12 जून, 2026, मोतिहारी, बिहार
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय (आरपीसीएयू) के तत्वावधान में कृषि विज्ञान केन्द्र, पिपराकोठी में “खेत बचाओ अभियान, प्राकृतिक खेती एवं खरीफ अभियान 2026” विषय पर एक विशाल जिला स्तरीय सम्मेलन-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 4,238 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 3,160 पुरुष एवं 1,080 महिला किसान शामिल थे। इसके अलावा वैज्ञानिकों, प्रसार कर्मियों, नीति-निर्माताओं तथा जनप्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की।
राष्ट्रव्यापी खेत बचाओ अभियान 2026 के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, प्राकृतिक खेती, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन तथा जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना था। तकनीकी सत्रों में रासायनिक उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने तथा पर्यावरण-अनुकूल एवं संसाधन-कुशल प्रौद्योगिकियों के माध्यम से सतत कृषि प्रणालियों को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दिया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती के प्रमुख पहलुओं को शामिल किया गया, जिनमें हरी खाद एवं जैविक संशोधनों के माध्यम से मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, जीवामृत, बीजामृत एवं घनजीवामृत की तैयारी एवं उपयोग, एकीकृत पोषक तत्व एवं कीट प्रबंधन, फसल अवशेष पुनर्चक्रण तथा जलवायु-अनुकूल कृषि प्रौद्योगिकियां शामिल थीं। कार्यक्रम के दौरान चार प्रसार फोल्डरों का भी विमोचन किया गया।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राधा मोहन सिंह, सांसद, मोतिहारी; रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष; तथा भारत सरकार के पूर्व केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने कहा कि मृदा सतत कृषि और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा की आधारशिला है। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने, गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद, फसल अवशेष पुनर्चक्रण तथा जैव उर्वरकों के उपयोग को बढ़ाने और दीर्घकालिक मृदा उर्वरता के लिए मृदा कार्बनिक कार्बन एवं लाभकारी सूक्ष्मजीव गतिविधियों की पुनर्स्थापना पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया।
विशिष्ट अतिथि रामचंद्र प्रसाद, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार सरकार ने उभरती पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करने तथा भविष्य की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में जलवायु-अनुकूल एवं संसाधन-कुशल कृषि के महत्व पर प्रकाश डाला।
प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए डॉ. रत्नेश कुमार झा, निदेशक, प्रसार शिक्षा, आरपीसीएयू, पूसा ने कृषि विज्ञान केंद्रों की प्रौद्योगिकी प्रसार, किसान क्षमता निर्माण तथा कृषि अनुसंधान और खेत स्तर पर उसके अनुप्रयोग के बीच संबंधों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

डॉ. राघवेंद्र सिंह, निदेशक, भाकृअनुप–महात्मा गांधी एकीकृत कृषि अनुसंधान संस्थान, मोतिहारी ने उर्वरकों के संतुलित उपयोग, मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन तथा फसल प्रणालियों में दलहनी फसलों, हरी खाद एवं जैव उर्वरकों के समावेशन पर जोर दिया, जिससे मृदा उर्वरता, पोषक तत्व उपयोग दक्षता तथा कृषि लाभप्रदता में सुधार हो सके।
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रमुखों, भाकृअनुप संस्थानों, आरपीसीएयू, बिहार सरकार के कृषि विभाग के अधिकारियों तथा प्रसार कर्मियों ने भी भाग लिया।
यह कार्यक्रम आरपीसीएयू, पूसा के कुलपति के मार्गदर्शन में भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी) के सहयोग से आयोजित किया गया।
सम्मेलन का समापन मृदा स्वास्थ्य पुनर्स्थापना को सुदृढ़ करने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन को प्रोत्साहित करने तथा बिहार में दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता एवं किसानों की आजीविका में सुधार सुनिश्चित करने हेतु जलवायु-अनुकूल एवं सतत कृषि पद्धतियों को आगे बढ़ाने की सामूहिक शपथ के साथ हुआ।
(स्रोत: भाकृअनुप–महात्मा गांधी एकीकृत कृषि अनुसंधान संस्थान, मोतिहारी, बिहार)







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