भाकृअनुप–आईआईएमआर, हैदराबाद एवं केवीके रामनगर द्वारा आदिवासी किसानों के लिए श्री अन्न (मिलेट) की खेती को बढ़ावा

भाकृअनुप–आईआईएमआर, हैदराबाद एवं केवीके रामनगर द्वारा आदिवासी किसानों के लिए श्री अन्न (मिलेट) की खेती को बढ़ावा

भाकृअनुप-भारतीय श्री अन्न अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद, के जीसीओई–टीएसपी पहल के अंतर्गत भाकृअनुप-कृषि विज्ञान केन्द्र, रामनगर, द्वारा “मिलेट जागरूकता एवं इनपुट वितरण” विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य श्री अन्न खेती को बढ़ावा देना, किसानों के तकनीकी ज्ञान को सुदृढ़ करना तथा सतत एवं जलवायु-सहिष्णु कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

कार्यक्रम में सतत कृषि, जलवायु लचीलापन तथा पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देने में श्री अन्न के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। बागवानी महाविद्यालय बागलकोट के विषय विशेषज्ञों द्वारा क्षमता निर्माण सत्र आयोजित किए गए, जिनमें श्री अन्न आधारित खेती के विभिन्न पहलुओं पर व्यावहारिक एवं संरचित चर्चा की गई।

ICAR–IIMR, Hyderabad & KVK Ramanagara Strengthen Millet Farming among Tribal Farmers

प्रशिक्षण सत्रों में पौध स्वास्थ्य प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी गई, जिसमें प्रमुख कीट एवं रोगों की लक्षण-आधारित पहचान तथा उनके एकीकृत एवं कम लागत वाले नियंत्रण उपाय शामिल थे। इसके साथ ही उद्यम विकास पर भी चर्चा की गई, जिसमें वैल्यू चेन दृष्टिकोण, बाजार संपर्क तथा किसानों की आय बढ़ाने हेतु उद्यमिता के अवसरों को रेखांकित किया गया। श्री अन्न के पोषण एवं कार्यात्मक लाभों पर भी प्रकाश डाला गया, विशेषकर सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर करने और संतुलित आहार को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका को समझाया गया।

किसानों को उन्नत उत्पादन तकनीकों जैसे बेहतर किस्मों का चयन, वैज्ञानिक फसल प्रबंधन तथा संसाधनों के कुशल उपयोग के बारे में तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया गया, जिससे उत्पादकता बढ़ाई जा सके। साथ ही जैविक खेती प्रणालियों, प्रमाणन प्रक्रियाओं तथा सतत कृषि के माध्यम से विशेष बाजारों तक पहुंच बनाने की रणनीतियों पर भी जानकारी दी गई। कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समन्वय किया गया, जिससे प्रशिक्षण सत्रों का सुचारू संचालन, किसानों की सक्रिय भागीदारी तथा इनपुट वितरण सुनिश्चित किया जा सका।

ICAR–IIMR, Hyderabad & KVK Ramanagara Strengthen Millet Farming among Tribal Farmers

इस कार्यक्रम में लगभग 50 आदिवासी किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जो श्री अन्न आधारित खेती में उनकी रुचि और सहभागिता को दर्शाता है। किसानों को रागी (केएमआर-316) बीज, फील्ड बीन (एचए-5) बीज, जैव उर्वरक जैसे ट्राइकोडर्मा, स्यूडोमोनास, एमसी, राइजोबियम, एज़ोस्पिरिलम एवं पीएसबी, साथ ही टोकरी, प्रशिक्षण किट और तकनीकी प्रसार पुस्तिका “श्रीधान्य (मिलेट्स) फसलों में नवीन उत्पादन तकनीक, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन” वितरित की गई। ये सभी सामग्री खेत स्तर पर उन्नत तकनीकों को अपनाने और उत्पादकता बढ़ाने में सहायक होंगी।

यह कार्यक्रम डॉ. सी. तारा सत्यवती, निदेशक, भाकृअनुप-आईआईएमआर, हैदराबाद, के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया, जिसमें किसानों की क्षमता निर्माण, सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने तथा श्री अन्न आधारित आजीविका और पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

(स्रोत: भाकृअनुप–भारतीय श्री अन्न  अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)

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