20 अगस्त, 2026, अविकानगर, राजस्थान
राजस्थान, गुजरात और मथुरा (उत्तर प्रदेश) स्थित ICAR संस्थानों की चौथी जोनल बैठक ICAR-केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-सीएसडब्ल्यूआरआई), अविकानगर, में डॉ. एम.एल. जाट, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में प्रशासनिक और वित्तीय मामलों की व्यापक समीक्षा के साथ-साथ भाग लेने वाले संस्थानों की भविष्य की रणनीतियों और प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया गया।
जोनल बैठक से पहले डॉ. एम.एल. जाट ने अविकानगर संस्थान में आयोजित ‘चौपाल पर चर्चा’ कार्यक्रम के दौरान राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के किसानों से संवाद किया। किसानों ने कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में अपने अनुभव, चुनौतियां, नवाचार और सफलता की कहानियां साझा कीं। इसके अलावा, उन्होंने भाकृअनुप द्वारा संचालित विभिन्न किसान-केंद्रित पहलों के संबंध में अपने विचार भी प्रस्तुत किए।

इस अवसर पर श्री ज्ञानेंद्र देव त्रिपाठी, अपर सचिव, डेयर एवं सचिव, भाकृअनुप; डॉ. राघवेंद्र भट्टा, उप महानिदेशक (पशु विज्ञान), भाकृअनुप; डॉ. अरुण कुमार तोमर, निदेशक, भाकृअनुप-सीएसडब्ल्यूआरआई, अविकानगर तथा विभिन्न भाकृअनुप संस्थानों के निदेशक और प्रशासनिक दल भी उपस्थित रहे।
किसानों के साथ संवाद करते हुए डॉ. जाट ने उन्हें आश्वासन दिया कि ICAR संस्थानों द्वारा विकसित आधुनिक तकनीकों और उच्च गुणवत्ता वाले बीजों को भाकृअनुप-सीएसडब्ल्यूआरआई, अविकानगर के माध्यम से सीधे किसानों तक उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने किसानों को यह सुनिश्चित करने के लिए अनुसंधान से खेत और खेत से बाजार तक की पूरी श्रृंखला को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया कि वैज्ञानिक प्रगति किसानों के लिए ठोस लाभ में परिवर्तित हो।
महानिदेशक ने रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने के महत्व पर भी जोर दिया और जैव उर्वरकों तथा प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने वाले किसानों की सराहना की।

संस्थान के पर्यावरण संरक्षण प्रयासों के तहत डॉ. जाट ने अविकानगर परिसर में पौधरोपण अभियान चलाया और जामुन, नीम, शहतूत तथा गूलर सहित 501 फलदार एवं चारा देने वाले पेड़ लगाए। पौधरोपण अभियान में संस्थान के कर्मचारियों, जोनल बैठक के प्रतिभागियों और स्थानीय विद्यालय के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अभियान ने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के संदेश को और मजबूत किया।
इसके बाद डॉ. जाट ने संस्थान के सेक्टर-12 का दौरा कर वहां विकसित पशुधन नस्लों और संबंधित गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने संस्थान की उन्नत नस्लों में अविषाण, अविकालिन, पाटनवाड़ी, मालपुरा और डुम्बा भेड़, साथ ही सिरोही बकरियों और ब्रॉयलर खरगोशों का अवलोकन किया।

महानिदेशक ने उन्नत पशुधन प्रौद्योगिकियों के विकास और प्रसार तथा देशभर के किसानों को लाभ पहुंचाने वाली गतिविधियों के संचालन के लिए संस्थान के प्रयासों की सराहना की। डॉ. अरुण कुमार तोमर, निदेशक, भाकृअनुप-सीएसडब्ल्यूआरआई, अविकानगर, ने उन्हें संस्थान की चल रही पहलों, उपलब्धियों और प्रगति के बारे में जानकारी दी।
चौथी जोनल बैठक में क्षेत्र के भाकृअनुप संस्थानों के प्रशासनिक और वित्तीय मामलों की विस्तृत समीक्षा की जा रही है। बैठक में राजस्थान के बीकानेर, जोधपुर, अजमेर, भरतपुर और अविकानगर; गुजरात के जूनागढ़ और आनंद तथा केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (सीआईआरजी), मथुरा स्थित भाकृअनुप संस्थानों के निदेशक और प्रशासनिक अधिकारी भाग ले रहे हैं। विचार-विमर्श का उद्देश्य संस्थागत प्रदर्शन की समीक्षा करना तथा अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास और किसान-केंद्रित पहलों के लिए भविष्य की रणनीतियों एवं प्राथमिकताओं को मजबूत करना है।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर)







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