22 अगस्त, 2026, हैदराबाद
देशव्यापी 21वें पार्थेनियम जागरूकता सप्ताह – 2026, जो 16 से 22 अगस्त, 2026 तक मनाया गया, के तहत भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद, के कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके), रंगा रेड्डी ने केवीके फार्म, भुवन रिसर्च फार्म, हयातनगर, हैदराबाद तथा केवीके द्वारा गोद लिए गए गांवों—गड्डामल्लैया गुडा, याचाराम मंडल, महेश्वरम मंडल और चित्तापुर गांव—में पार्थेनियम के प्रति जागरूकता एवं उन्मूलन अभियान आयोजित किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों और ग्रामीण समुदायों में पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस (Parthenium hysterophorus) के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता पैदा करना तथा इसकी शीघ्र पहचान, सुरक्षित निष्कासन और समेकित प्रबंधन को बढ़ावा देना था।
कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञ, तकनीकी अधिकारी, फार्म कर्मचारी, संबंधित विभागों के अधिकारी, आरएडब्ल्यूई विद्यार्थी तथा किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को फसलों की उत्पादकता, पशुधन, मानव स्वास्थ्य, जैव विविधता और पर्यावरण पर पार्थेनियम के प्रतिकूल प्रभावों के बारे में जानकारी दी गई।
पार्थेनियम में फूल आने और बीज बनने से रोकने, खेत की मेड़ों एवं सीमाओं को खरपतवार मुक्त रखने तथा समय पर खरपतवार प्रबंधन उपाय अपनाने के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने केवीके फार्म परिसर और आसपास के क्षेत्रों से पार्थेनियम के पौधों को हटाने एवं उनके प्रबंधन में सक्रिय रूप से भाग लिया।
प्रतिभागियों को समेकित खरपतवार प्रबंधन (आईडब्ल्यूएम) के बारे में भी जानकारी दी गई। आईडब्ल्यूएम में प्रभावी, किफायती और टिकाऊ खरपतवार प्रबंधन के लिए विभिन्न खरपतवार नियंत्रण विधियों का समन्वित रूप से उपयोग किया जाता है।
इसके अंतर्गत प्रमुख उपायों में स्वच्छ एवं खरपतवार-मुक्त बीज का उपयोग जैसी निवारक विधियां; हाथ से निराई, गुड़ाई और खरपतवार उखाड़ना जैसी यांत्रिक विधियां; समय पर बुवाई और फसल चक्र जैसी सांस्कृतिक विधियां; उपयुक्त एवं अनुशंसित शाकनाशियों का प्रयोग जैसी रासायनिक विधियां; तथा पार्थेनियम के प्राकृतिक शत्रुओं अथवा जैव-एजेंटों के उपयोग जैसी जैविक विधियां शामिल हैं।

कार्यक्रम के समापन पर किसानों, विद्यार्थियों और ग्रामीण समुदायों से पार्थेनियम के प्रबंधन में सक्रिय रूप से भाग लेने तथा इस आक्रामक खरपतवार के हानिकारक प्रभावों के बारे में व्यापक स्तर पर जागरूकता फैलाने की अपील की गई।
जागरूकता एवं क्षेत्रीय गतिविधियों में कुल 282 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
(स्रोत:भाकृअनुप–केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)







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