भाकृअनुप–सीएसडब्ल्यूआरआई, अविकानगर ने भेड़ एवं बकरी में उन्नत प्रजनन तकनीकों के माध्यम से राजस्थान के पशु चिकित्सा कर्मियों को बनाया सशक्त

भाकृअनुप–सीएसडब्ल्यूआरआई, अविकानगर ने भेड़ एवं बकरी में उन्नत प्रजनन तकनीकों के माध्यम से राजस्थान के पशु चिकित्सा कर्मियों को बनाया सशक्त

17 फरवरी – 26 मार्च, 2026, अविकानगर

भाकृअनुप-केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर ने भेड़ एवं बकरी में “कृत्रिम गर्भाधान” विषय पर एक महत्वपूर्ण क्षमता निर्माण कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया। यह कार्यक्रम राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड द्वारा, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली, के तत्वावधान में प्रायोजित था। 17 फरवरी से 26 मार्च, 2026 तक 14 बैचों में आयोजित यह प्रशिक्षण देश में अपने प्रकार की पहली बड़े पैमाने की पहल में से एक रहा।

समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ सुरेश चंद मीणा, निदेशक, पशुपालन विभाग, राजस्थान एवं सीईओ, आरएलडीबी उपस्थित रहे; विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. पी.एस. कालरा, प्रबंधक, आरएलडीबी तथा अध्यक्षता डॉ अरुण कुमार तोमर, निदेशक, भाकृअनुप–सीएसडब्ल्यूआरआई ने की।

ICAR-CSWRI Empowers Rajasthan’s Veterinary Workforce with Advanced Reproductive Technologies in Sheep and Goat

अपने संबोधन में डॉ. मीणा ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भेड़ एवं बकरी पालन के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्नत प्रजनन तकनीकों को अपनाने से उत्पादकता और आनुवंशिक गुणवत्ता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। उन्होंने विभाग और आईसीएआर–सीएसडब्ल्यूआरआई के बीच निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया तथा बताया कि लघु जुगाली करने वाले पशुओं के लिए कृत्रिम गर्भाधान उपकरण खरीदे जा चुके हैं और प्रशिक्षित कार्मिकों को प्राथमिकता के आधार पर वितरित किए जाएंगे। भविष्य में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के विस्तार की भी योजना है।

डॉ. कालरा ने भाकृअनुप–सीएसडब्ल्यूआरआई द्वारा आयोजित इस व्यावहारिक एवं तकनीक-आधारित प्रशिक्षण की सराहना की और प्रतिभागियों को किसानों के बीच अर्जित ज्ञान के प्रसार के लिए प्रेरित किया।

कम समय में बड़ी संख्या में प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करने की चुनौती के बावजूद, यह कार्यक्रम पशु शरीर क्रिया विज्ञान एवं जैव रसायन प्रभाग द्वारा सफलतापूर्वक संपन्न किया गया, जिसका नेतृत्व डॉ. अरुण कुमार तोमर ने किया, जो कार्यक्रम के संयोजक भी थे। संस्थान ने इस पहल को मिशन मोड में संचालित किया, जिससे राजस्थान के भेड़ एवं बकरी क्षेत्र पर दीर्घकालिक सकारात्मक प्रभाव पड़ने की अपेक्षा है।

डॉ. तोमर ने भेड़ एवं बकरी में कृत्रिम गर्भाधान की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इससे तीव्र आनुवंशिक सुधार और उत्पादकता वृद्धि संभव है, तथा इसके प्रभावी क्रियान्वयन में प्रशिक्षित क्षेत्रीय कार्मिकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में उन्नत प्रजनन तकनीकों जैसे—हीट (ईस्ट्रस) समन्वयन, कृत्रिम गर्भाधान, इंट्रावेजाइनल प्रोजेस्टेरोन स्पंज का उपयोग, वीर्य संग्रहण एवं प्रसंस्करण, रोग निदान तथा वैज्ञानिक झुंड प्रबंधन को शामिल किया गया। इन तकनीकों से मेमना एवं बच्चे देने के अंतराल को कम कर उत्पादकता बढ़ाने तथा आनुवंशिक क्षमता में सुधार के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि की संभावना है।

ICAR-CSWRI Empowers Rajasthan’s Veterinary Workforce with Advanced Reproductive Technologies in Sheep and Goat

प्रतिभागियों ने आईसीएआर–सीएसडब्ल्यूआरआई द्वारा विकसित “Avikesil-S” प्रोजेस्टेरोन स्पंज और “Avi MAIL” (मोबाइल कृत्रिम गर्भाधान प्रयोगशाला) जैसी तकनीकों को विभागीय कार्यक्रमों में व्यापक रूप से अपनाने की सिफारिश की। उल्लेखनीय है कि कई प्रशिक्षुओं ने प्रशिक्षण के तुरंत बाद अपने-अपने क्षेत्रों में इन तकनीकों का प्रयोग प्रारंभ कर दिया और भेड़ एवं बकरी में सफलतापूर्वक हीट समन्वयन एवं कृत्रिम गर्भाधान किया।

कार्यक्रम का समापन औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें राजस्थान में लघु जुगाली पशु विकास को वैज्ञानिक हस्तक्षेपों के माध्यम से सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

इस कार्यक्रम में राजस्थान के 27 जिलों से कुल 698 पशु चिकित्सक एवं पैरा-वेटरनरी कार्मिकों—जिनमें वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी, पशु चिकित्सा अधिकारी, पशुधन विस्तार अधिकारी एवं पशुधन निरीक्षक शामिल थे—ने भाग लिया और लाभान्वित हुए।

(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर)

×