भाकृअनुप-क्रिडा, हैदराबाद ने 42वां स्थापना दिवस का किया आयोजन

भाकृअनुप-क्रिडा, हैदराबाद ने 42वां स्थापना दिवस का किया आयोजन

12 अप्रैल, 2026, हैदराबाद

भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-क्रिडा) ने हैदराबाद में बड़े उत्साह के साथ अपना 42वां स्थापना दिवस का आयोजन किया। इस अवसर पर भारत में शुष्कभूमि कृषि के विकास में संस्थान के निरंतर योगदान को रेखांकित किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, डॉ. हिमांशु पाठक, महानिदेशक, अंतरराष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (आईसीआरआएसएटी) रहे।

ICAR-CRIDA, Hyderabad Celebrates 42nd Foundation Day

विशिष्ट अतिथियों के रूप में डॉ. वाई.एस. रामाकृष्ण, पूर्व निदेशक, भाकृअनुप-क्रिडा, डॉ. बी. वेंकटेश्वरलु, डॉ. के. पी. आर. विट्ठल (पूर्व निदेशक, भाकृअनुप-एनआईएएसएम) तथा डॉ. एम. ज्ञान प्रकाश, कुलपति, पी.वी. नरसिम्हा राव तेलंगाना पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय, इस अवसर पर उपस्थित रहे।

डॉ. चेरुकमल्ली श्रीनिवास राव, निदेशक, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), ने भी वर्चुअल माध्यम से सभा को संबोधित किया।

कार्यक्रम में संस्थान के कर्मचारियों, एआईसीआरपीडीए और एआईसीआरपीएएम के पूर्व परियोजना समन्वयकों, देश के विभिन्न भागों से आए किसानों तथा आईएआरआई मेगा यूनिवर्सिटी हैदराबाद हब के विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की।

अपने स्वागत संबोधन में डॉ. वी.के. सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-क्रिडा, ने वर्षा आधारित कृषि को आगे बढ़ाने में संस्थान की महत्वपूर्ण उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने पूर्व एवं वर्तमान कर्मचारियों के अमूल्य योगदान को सराहा तथा शुष्क भूमि कृषि प्रणालियों के लिए अनुसंधान, विस्तार एवं प्रौद्योगिकी प्रसार को मजबूत करने की भविष्य की रणनीतियों की जानकारी दी।

कार्यक्रम के दौरान आमंत्रित अतिथियों ने अपने बहुमूल्य विचार साझा किया। डॉ. वाई.एस. रामाकृष्ण ने मृदा एवं जल ग्रहण प्रबंधन में संस्थान के कार्यों की प्रशंसा की।

डॉ. के.पी.आर. विट्ठल ने संस्थान की स्थापना से अब तक की यात्रा और उपलब्धियों को याद किया, जबकि डॉ. बी. वेंकटेश्वरलु ने निक्रा परियोजना के अंतर्गत योगदानों की सराहना करते हुए शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसी डिजिटल तकनीकों के समावेशन पर बल दिया।

डॉ. एम. ज्ञान प्रकाश ने पशु आहार की पोषण गुणवत्ता बढ़ाने के महत्व पर जोर देते हुए वैज्ञानिकों से इस महत्वपूर्ण क्षेत्र पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।

डॉ. चेरुकमल्ली श्रीनिवास राव ने भाकृअनुप-क्रिडा के साथ अपने जुड़ाव को साझा करते हुए शुष्क भूमि कृषि को सुदृढ़ बनाने में इसकी भूमिका की सराहना की और युवा वैज्ञानिकों को किसानों के हित में अपने प्रयास तेज करने के लिए प्रेरित किया।

अपने संबोधन में डॉ. हिमांशु पाठक ने वर्षा आधारित क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा और कृषि लाभप्रदता बढ़ाने के लिए समेकित अनुसंधान, प्रभावी विस्तार सेवाओं तथा सहभागितापूर्ण दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने उभरती चुनौतियों का समाधान करने तथा उत्पादकता, लाभप्रदता और स्थिरता बढ़ाने हेतु सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।

ICAR-CRIDA, Hyderabad Celebrates 42nd Foundation Day

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण देशभर के नवाचारी किसानों का सम्मान रहा, जिन्हें नवीन कृषि पद्धतियों के माध्यम से उत्पादकता और जलवायु अनुकूलन क्षमता बढ़ाने में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। साथ ही संस्थान के कर्मचारियों को समर्पण और उत्कृष्ट सेवा के लिए श्रेष्ठ कर्मचारी पुरस्कार भी प्रदान किए गए।

इस अवसर पर संस्थान की कई प्रकाशन सामग्री भी जारी की गई, जिनमें आईसीएआर-क्रिडा के नवीनतम अनुसंधान परिणामों और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया। इससे शुष्क भूमि कृषि को अधिक लचीला और टिकाऊ बनाने के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता पुनः स्पष्ट हुई।

(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)

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