21 अगस्त, 2026, बैरकपुर
भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर ने 17–21 अगस्त, 2026 तक ओडिशा सरकार के मत्स्य विभाग के अधिकारियों के लिए “मत्स्य पालन में जलीय जंतु स्वास्थ्य एवं रोग प्रबंधन” विषय पर पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित कर ओडिशा के अंतर्देशीय मत्स्य क्षेत्र में मछली स्वास्थ्य प्रबंधन एवं रोग नियंत्रण क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
कार्यक्रम में ओडिशा के 14 जिलों—जाजपुर, कालाहांडी, नयागढ़, बालासोर, भद्रक, मयूरभंज, क्योंझर, अंगुल, झारसुगुड़ा, गंजाम, कोरापुट, पुरी, संबलपुर और बोलांगीर—का प्रतिनिधित्व करने वाले 20 सहायक मत्स्य अधिकारी (एएफएस) शामिल हुए, जिनमें 11 महिला अधिकारी थीं। यह कार्यक्रम क्षेत्र स्तर पर कार्यरत मत्स्य अधिकारियों की पेशेवर आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया था, जिसमें व्यावहारिक कौशल, वैज्ञानिक निदान और प्रौद्योगिकी-सक्षम रोग निगरानी पर विशेष जोर दिया गया।
कक्षा में सीखने से लेकर क्षेत्र स्तर पर अनुप्रयोग तक
प्रशिक्षण में 11 कक्षा सत्र, दो व्यावहारिक प्रयोगशाला अभ्यास और दो क्षेत्रीय भ्रमण शामिल थे, जिससे प्रतिभागियों को जलीय जंतु स्वास्थ्य प्रबंधन की समग्र समझ प्राप्त हुई। प्रतिभागियों को सामान्य मछली रोगों की पहचान, रोग के लक्षणों और निदान प्रक्रियाओं, जिसमें माइक्रोस्कोपिक जांच, PCR, qPCR और जल गुणवत्ता का आकलन शामिल है, का प्रशिक्षण दिया गया। प्रयोगशाला सत्रों में प्रतिभागियों को नमूना संग्रह, रोगजनकों की पहचान और निदान किट के उपयोग का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। इससे क्षेत्र स्तर पर मछली किसानों को समय पर तकनीकी सहायता प्रदान करने की उनकी क्षमता मजबूत हुई।
कार्यक्रम में अंतर्देशीय मत्स्य प्रबंधन, मृदा एवं जल गुणवत्ता विश्लेषण, बाड़ों में रोग प्रबंधन, पेन कल्चर तकनीक और रोग निगरानी में GIS के अनुप्रयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों को भी शामिल किया गया। पूर्वी कोलकाता आर्द्रभूमि का विशेष क्षेत्रीय भ्रमण सीखने के अनुभव को और समृद्ध करने वाला रहा। इससे प्रतिभागियों को एक जटिल आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र में मत्स्य पालन और जलीय संसाधन प्रबंधन की प्रथाओं को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर मिला।
प्रौद्योगिकी ने केंद्र स्तर पर बनाई जगह
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण तालाब की निगरानी और रोग सर्वेक्षण के लिए ड्रोन प्रौद्योगिकी का प्रदर्शन था। इस प्रदर्शन में बताया गया कि उभरती डिजिटल प्रौद्योगिकियां जलीय प्रणालियों के त्वरित आकलन, मछली स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों की निगरानी और मत्स्य प्रबंधन में अधिक प्रभावी निर्णय लेने में किस प्रकार सहायता कर सकती हैं। जीआईएस, आणविक निदान (Molecular Diagnostics) और ड्रोन आधारित निगरानी को प्रशिक्षण में शामिल करना भाकृअनुप-सिफरी के उस फोकस को दर्शाता है, जिसके तहत क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं को मछली स्वास्थ्य से जुड़ी लगातार जटिल होती चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया जा रहा है।
अंतिम छोर तक सहायता प्रणाली को मजबूत करना
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए डॉ. अशोक कुमार पात्रा, कुलपति, विधान चंद्र कृषि विश्वविद्यालय (बीसीकेवी) ने टिकाऊ मत्स्य विकास के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने राज्यों की क्षमता निर्माण और वैज्ञानिक एवं तकनीकी हस्तक्षेपों के माध्यम से अंतर्देशीय मत्स्य क्षेत्र को मजबूत करने के लिए भाकृअनुप-सिफरी के प्रयासों की सराहना की।
डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-सिफरी ने कहा कि क्षेत्र स्तर पर कार्यरत मत्स्य अधिकारियों की व्यावहारिक क्षमताओं का निर्माण, मछुआरों तक तकनीकी सेवाओं की अंतिम छोर तक प्रभावी पहुंच को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने मछली स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए विज्ञान आधारित, निवारक और प्रौद्योगिकी संचालित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि मछली उत्पादकता और मत्स्य किसानों की लाभप्रदता में सुधार किया जा सके। डॉ. डे ने कहा कि टिकाऊ अंतर्देशीय मत्स्य पालन और मछुआरों की आजीविका में वृद्धि के लिए प्रभावी मछली स्वास्थ्य प्रबंधन आवश्यक है।
प्रतिभागियों की सकारात्मक प्रतिक्रिया
कार्यक्रम की प्रभावशीलता और क्षेत्रीय प्रासंगिकता प्रतिभागियों से प्राप्त प्रतिक्रिया में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दी। 90 प्रतिशत प्रशिक्षुओं ने प्रशिक्षण को अत्यधिक प्रभावी और अपनी क्षेत्रीय जिम्मेदारियों के लिए प्रासंगिक बताया। इससे वैज्ञानिक ज्ञान, प्रयोगशाला अभ्यास, क्षेत्रीय अनुभव और उभरती प्रौद्योगिकियों के संयोजन के प्रति प्रतिभागियों की मजबूत सराहना का संकेत मिला।
स्वस्थ और अधिक टिकाऊ अंतर्देशीय मत्स्य पालन की दिशा में
प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन तकनीकी रूप से सक्षम मत्स्य अधिकारियों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह नेटवर्क स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समय रहते पता लगाने, वैज्ञानिक निदान में सहायता करने और उचित रोग प्रबंधन हस्तक्षेपों को प्रभावी ढंग से लागू करने में सक्षम होगा।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर)







फेसबुक पर लाइक करें
यूट्यूब पर सदस्यता लें
X पर फॉलो करना X
इंस्टाग्राम पर लाइक करें