ट्रीय पशु पोषण एवं शरीर क्रिया विज्ञान संस्थान, भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान, भाकृअनुप-राष्ट्रीय पशु चिकित्सा महामारी विज्ञान संस्थान एवं रोग सूचना विज्ञान तथा भाकृअनुप-राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग नियोजन ब्यूरो सहित अन्य संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल थे।
किसानों ने अपने क्षेत्रीय अनुभव तथा सुझाव साझा किया, जबकि उद्योग प्रतिनिधियों ने संस्थान द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों के विस्तार एवं व्यवसायीकरण की संभावनाओं पर चर्चा की।
यह दौरा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की अनुवादात्मक अनुसंधान को बढ़ावा देने, हितधारकों के साथ साझेदारी को मजबूत करने तथा किसानों के लाभ के लिए नवाचारी कृषि प्रौद्योगिकियों के त्वरित प्रसार के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कार्यक्रम में लगभग 75 किसानों एवं 10 उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप-राष्ट्रीय कृषि कीट संसाधन ब्यूरो)







फेसबुक पर लाइक करें
यूट्यूब पर सदस्यता लें
X पर फॉलो करना X
इंस्टाग्राम पर लाइक करें