बारानी कृषि के लिए एआईसीआरपी (एआईसीआरपीडीए) की XXIX द्विवार्षिक कार्यशाला तथा एआईसीआरपीडीए-निक्रा की XIII वार्षिक समीक्षा कार्यशाला का उद्घाटन

बारानी कृषि के लिए एआईसीआरपी (एआईसीआरपीडीए) की XXIX द्विवार्षिक कार्यशाला तथा एआईसीआरपीडीए-निक्रा की XIII वार्षिक समीक्षा कार्यशाला का उद्घाटन

19 जनवरी, 2026, गुवाहाटी

डॉ. एम.एल. जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक (भाकृअनुप) ने आज हॉर्टिकल्चर रिसर्च स्टेशन (एएयू), गुवाहाटी में बारानी कृषि के लिए एआईसीआरपी (एआईसीआरपीडीए) की XXIX द्विवार्षिक कार्यशाला और एआईसीआरपीडीए-निक्रा की XIII वार्षिक समीक्षा कार्यशाला का उद्घाटन किया।

XXIX Biennial Workshop of AICRP for Dryland Agriculture (AICRPDA) and XIII Annual Review Workshop of AICRPDA-NICRA Inaugurated

डॉ. जाट ने एआईसीआरपीडीए नेटवर्क के योगदान की सराहना करते हुए, पानी-पोषक तत्वों के बीच पारस्परिक जुड़ाव, भूमि-जल-ऊर्जा संबंध, प्रकृति-आधारित समाधान के रूप में जैविक पदार्थ के उपयोग, कार्बन ट्रेडिंग तथा शुष्क भूमि की पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं की क्षमता पर अध्ययन के साथ शुष्क भूमि अनुसंधान पोर्टफोलियो को फिर से डिजाइन करने पर जोर दिया। उन्होंने एक मजबूत डाटा इकोसिस्टम बनाने और पिछले 50 वर्षों के डेटा का विश्लेषण करके अनुसंधान कमियों की पहचान करने; प्लॉट से खेत से लेकर प्राकृचिक परिदृश्य के दृष्टिकोण तक संक्रमण, एवं संबंधित संस्थानों के साथ तालमेल पर भी जोर दिया। उन्होंने वर्षों से की गई एआईसीआरपीडीए सिफारिशों को उनके अपनाने और प्रभाव के संदर्भ में ट्रैक करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।

डॉ. ए.के. नायक, उप-महानिदेशक (एनआरएम), और डॉ. बी.सी. डेका, कुलपति, असम कृषि विश्वविद्यालय, ने भी इस अवसर पर उपस्थित होकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

डॉ. नायक ने क्षैतिज एवं ऊर्ध्वाधर एकीकरण और बहु-विषयक दृष्टिकोण के माध्यम से सिस्टम दृष्टिकोण के साथ शुष्क भूमि अनुसंधान को फिर से उन्मुख करने और प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने एआईसीआरपीडीए नेटवर्क से देश में शुष्क भूमि क्षेत्रों का अद्यतन मानचित्र लाने; वर्षों से सिंचित शुष्क भूमि और वर्षा आधारित शुष्क भूमि में बदलाव का विश्लेषण करने; नियंत्रित पर्यावरण अनुसंधान शुरू करने और कुशल संसाधन प्रबंधन के लिए आईओटी (IoTs) का उपयोग करने का आग्रह किया। इस कार्यक्रम के माध्यम से देश में शुष्क भूमि प्रौद्योगिकियों के प्रभाव को उजागर करने वाला एक दस्तावेज़ लाने का सुझाव दिया गया।

XXIX Biennial Workshop of AICRP for Dryland Agriculture (AICRPDA) and XIII Annual Review Workshop of AICRPDA-NICRA Inaugurated

डॉ. डेका ने एआईसीआरपीडीए नेटवर्क से वर्षा परिवर्तनशीलता की चुनौतियों का समाधान करने के लिए स्थान-विशिष्ट प्रौद्योगिकियों को विकसित करने का आग्रह किया।

डॉ. वी.के. सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-क्रिडा, ने अपने स्वागत संबोधन में कार्यशाला के उद्देश्य के बारे में विस्तार से चर्चा की।

इस अवसर पर, गणमान्य व्यक्तियों ने एआईसीआरपीडीए तथा एआईसीआरपीडीए-निक्रा की वार्षिक रिपोर्ट जारी की और तीन सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले केन्द्रों को सम्मानित किया।

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