22 अप्रैल, 2026, पुणे
भाकृअनुप–पुष्पकृषि अनुसंधान निदेशालय (डीएफआर), पुणे, ने आज विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर पुणे जिले की हवेली तहसील के माजरी बुद्रुक गांव एवं आसपास के क्षेत्रों के सजावटी नर्सरी संचालकों के बीच एक जनसंपर्क कार्यक्रम के माध्यम से इस दिवस का आयोजन किया। यह पहल उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर चलाए जा रहे गहन अभियान के अंतर्गत की गई, जिसका उद्देश्य नर्सरी प्रबंधन में टिकाऊ पद्धतियों को बढ़ावा देना था।
कार्यक्रम में वैज्ञानिकों की एक टीम ने सक्रिय भागीदारी की। टीम ने क्षेत्र की सजावटी नर्सरियों का दौरा किया तथा नर्सरी उत्पादकों से सीधे संवाद कर उनकी वर्तमान कार्यप्रणालियों तथा चुनौतियों को समझा।

दौरे के दौरान वैज्ञानिकों ने नर्सरी उद्योग में उर्वरकों के संतुलित उपयोग के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि उर्वरकों का अत्यधिक या असंतुलित प्रयोग मृदा स्वास्थ्य को खराब कर सकता है, पौधों की गुणवत्ता घटा सकता है तथा समय के साथ उत्पादन लागत बढ़ा सकता है।
टीम ने पर्यावरण-अनुकूल विकल्प के रूप में जैव उर्वरकों के लाभों के बारे में भी जागरूकता पैदा की, जो टिकाऊ उत्पादन को समर्थन देते हैं।

विशेष रूप से मृदा उर्वरता बढ़ाने, मृदा जैव विविधता बनाए रखने तथा समग्र मृदा स्वास्थ्य सुधारने में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला गया। उत्पादकों को समेकित पोषक तत्व प्रबंधन पद्धतियां अपनाने के लिए प्रेरित किया गया, जिसमें रासायनिक और जैविक दोनों प्रकार के आदानों का संतुलित उपयोग किया जाता है।
कार्यक्रम का समापन एक संवादात्मक सत्र के साथ हुआ, जिसमें नर्सरी संचालकों ने अपने अनुभव साझा किए तथा उर्वरक प्रबंधन से संबंधित अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
(स्रोत: भाकृअनुप–पुष्पकृषि अनुसंधान निदेशालय, पुणे)







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