9 अप्रैल, 2026, पुणे
भाकृअनुप-पुष्प कृषि अनुसंधान निदेशालय, पुणे, के वैज्ञानिकों ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा शुरू किए गए देशव्यापी ‘संतुलित उर्वरक उपयोग पर गहन अभियान’ के अंतर्गत पुणे जिले के चयनित गांवों में किसान जागरूकता कार्यक्रमों की श्रृंखला प्रारंभ की है। इस अभियान के तहत आज हवेली तहसील के निर्गुडी गांव में वैज्ञानिकों की टीम ने एक आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग और सतत कृषि पद्धतियों के महत्व के बारे में जागरूक किया गया, ताकि मृदा स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सके। कार्यक्रम में मृदा उर्वरता बढ़ाने और पोषक तत्वों के कुशल प्रबंधन के लिए मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक सिफारिशों को अपनाने पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम के दौरान किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए, जिससे वे वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर पोषक तत्वों के उपयोग के बारे में बेहतर निर्णय ले सकें। विशेषज्ञों ने उर्वरकों के अत्यधिक और असंतुलित उपयोग के दुष्प्रभावों पर भी प्रकाश डाला। किसानों को एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम) अपनाने के लिए प्रेरित किया गया, जिसमें जैव-इनपुट्स का उपयोग और जैविक संसाधनों का पुनर्चक्रण शामिल है, ताकि खेती की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।

भाकृअनुप-डीएफआर ने आने वाले हफ्तों में इस अभियान को हवेली, मावल और जुन्नर तहसीलों में विस्तार देने की योजना बनाई है। इस पहल का उद्देश्य आगामी खरीफ मौसम से पहले किसानों के बीच व्यापक जागरूकता पैदा करना और पर्यावरण-अनुकूल तथा आर्थिक रूप से व्यवहार्य कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है। यह अभियान पुणे जिले में मृदा स्वास्थ्य सुधारने और सतत कृषि विकास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
(स्रोत: भाकृअनुप–फ्लोरीकल्चर अनुसंधान निदेशालय, पुणे)







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