3 मई, 2026, हैदराबाद
भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान के अंतर्गत 3 मई, 2026 को आंध्र प्रदेश के 8 जिलों में उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर एक गहन अभियान चलाया गया। इस अभियान में 5 कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) की सक्रिय भागीदारी रही, जिसमें खेत-स्तरीय विस्तार गतिविधियों, क्षमता निर्माण तथा डिजिटल प्रसार को प्रभावी ढंग से एकीकृत किया गया। अभियान के तहत आयोजित 5 जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से 316 किसानों तक पहुँच बनाई गई, जबकि 3 प्रशिक्षण कार्यक्रमों से 256 किसान लाभान्वित हुए। इसके अतिरिक्त, हितधारक संवाद कार्यक्रमों में 245 प्रतिभागियों ने शिरकत की साथ ही एक टीवी वार्ता कार्यक्रम के माध्यम से 47 प्रतिभागियों तक जानकारी पहुँचाई गई।

डिजिटल माध्यम से जानकारी के प्रसार ने अभियान की पहुँच को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया, जिससे लगभग 2.14 लाख किसानों तक संदेश पहुँचाया गया। इसके साथ ही 580 किसानों तक प्रत्यक्ष भौतिक संपर्क के माध्यम से भी पहुँच बनाई गई। विस्तार गतिविधियों में हरी खाद (ग्रीन मैन्योरिंग) और जैव उर्वरकों (बायोफर्टिलाइज़र) के प्रदर्शन शामिल थे। साथ ही दीवार लेखन, पोस्टर प्रदर्शन और विशेषज्ञ व्याख्यान जैसी जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से क्षेत्र में संतुलित उर्वरक उपयोग की समझ को मजबूत किया गया और इसके अपनाने को प्रोत्साहित किया गया।
इसी प्रकार, 3 मई 2026 को भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान ज़ोन-X, हैदराबाद, के अंतर्गत आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और पुडुचेरी में उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर एक व्यापक अभियान चलाया गया, जिसमें सभी 72 कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) को शामिल किया गया। इस अभियान में भी खेत-स्तरीय विस्तार, क्षमता निर्माण और डिजिटल प्रसार को प्रभावी रूप से एकीकृत किया गया। अभियान के अंतर्गत 6 जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से 359 किसानों तक पहुँच बनाई गई, जबकि 4 प्रशिक्षण कार्यक्रमों से 294 किसान लाभान्वित हुए। हितधारक संवाद कार्यक्रमों में 245 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

डिजिटल प्रसार इस अभियान का प्रमुख माध्यम रहा, जिसके जरिए लगभग 2.22 लाख किसानों तक पहुँच सुनिश्चित की गई। इसके अतिरिक्त 661 किसानों तक प्रत्यक्ष संपर्क के माध्यम से जानकारी पहुँचाई गई। विस्तार गतिविधियों में हरी खाद और जैव उर्वरकों के प्रदर्शन के साथ-साथ दीवार लेखन, पोस्टर प्रदर्शन तथा विशेषज्ञ व्याख्यान जैसी जागरूकता गतिविधियाँ शामिल थीं। इन प्रयासों ने पूरे ज़ोन में संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इसके अपनाने को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, ज़ोन-X, हैदराबाद)







फेसबुक पर लाइक करें
यूट्यूब पर सदस्यता लें
X पर फॉलो करना X
इंस्टाग्राम पर लाइक करें