28 सितंबर, 2026, बैरकपुर, पर्थ
भाकृअनुप–केन्द्रीय अंतर्देशीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर और कर्टिन विश्वविद्यालय, ऑस्ट्रेलिया ने मात्स्यिकी अनुसंधान, उन्नत आणविक प्रौद्योगिकियों, क्षमता निर्माण तथा जलीय पारिस्थितिकी तंत्र निगरानी में रणनीतिक अंतरराष्ट्रीय साझेदारी स्थापित करने के अवसरों की संभावनाएं तलाशी। शैक्षणिक, वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग के पारस्परिक रूप से लाभकारी क्षेत्रों की पहचान करने के लिए दोनों संस्थानों के बीच 28 सितंबर 2026 को एक ऑनलाइन संवाद बैठक आयोजित की गई।
डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईएफआरआई, ने कर्टिन विश्वविद्यालय के प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और संस्थान के अधिदेश, वैज्ञानिक क्षमताओं तथा अंतर्देशीय मात्स्यिकी एवं जलीय विज्ञान में इसके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने एक दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी की परिकल्पना की, जो वैज्ञानिक नवाचार को आगे बढ़ाने के लिए कर्टिन विश्वविद्यालय की उन्नत आणविक प्रौद्योगिकियों और जैव सूचना विज्ञान विशेषज्ञता को आईसीएआर-सीआईएफआरआई के व्यापक जलीय अनुसंधान नेटवर्क के साथ एकीकृत करेगी। डॉ. डे ने जोर दिया कि ईडीएनए, डीएनए मेटाबारकोडिंग और उन्नत अनुक्रमण में सहयोगात्मक अनुसंधान जलीय जैव विविधता आकलन में परिवर्तन ला सकता है, पारिस्थितिकी तंत्र स्वास्थ्य निगरानी को सुदृढ़ कर सकता है और टिकाऊ मात्स्यिकी प्रबंधन, जलवायु अनुकूलन क्षमता तथा बेहतर आजीविका के लिए विज्ञान-आधारित समाधान प्रदान कर सकता है, जिससे जिम्मेदार सहयोग के माध्यम से मात्स्यिकी विज्ञान की सीमाओं को आगे बढ़ाया जा सकेगा।
बैठक में भाकृअनुप-सीआईएफआरआई के एईबी प्रभाग की प्रमुख अनुसंधान गतिविधियों, महत्वपूर्ण निष्कर्षों, उपलब्धियों और भावी प्राथमिकताओं पर प्रकाश डाला गया। संयुक्त अनुसंधान और तकनीकी प्रगति पर ध्यान केन्द्रित करते हुए सहयोग के संभावित क्षेत्रों पर चर्चा की गई।
कर्टिन विश्वविद्यालय ने अनुक्रमण और जैव सूचना विज्ञान में अपनी विशेषज्ञता पर प्रकाश डाला और भाकृअनुप-सीआईएफआरआई के साथ सहयोगात्मक अनुसंधान को समर्थन देने में रुचि व्यक्त की। चर्चा में जैव विविधता आकलन और पर्यावरणीय निगरानी को सुदृढ़ करने के लिए भारत के विविध पारिस्थितिकी तंत्रों में जलीय जीवों की डीएनए मेटाबारकोडिंग प्रोफाइल विकसित करना शामिल था। कर्टिन विश्वविद्यालय में विशेष अनुसंधान सुविधाओं के संभावित उपयोग और अनुक्रमण एवं विश्लेषण के लिए जैविक नमूनों को ऑस्ट्रेलिया भेजने पर भी चर्चा की गई, जो पारस्परिक सहमति, संस्थागत अनुमोदनों और जहां आवश्यक हो, सामग्री हस्तांतरण समझौतों सहित लागू नियामक आवश्यकताओं के अधीन होगा।
बैठक में जलीय पारिस्थितिकी तंत्र की निगरानी और मानवजनित गतिविधियों के प्रभावों के आकलन के लिए मेटाबारकोडिंग-आधारित दृष्टिकोणों की क्षमता पर भी प्रकाश डाला गया। व्यवस्थित आणविक प्रोफाइलिंग जलीय पारिस्थितिकी तंत्र निगरानी को सुदृढ़ कर सकती है और पारिस्थितिक परिवर्तनों का त्वरित, विज्ञान-आधारित पता लगाने में सक्षम बना सकती है।
निरंतर सहयोग की आवश्यकता पर जोर देते हुए प्रतिभागियों ने दोनों संस्थानों के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) विकसित करने का प्रस्ताव रखा। प्रस्तावित एमओयू पारस्परिक रूप से सहमत शर्तों के तहत विशेष अनुसंधान सुविधाओं और विशेषज्ञता तक पहुंच, सहयोगात्मक प्रकाशनों, संयुक्त अनुसंधान पहलों तथा वैज्ञानिक और नीतिगत परिणामों के विकास को सुगम बना सकता है।

चर्चाओं में संभावित सहयोगात्मक गतिविधियों की एक विस्तृत श्रृंखला भी शामिल थी, जिनमें वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, तकनीकी कर्मियों और छात्रों का आदान-प्रदान; अल्पकालिक और दीर्घकालिक अनुसंधान दौरे; विशेष प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम; संयुक्त अनुसंधान प्रकाशन; तथा प्रयोगशाला सुविधाओं, विश्लेषणात्मक प्लेटफॉर्मों, फील्ड साइटों, अनुसंधान प्रोटोकॉल, डेटाबेस और तकनीकी विशेषज्ञता को साझा करना शामिल था। दोनों संस्थानों ने लागू संस्थागत और नियामक आवश्यकताओं के अनुरूप जैविक एवं पर्यावरणीय नमूनों और अनुसंधान डेटा को साझा करने के तंत्रों की संभावनाएं तलाशी।
चर्चा का एक अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्र भारतीय, ऑस्ट्रेलियाई और अंतरराष्ट्रीय वित्तपोषण एजेंसियों के समक्ष अनुसंधान प्रस्तावों का संयुक्त विकास और प्रस्तुतीकरण था, विशेष रूप से जलीय जैव विविधता, पारिस्थितिकी तंत्र स्वास्थ्य, आणविक निगरानी, मात्स्यिकी प्रबंधन और जलवायु-अनुकूल जलीय प्रणालियों जैसे उभरते क्षेत्रों में। निदान, जैव प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों, सॉफ्टवेयर और डेटाबेस सहित प्रौद्योगिकी विकास, सत्यापन, हस्तांतरण और व्यावसायीकरण में संयुक्त पहलों को भी सहयोग के आशाजनक अवसरों के रूप में चिह्नित किया गया।
संवाद का एक प्रमुख केंद्र जलीय पारिस्थितिकी तंत्रों के लक्षण-वर्णन और निगरानी के लिए पर्यावरणीय डीएनए (ईडीएनए), डीएनए मेटाबारकोडिंग, अनुक्रमण और जैव सूचना विज्ञान का अनुप्रयोग था।
बैठक का समापन दोनों संस्थानों द्वारा सहयोग के चिह्नित क्षेत्रों को आगे बढ़ाने और निरंतर शैक्षणिक, वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग के लिए एमओयू विकसित करने की संभावनाएं तलाशने में गहरी रुचि व्यक्त करने के साथ हुआ, जो संबंधित संस्थानों के सक्षम प्राधिकारियों के आवश्यक अनुमोदनों के अधीन होगा।
प्रस्तावित साझेदारी से उन्नत आणविक प्रौद्योगिकियों को भारत के व्यापक अंतर्देशीय जलीय संसाधनों के साथ एकीकृत करने, जैव विविधता निगरानी और पारिस्थितिकी तंत्र आकलन को सुदृढ़ करने तथा मात्स्यिकी और जलीय विज्ञान में सहयोगात्मक नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत मंच उपलब्ध होने की उम्मीद है।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय अंतर्देशीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर)







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