9 अक्टूबर, 2026, रांची
भाकृअनुप–भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान, रांची ने अपने स्थापना दिवस पर महाराष्ट्र के आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन के 25 वर्षीय द्वितीय वर्ष के पीएच.डी. शोधार्थी दिवंगत श्री प्रथमेश डी. रायपुरे की स्मृति में रक्तदान शिविर का आयोजन किया। इस पहल के माध्यम से दिवंगत शोधार्थी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ-साथ करुणा, मानवता और सामाजिक उत्तरदायित्व को बढ़ावा दिया गया।
वैज्ञानिकों, प्रशासनिक कर्मचारियों, छात्रों, शोधार्थियों और संविदा कर्मचारियों ने शिविर में भाग लिया और स्वैच्छिक रक्तदान एवं सामुदायिक कल्याण के प्रति अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता प्रदर्शित की। इस पहल ने स्वास्थ्य सेवाओं को सहयोग देने और आपातकालीन उपचार, सर्जरी तथा विभिन्न बीमारियों के उपचार की आवश्यकता वाले रोगियों के लिए रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने में जनभागीदारी के महत्व को रेखांकित किया।
डॉ. विजय पाल भड़ाना, संयुक्त निदेशक (अनुसंधान), ने वैज्ञानिक संस्थानों और समाज के बीच संबंधों को सुदृढ़ करने तथा युवा पीढ़ी में सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने दिवंगत शोधार्थी को श्रद्धांजलि अर्पित की और छात्रों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

डॉ. के.के. कृष्णानी, संयुक्त निदेशक (शैक्षणिक), ने व्यक्तिगत सामाजिक उत्तरदायित्व के महत्व पर प्रकाश डाला और कर्मचारियों तथा छात्रों से सामाजिक आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील बने रहने एवं उनके समाधान में सार्थक योगदान देने का आग्रह किया।
डॉ. सुजय रक्षित, निदेशक, भाकृअनुप-आईआईएबी, ने कहा कि इस पहल ने संस्थान के सदस्यों को एक सार्थक सामाजिक उद्देश्य के लिए एकजुट कर स्थापना दिवस समारोह को संस्थागत उपलब्धियों से आगे विस्तार दिया। उन्होंने जोर दिया कि स्वैच्छिक रक्तदान सेवा का एक मूल्यवान कार्य है, जो जीवन बचाने और रोगियों तथा उनके परिवारों को सहायता प्रदान करने में मदद कर सकता है।
संस्थान के विभिन्न अनुभागों के कार्मिकों की भागीदारी ने एकता और सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना को प्रतिबिंबित किया तथा स्थापना दिवस समारोह में मानवीय आयाम जोड़ा।
(स्रोत: भाकृअनुप–भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान, रांची)







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