भाकृअनुप-केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान ने फसल कटाई के बाद की मूल्य श्रृंखला के दौरान गुणवत्ता निगरानी हेतु जैव-आधारित बुद्धिमान संकेतकों का किया विकास

भाकृअनुप-केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान ने फसल कटाई के बाद की मूल्य श्रृंखला के दौरान गुणवत्ता निगरानी हेतु जैव-आधारित बुद्धिमान संकेतकों का किया विकास

कृषि उद्योग के तेजी से बदलते परिदृश्य में ताजे फल एवं सब्जियों की गुणवत्ता तथा ताजगी बनाए रखना एक निरंतर चुनौती बनी हुई है। खेत से भोजन की थाली तक की यात्रा में परिवहन, भंडारण की स्थिति तथा हैंडलिंग जैसी कई प्रक्रियाएँ शामिल होती हैं, जो फलों एवं सब्जियों की शेल्फ लाइफ और गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं। ताजगी की वास्तविक समय में निगरानी सुनिश्चित करने के महत्व को ध्यान में रखते हुए, शोधकर्ताओं ने एक अभिनव समाधान विकसित किया है—एक जैव-आधारित पीएच (pH) - संवेदनशील संकेतक, जिसे विशेष रूप से ताजे उत्पादों की गुणवत्ता में होने वाले परिवर्तनों का पता लगाने के लिए तैयार किया गया है।

ICAR-CIAE, Bhopal Develops Bio-Based Intelligent Indicators for Quality Monitoring During Post-Harvest Value Chain

यह संकेतक इस सिद्धांत पर आधारित है कि pH स्तर कई खाद्य उत्पादों की ताजगी का प्रमुख संकेतक होता है। जैसे-जैसे फल और सब्जियाँ प्राकृतिक जैव-क्रियाओं तथा पर्यावरणीय कारकों से प्रभावित होती हैं, उनके pH स्तर में सूक्ष्म परिवर्तन होते हैं। इसी विशेषता का उपयोग करते हुए यह जैव-आधारित pH संकेतक गुणवत्ता मूल्यांकन का तेज़ एवं विश्वसनीय माध्यम प्रदान करता है। इस संकेतक में प्राकृतिक एंथोसाइनिन आधारित रंग, जो काली गाजर के छिलके से प्राप्त किया गया है, चुकंदर के छिलके से प्राप्त बेटालेन पिगमेंट तथा हल्दी की गांठों से प्राप्त करक्यूमिन पिगमेंट का उपयोग किया गया है। इन जैव-आधारित रंगों को एक कागज़ी आधार पर कोटिंग करके 30 डिग्री सेल्सियस तापमान पर सुखाया जाता है।

यह संकेतक एक छोटे और उपयोग में आसान स्ट्रिप के रूप में तैयार किया गया है, जिसे आसानी से पैकेजिंग में लगाया जा सकता है। खाद्य उत्पादों से निकलने वाले वाष्पशील तत्वों के संपर्क में आने पर संकेतक का रंग बदल जाता है। यह दृश्य संकेत उपभोक्ताओं एवं विक्रेताओं को उत्पाद की ताजगी की स्थिति के बारे में तुरंत जानकारी देता है। इन संकेतकों के माध्यम से उपभोक्ता अपने खाद्य उत्पादों की खरीद के संबंध में बेहतर निर्णय ले सकते हैं। संकेतक के रंग को देखकर यह आसानी से समझा जा सकता है कि उत्पाद पूरी तरह ताजा है या उसकी शेल्फ लाइफ समाप्ति के निकट है।

ICAR-CIAE, Bhopal Develops Bio-Based Intelligent Indicators for Quality Monitoring During Post-Harvest Value Chain

5° सेल्सियस तापमान पर ताजे मशरूम के भंडारण के दौरान विकसित संकेतक के रंग परिवर्तन का अध्ययन किया गया। प्रारंभिक दिन (दिन 0) पर मशरूम का pH 6.25 था और संकेतक का रंग लैवेंडर दिखाई दिया, जो पूर्ण ताजगी का संकेत था। आठवें दिन pH 7.83 हो गया तथा संकेतक का रंग बैंगनी (वायलेट) हो गया, जो अभी भी ताजगी को दर्शाता था। बारहवें दिन pH 8.45 से अधिक हो गया और संकेतक का रंग धूल-नीला (डस्टी ब्लू) हो गया, जो खराब होने का संकेत था।

चीकू (सपोटा) के लिए परिवेशीय तापमान पर रंग परिवर्तन का परीक्षण किया गया। पहले दिन (pH 5.86) संकेतक का रंग हल्का पीला था, जो पूर्ण ताजगी को दर्शाता था। आठवें दिन (pH 6.24) रंग हल्का पीला ही बना रहा, जिससे स्वीकार्य ताजगी की पुष्टि हुई। सोलहवें दिन (pH 5.32) संकेतक हल्का गुलाबी हो गया, जो खराब होने का संकेत था। इस प्रकार संकेतक ने चीकू की ताजगी को रंग परिवर्तन के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया।

चुकंदर के छिलके पर आधारित संकेतक ने स्ट्रॉबेरी के परीक्षण में भी स्पष्ट रंग परिवर्तन दिखाए। कागज़ आधारित संकेतक का रंग भंडारण अवधि और फल के खराब होने के कारण pH में हुए परिवर्तनों से सीधे संबंधित पाया गया। इन स्पष्ट रंग परिवर्तनों ने ताजगी के स्तर को प्रभावी रूप से दर्शाया, जिससे यह संकेतक वास्तविक समय में स्ट्रॉबेरी की गुणवत्ता निगरानी के लिए एक सरल, पर्यावरण-अनुकूल और विश्वसनीय उपकरण सिद्ध हुआ।

चेरी, ब्लूबेरी और जामुन के लिए भी प्राकृतिक रंग-आधारित संकेतक प्रभावी पाए गए। इन संकेतकों ने भंडारण के दौरान pH में होने वाले परिवर्तनों के अनुसार स्पष्ट रंग परिवर्तन प्रदर्शित किए, जिससे ताजगी का विश्वसनीय दृश्य मूल्यांकन संभव हुआ और पर्यावरण-अनुकूल बुद्धिमान पैकेजिंग अनुप्रयोगों में उनकी संभावनाएँ उजागर हुईं।

ICAR-CIAE, Bhopal Develops Bio-Based Intelligent Indicators for Quality Monitoring During Post-Harvest Value Chain

जैव-आधारित पिगमेंट संकेतकों की स्थिरता उनके स्वरूप पर निर्भर पाई गई। पाउडर रूप में इनकी स्थिरता सबसे अधिक (लगभग 4 माह तक) रही, क्योंकि इसमें नमी कम होती है और अपघटन की संभावना घट जाती है। वहीं स्ट्रिप्स की स्थिरता लगभग 2.5 माह तक पाई गई।

जैव-आधारित पिगमेंट संकेतक कृषि अपशिष्ट का उपयोग करके कागज़ आधारित pH संकेतक स्ट्रिप्स तैयार करने का एक किफायती विकल्प प्रदान करते हैं। कच्चे माल की लागत बहुत कम है, जबकि निष्कर्षण प्रक्रिया मुख्य व्यय का हिस्सा है। विभिन्न स्रोतों से तैयार किए गए इन कुशल संकेतकों की अनुमानित उत्पादन लागत लगभग 0.75 रुपये से 1.5 रुपये प्रति स्ट्रिप पैकेट है।

(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान)

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